साल भर में दोगुना हुए आलू के भाव, प्याज अब भी रुला रहा, भाव 90 रुपये तक पहुंचे

त्योहार और चुनाव दोनों का सीजन शुरू हो चुका है, इस बीच प्याज और आलू की आसमान छूती कीमतें एक बार फिर मुद्दा बन चुकी हैं.

साल भर में दोगुना हुए आलू के भाव, प्याज अब भी रुला रहा, भाव 90 रुपये तक पहुंचे

नई दिल्ली: त्योहार और चुनाव दोनों का सीजन शुरू हो चुका है, इस बीच प्याज और आलू की आसमान छूती कीमतें एक बार फिर मुद्दा बन चुकी हैं. प्याज की कीमतें काबू करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, बावजूद इसके प्याज की कीमतें फिलहाल कम नहीं हुई हैं. 

दिल्ली समेत देश के कई शहरों में आलू के दाम दोगुना तक हो चुके हैं, जबकि प्याज 50 परसेंट तक महंगी है. दिल्ली-NCR में प्याज के रीटेल भाव कई शहरों में 80-85 रुपये प्रति किलो हैं. मुंबई में भी प्याज की कीमतें 80-90 रुपये प्रति चल रही हैं. 

साल भर में आलू दोगुना से भी ज्यादा महंगा हुआ

उपभोक्‍ता मामलों के मंत्रालय (Consumer affairs ministry) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में, थोक बाजार में आलू के दाम 108% बढ़े हैं. साल भर पहले थोक में आलू 1,739 रुपये क्विंटल बिकता था, जबकि अब भाव 3,633 रुपये क्विंटल हो गया है. शनिवार को प्‍याज के दाम 5,645 रुपये प्रति क्विंटल थे जो कि सालभर पहले 1,739 हुआ करते थे. यानी प्‍याज के रेट सालभर में 47% बढ़ गए हैं.

आलू तो मान गया, लेकिन प्याज नहीं 

हालांकि आलू की कीमतों में थोड़ी नरमी जरूर आई है. जो आलू 20 अक्टूबर के बाद 70 रुपये प्रति चल रहा था, अब उसके भाव 45-50 रुपये के बीच आ गए हैं, मदर डेयरी की सफल दुकानों पर पिछले हफ्ते आलू 58 से 62 रुपये था. लेकिन प्याज की कीमतें अब भी काबू में नहीं आईँ हैं. प्याज के भाव कुछ दिन पहले 10 रुपये गिरे जरूर थे, लेकिन सप्लाई पूरी तरह बहाल नहीं होने से भाव अब भी 85-90 रुपये के बीच ही हैं.

हांलाकि सरकार का दावा है कि प्याज की कीमतें दिवाली से पहले पहले काबू में आ जाएंगी. इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं. 

प्याज की कीमतें घटेंगी क्योंकि 

1. प्याज की कीमत को कंट्रोल में रखने के लिए सरकार ने बीते 23 अक्टूबर को प्याज पर स्टॉक लिमिट 25 टन कर दी थी. 
2. बफर स्टॉक से भी राज्यों को प्याज़ दी गई है. नैफेड ने 1 लाख टन प्याज बाजार में भेजना शुरू कर दिया है, 
3. नैफेड ने शनिवार को 15 हजार टन लाल प्‍याज के आयात का टेंडर निकाला है.
4. सरकार ने प्याज की कीमत को थामने के लिए सितंबर में ही इसके एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी. 
5. सरकार ने शुक्रवार को भूटान से आलू के आयात में छूट दी, इसके लिए लाइसेंस की जरूरत खत्‍म कर दी गई है और टैरिफ रेट कोटा योजना के तहत अतिरिक्‍त 10 लाख टन आलू के आयात की अनुमति दी गई है.
6. अब स्टॉक लिमिट लागू किये जाने से पहले, प्याज की मंडी में खरीद की तारीख से ग्रेडिंग और पैकिंग के लिये 3 दिन का समय दिया जाएगा
7. किसान रेल के जरिये प्याज को देश के हर कोने तक पहुंचाया जा रहा है.
8. महाराष्ट्र में नासिक की लासलगांव मंडी भी बंद के बाद खुल चुकी है

इन सभी संयुक्त कोशिशों से प्याज कीमतें काबू में आने लगी हैं. उम्मीद है कि दिवाली से पहले पहले ये और सस्ता हो जाएगा. 

देश में आ चुका है 7000 टन प्याज

प्याज की कीमतें और कम होने की उम्मीद इसलिए जताई जा रही है क्योंकि खबर के मुताबिक, अभी तक देश में 7000 टन प्याज आ चुका है. इसके अलावा दिवाली तक करीब 25000 टन प्याज और आने की उम्मीद है. प्याज की कीमत प्याज की नई फसल आने पर भी कम हो जाएगी. बाजार में नई फसल भी अब जल्दी ही आ जाएगी. जानकारों का कहना है कि नए माल आने से प्याज के तेवर में और नरमी देखने को मिलेगी. 

आलू भी काबू में रहेगा क्योंकि 

प्याज के साथ आलू की भी कीमतें काबू में रहें इसलिए आलू की इम्पोर्ट ड्यूटी पर 10 लाख मीट्रिक टन पर 10% का कोटा तय किया गया है. सरकार ने इस कोटे को 31 जनवरी 2021 तक के लिए लागू किया है. फिलहाल आलू की औसत कीमत 42 रुपये के करीब है. दालों की कीमत फिलहाल स्थिर हो गई हैं. चीनी की औसत कीमत फिलहाल 40 रुपये के करीब है, जोकि इस साल स्थिर रहेगी.  

क्यों बढ़ रहे हैं प्याज के भाव 

प्याज की कीमतें आखिर क्यों बढ़ रहीं, इसके पीछे की वजह भी जानना बेहद जरूरी है. दरअसल भारी बारिश ने खेतों में प्याज की फसलों को नुकसान पहुंचाया है. जो भी प्याज बाजार में आ रहा है वह मार्च और अप्रैल की उपज का है. सबसे बड़ी बात यह है कि थोक मंडियों में प्याज की आमद भी घटी है. पुणे के थोक बाजार में प्याज की आमद 500 ट्रक से घटकर 150 ट्रक प्रति दिन हो गई है. यानी सामान्य दिनों में जहां पर हर रोज जहां पर 500 ट्रक पहुंचते थे. अब केवल तीन चौथाई ही आमद हो रही है. 

1. प्याज एक मौसमी फसल है जो भारत में एक वर्ष में दो से तीन बार उपजाई जाती है. 
2. मार्च के अंत तक उपजाया जाने वाला प्याज अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत तक मांग को पूरा करता है. 
3. इसके बीच में अगस्त के महीने में प्याज की ताजा फसल दक्षिणी राज्यों से आती है. 
4. मध्य अक्टूबर तक, खरीफ प्याज की शुरुआती फसल भी बाजारों में पहुंचने लगती है 
5. नवंबर के मध्य तक, खरीफ की फसल की उपज देर से खरीफ के मौसम में आती है. 
6. इस साल, अनियमित मानसून ने इस चक्र को तोड़ दिया. 
7. भारी बारिश के कारण आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों में खरीफ की लगभग 50 फीसदी चौपट हो गई. 
8. इससे न केवल पुणे का थोक बाजार, बल्कि नासिक के लासलगांव का भी खरीद-बिक्री का समीकरण बिगड़ गया है

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