Ratan Tata बनना चाहते थे कुछ और, इतने साल बाद भी है मलाल

Ratan Tata ने  लॉस एंजिलिस में एक वास्तुकार के कार्यालय में भी कुछ वक्त काम किया

Ratan Tata बनना चाहते थे कुछ और, इतने साल बाद भी है मलाल
रतन टाटा (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: टाटा ग्रुप के सबसे वरिष्ठ रतन टाटा ने आखिरकार अपने दिल की बात लोगों से सामने रख ही दी. टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा ने बताया कि वे कभी भी इंजीनियर नहीं बनना चाहते थे. उन्होनें कहा कि वे तो असल में एक वास्तुकार (Architect) बनने में रूचि रखते थे. नहीं बन पाने का उन्हें आज भी मलाल है.

‘भविष्य के डिजाइन और निर्माण’ विषय पर कॉर्पगिनी के वेबिनार में टाटा ने कहा, 'मैं हमेशा से आर्किटेक्ट बनना चाहता था क्योंकि यह मानवता की गहरी भावना से जोड़ता है. मेरी उस क्षेत्र में बहुत रुचि थी क्योंकि आर्किटेक्चर से मुझे प्रेरणा मिलती है. लेकिन मेरे पिता मुझे एक इंजीनियर बनाना चाहते थे, इसलिए मैंने दो साल इंजीनियरिंग की.'

पूरी जिंदगी वास्तुशिल्प से दूरी
टाटा ने कॉरनैल विश्वविद्यालय से 1959 में वास्तुशिल्प में डिग्री ली. उसके बाद भारत लौटकर पारिवारिक कारोबार संभालने से पहले उन्होंने लॉस एंजिलिस में एक वास्तुकार के कार्यालय में भी कुछ वक्त काम किया. उन्होंने कहा, ''हालांकि बाद में मैं पूरी जिंदगी वास्तुशिल्प से दूर ही रहा. मुझे वास्तुकार नहीं बन पाने का दुख कभी नहीं रहा, मलाल तो इस बात का है कि मैं ज्यादा समय तक उस काम को जारी नहीं रख सका.