PNB स्कैम : भगोड़ा नीरव मोदी गिरफ्तार, ऐसे किया था 14000 करोड़ का घोटाला

कोर्ट के आदेश के 24 घंटे के भीतर नीरव मोदी को गिरफ्तार कर लिया गया. उसे आज ही वेस्टमिंस्टर कोर्ट में पेश किया जाएगा.

PNB स्कैम : भगोड़ा नीरव मोदी गिरफ्तार, ऐसे किया था 14000 करोड़ का घोटाला
नीरव मोदी PNB का 14 हजार करोड़ लेकर फरार है. (फाइल)

नई दिल्ली: भारतीय जांच एजेंसियां जो नीरव मोदी  द्वारा 14000 करोड़ के स्कैम की जांच कर रही है, उनके लिए खुशखबरी है कि नीरव मोदी को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया है. 19 मार्च को वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. आदेश के 24 घंटे के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. नीरव मोदी को आज ही कोर्ट में पेश किया जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि उसे जल्द से जल्द भारत लाया जाएगा. जांच एजेंसियां इसी कोशिश में लगी हुई हैं. आपके मन में अभी सवाल उठ रहा होगा कि आखिरकार नीरव मोदी ने किस तरह पंजाब नेशनल बैंक को 14000 करोड़ का चूना लगा दिया. हैरानी वाली बात यह है कि इतना बड़ा घोटाला एक पूर्व डिप्टी मैनेजर और क्लर्क की मदद से किया गया.

नीरव मोदी को जितने पैसे बैंक से दिए गए वह लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) की मदद से हो पाया. जब विदेश से कुछ आयात किया जाता है तो दो देशों के बैंक के बीच एक तरह से करार होता है कि जिसमें बैंक गारंटर के रूप में काम करता है. उदाहरण के तौर पर अगर एक व्यापारी अमेरिका से कुछ आयात करता है तो यहां का एक बैंक एक अमेरिकन बैंक से कहता है कि वह निर्यातक को एक निश्चित राशि दे. भारतीय बैंक अमेरिकन बैंक को LoU जारी करता है और गारंटर के तौर पर यह कहता है कि निश्चित अवधि के बाद आयातकर ब्याज के साथ पैसे लौटा देगा.

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मतलब आयातक (जो भारतीय है) को अपने देश के एक बैंक के पास अपना प्रस्ताव लेकर जाना होता है. प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद भारतीय बैंक विदेश के बैंक से पेमेंट के लिए कहता है. तय समय बाद व्यापारी ब्याज समेत रकम वापस करने के लिए जाता है और बैंक की तरफ से विदेशी बैंक को पेमेंट किया जाता है. नीरव मोदी ने इसी खेल को अपने तरीके से खेला और बैंक को 14000 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया.

जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेशनल बिजनेस में दो देशों के बैंकों के बीच पेमेंट का काम SWIFT के जरिए होता है. मुंबई स्थित PNB का एक अधिकारी लगातार LoU जारी करता रहा और नीरव मोदी पैसे लूटता रहा. समझने वाली बात है कि जिस दिन LoU जारी किया जाता था बैंक के दोनों- अधिकारी और कर्मचारी उस डिटेल्स को सिस्टम से हटा देते थे, जिसकी वजह से पता नहीं चल पा रहा था कि बैंक का बैलेंसशीट लगातार बिगड़ रहा है.

यह खेल 2011 से लगातार खेला जा रहा था. नीरव मोदी लगातार कर्ज लेता जा रहा था. पुराना कर्ज चुकाए बगैर ही वह दूसरा कर्ज ले लेता था. उस अधिकारी के रिटायर होने के बाद जब उसकी जगह नए अधिकारी आए तो इस खेल से पर्दा उठा और बैंक के 14000 करोड़ रुपये नीरव मोदी की जेब में जा चुके थे.