आर्थिक मोर्चे पर बुरी खबर! दूसरी तिमाही में विकास दर 5 से घटकर 4.5% रही

आर्थिक मोर्चे पर बुरी खबर आई है. देश के विकास की रफ्तार और घट गई है.

आर्थिक मोर्चे पर बुरी खबर! दूसरी तिमाही में विकास दर 5 से घटकर 4.5% रही
दूसरी तिमाही में विकास दर घटकर 4.5% पहुंच गई है.

नई दिल्ली: आर्थिक मोर्चे पर बुरी खबर आई है. देश के विकास की रफ्तार और घट गई है. दूसरी तिमाही में विकास दर (Quarter 2 GDP) घटकर 4.5% पहुंच गई है. यह पिछले 6 साल में सबसे कम स्तर पर है. पहली तिमाही में विकास दर 5% रही थी. सरकार ने शुक्रवार शाम आंकड़े जारी किए.  सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद ऐसा हो रहा हैं. .मतलब साफ है कि इकोनॉमी आईसीयू (ICU) में हैं. इसके अलावा, कृषि विकास दर, मैन्युफैक्चरिेंग और सर्विस सेक्टर में भी गिरावट दर्ज की गई है. दूसरी तिमाही में माइनिंग ग्रोथ 0.1%, कंस्ट्रक्शन ग्रोथ 8.5% से घटकर 3.3%, मैन्युफैक्चरिेंग ग्रोथ 6.9% से घटकर 1% सर्विस सेक्टर ग्रोथ 7.3% से घटकर 6.8%, इंडस्ट्री ग्रोथ 6.7% से घटकर 0.5% रही. 

बिगड़ती इकोनॉमी की बड़ी बातें
विकास दर में लगातार गिरावट जारी है. 6 साल में सबसे कम स्तर पर पहुंच गई है. अक्टूबर में खुदरा महंगाई 16 महीने के ऊपरी स्तर पर है. बेरोजगारी में लगातार बढ़ोतरी, 2017-18 में 6.1% रही. अक्टूबर में लगातार तीसरे महीने निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है. बैंकिंग और हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर दिक्कतों का सामना कर रहा है. ऑटो, टेलीकॉम, बैंक सहित कई सेक्टर में छंटनी हो रही है.

बेरोजगारी को लेकर 'डरना जरूरी है'!
- मैन्युफैक्चरिंग में 2014 से लेकर अब तक 35 लाख से ज्यादा नौकरियां गईं- AIMO
- IT सेक्टर में भी करीब 40 लाख नौकरियों पर संकट 
- सरकारी कंपनी VSNL ने VRS के जरिये करीब 75000 लोगों को निकाला
- पिछले कई साल से बेरोजगारी दर 4-10% रही 
- 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1% रही, 45 साल में सर्वाधिक 
- अप्रैल 2019 से ऑटो सेक्टर में 3 लाख नौकरियां गईं

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अर्थव्यवस्था का कड़वा सच सरकार को कबूल नहीं ?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो दिन पहले ही बयान दिया था कि आर्थिक मंदी का मतलब क्या है, क्या इस देश में नेगेटीव ग्रोथ हो रही है, बिल्कुल नहीं और विश्व बैंक, IMF की ओर से भी ये बोला जाता है कि भारत के ग्रोथ रेट और चीन की ग्रोथ रेट के पीछे ही पूरे दुनिया चलने वाली है आने वाले समय में ये नेगेटीव ग्रोथ रेट नहीं है. उधर, जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि कई अर्थशास्त्री, रिर्जव बैंक के पूर्व गर्वनर मंदी को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं, सरकार को उनके चिंतन को लेकर के कुछ कदम उठाने चाहिए.