क्या अब SIT करेगी PNB घोटाले की जांच? याचिका पर सुनवाई को तैयार सुप्रीम कोर्ट

पीएनबी घोटाला की जांच को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है. कोर्ट शुक्रवार को उक्त याचिका पर सुनवाई करेगा. 

क्या अब SIT करेगी PNB घोटाले की जांच? याचिका पर सुनवाई को तैयार सुप्रीम कोर्ट
सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी सुनवाई.

नई दिल्ली: पीएनबी घोटाला की जांच को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है. कोर्ट शुक्रवार को उक्त याचिका पर सुनवाई करेगा. सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मंगलवार को याचिकाकर्ता और पेशे से वकील विनीत ढांढा के वकील जेपी ढांढा ने उक्त याचिका का उल्लेख किया. जिसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई की जाएगी. दरअसल, याचिका में इस पूरे मामले की एसआईटी जांच और लोन डिफॉल्टर्स को लेकर आरबीआई से गाइडलाइन बनाने की मांग की गई है. 

याचिका में क्या उठाई गई मांग
याचिका में कहा गया है कि नीरव मोदी को प्रत्यर्पित कर पैसे की वसूली की जाए और आरबीआई एक नया दिशानिर्देश जारी करे, जिसमें प्रावधान हो कि 10 करोड़ या उससे अधिक रुपए लोन लेने वालों से रिकवरी और उनकी निगरानी सुनिश्चित की जा सके. ऐसे मामले में उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान होना चाहिए.

सीबीआई और ईडी का शिकंजा
पीएनबी घोटाले को लेकर सीबीआई और ईडी की लगातार कार्रवाई जारी है. वहीं सूरत के तीन और दिल्ली के एक ठिकाने पर सोमवार को छापेमारी की गई. वहीं केंद्र सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने पीएनबी के अधिकारियों को समन कर पूछताछ के लिए बुलाया था. सीबीआइ ने नीरव मोदी की कंपनी के दूसरे चीफ फाइनेंस ऑफिसर रवि गुप्ता को पूछताछ के लिए समन किया है. सीबीआइ ने पिछले रविवार को पीएनबी के 11 अफसरों, मुख्य आरोपी नीरव मोदी की कंपनी फायरस्टार इंटरनेशनल कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी विपुल अंबानी के अलावा पिछले शनिवार को गिरफ्तार गोकुलनाथ शेट्टी समेत तीन आरोपियों से गहन पूछताछ की. 

15 शहरों में छापेमारी, 20 करोड़ की संपत्ति जब्त
ईडी ने चौथे दिन रविवार को भी देश के 15 शहरों के 45 ठिकानों पर छापे मारे और 20 करोड़ की संपत्ति जब्त की. ईडी दोनों मुख्य घोटालेबाजों से जुड़ी दो दर्जन से ज्यादा अचल संपत्तियों को भी मनी लांड्रिंग निरोधक कानून के तहत जब्त करने की तैयारी में है. अब तक ईडी 5,694 करो़ड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त कर चुका है. उधर सीबीआई ने गीतांजलि कंपनी समूह की भारत स्थित 18 सहयोगी कंपनियों की बैलेंस शीट की जांच शुरू कर दी है. ये कंपनियां मेहुल चौकसी ने बनाई हैं. जांच के जरिए पीएनबी घोटाले की राशि कहां-कहां आई गई, इसका पता लगाया जा रहा है. 

कौन है नीरव मोदी
पीएनबी घोटाले का मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी को पिछले साल ही एनआरआइ बन चुका था. नीरव मोदी ने अपने बैंक के सारे दास्वाज़ों में एनआरआइ होने का ज़िक्र किया था. हालांकि इस बात का अभी तक पता नहीं चल पाया है कि पीएनबी को इसकी जानकारी थी या नहीं, क्‍योंकि इसकी तरफ से जारी एलओयू में नीरव मोदी को एक भारतीय प्रमोटर बताया गया था. नीरव मोदी एएनएम एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मालिक हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कंपनी ने अपने दस्‍तावेजों में अपने मालिक को एनआरआइ बताया है. सारे दस्तावेज छह नवंबर 2017 के हैं. नीरव मोदी पर पीएनबी घोटाला का आरोप है. इस घोटाले में कई बड़ी आभूषण कंपनियां मसलन गीतांजलि, गिन्नी और नक्षत्र भी विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आ गई हैं. इन कंपनियों से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है. 

क्या है पूरा मामला
देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक पीएनबी में 11 हजार करोड़ रुपए (1.8 अरब डॉलर) से ज़्यादा का फ़र्ज़ीवाड़े का पर्दाफाश हुआ. ये घोटाला मुंबई की एक ब्रांच में हुआ. ये घोटाला बैंक की मार्केट वैल्यू का करीब एक-तिहाई और साल 2017 की आखिरी तिमाही के मुनाफे का 50 गुना है. बैंक का कहना है कि लेन-देन में हुए फर्जीवाड़े से कुछ ख़ास लोगों को फायदा पहुंचाया गया है. लेकिन ये चिंता भी जताई जा रही है कि ये घोटाला दूसरे बैंकों पर भी असर डाल सकता है और बैंकिंग सेक्टर के भरोसे पर भी इसका असर होगा. 

घोटाले के लिए फर्जी LoU जारी हुए
अरबपति डायमंड कारोबारी नीरव मोदी और उनके साथियों ने साल 2011 में बिना तराशे हुए हीरे आयात करने को लाइन ऑफ क्रेडिट के लिए पंजाब नेशनल बैंक की एक ब्रांच से संपर्क साधा. आम तौर पर बैंक विदेश से आयात को लेकर होने वाले भुगतान के लिए LoU या लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करता है. इसका ये मतलब है कि बैंक नीरव मोदी के विदेश में मौजूद सप्लायर को 90 दिन के लिए भुगतान करने को राजी हुआ और बाद में पैसा नीरव को चुकाना था. लेकिन पीएनबी के कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर नीरव मोदी की कंपनियों को फर्जी LoU जारी किए और ऐसा करते वक्त उन्होंने बैंक मैनेजमेंट को अंधेरे में रखा. इन्हीं फर्जी LoU के आधार पर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने पंजाब नेशनल बैंक को लोन देने का फैसला किया.

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