मार्च 2019 तक नहीं बढ़ेगी आपकी EMI, इस वजह से RBI देगा राहत!

भारतीय रिजर्व बैंक अगले महीने 5 दिसंबर को अपनी पांचवी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करेगा. 

मार्च 2019 तक नहीं बढ़ेगी आपकी EMI, इस वजह से RBI देगा राहत!
आरबीआई ने पिछली बैठक में भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था...(फाइल फोटो)

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक के चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में नीतिगत दरों में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है. सिंगापुर के बैंक डीबीएस की रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक के मार्च, 2019 तक नीतिगत दरों में बदलाव की संभावना नहीं लगती है. इसमें मुद्रास्फीति बढ़ने पर वित्त वर्ष 2019-20 में सोची समझी रणनीति के तहत वृद्धि की जा सकती है.

ब्याज दरों पर फैसला कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और मुद्रा के रुख पर निर्भर करता है। डीबीएस बैंक के अर्थशास्त्री इसे 'वाइल्ड कार्ड' कहते हैं. अक्तूबर में खुदरा मुद्रास्फीति आश्चर्यजनक रूप से घटकर 3.31 प्रतिशत पर आ गई. बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के अनुमान को 4.4 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया है. 

बैंक के नोट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में मुद्रास्फीति 4.2 प्रतिशत तक जा सकती है जिससे रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा. केंद्रीय बैंक के नोट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति उसके तय लक्ष्य से नीचे है ऐसे में रिजर्व बैंक के पास ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने की गुंजाइश है. 

अगले महीने होगी आरबीआई की बैठक
भारतीय रिजर्व बैंक अगले महीने 5 दिसंबर को अपनी पांचवी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करेगा. अनुमान जताया जा रहा है कि आरबीआई इस बैठक में नीतिगत दर में बदलाव नहीं करेगा और यथास्थिति बनाए रखेगा. डन एंड ब्रैडस्ट्रीट इकोनॉमी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. ब्याज दरों में बदलाव न होने से आपकी ईएमआई अभी नहीं बढ़ेगी. आरबीआई ने पिछली बैठक में भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था. 

क्यों नहीं होगा बदलाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और कृषि उत्पादन अधिक रहने के चलते उम्मीद जताई जा रही है कि ब्याज दरों में बदलाव नहीं होगा. डन एंड ब्रैडस्ट्रीट इकोनॉमी ने अपने पूर्वानुमान में कहा कि कृषि उत्पादन में मजबूती और सब्जी एवं फलों की कीमतों में नरमी से खाद्य मुद्रास्फीति को दायरे में रखने में मदद मिलेगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की नई खरीद नीति से आने वाले समय में कृषि उपज की कीमतों को समर्थन मिलेगा. फर्म को इस वर्ष नवंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के 2.8 से 3 प्रतिशत और थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के 4.8 से 5 प्रतिशत के दायर में रहने की उम्मीद है.

डन एंड ब्रैडस्ट्रीट इंडिया के प्रमुख अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा, "कच्चे तेल की कीमतों से उत्पन्न होने वाले जोखिम में काफी हद तक कमी आई है क्योंकि निकट भविष्य में कीमतों में कमी या सुस्त बने रहने की संभावना है. इसने आंशिक रूप से भारत के चालू खाते के घाटे, राजकोषीय फिसलन और मुद्रास्फीति जोखिम से जुड़ी चिंताओं को कम करने में मदद की है."

सिंह ने कहा कि विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी, रुपये की विनिमय दर में स्थिरता, औद्योगिक उत्पादन में मजबूती और मुद्रास्फीति में नरमी से आर्थिक वृद्धि में सुधार को समर्थन मिला है. हालांकि, सिंह ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली के फंसे कर्ज में लगातार वृद्धि हो रही है और गैर-बैंकिंग क्षेत्र में नियमों को कड़ा करने की संभावना से वित्तीय प्रणाली में कुछ व्यवधान पैदा हो सकते हैं. सिंह ने कहा, "हमारा अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में नीतिगत दर में परिवर्तन नहीं करेगा."

इस समय रेपो दर 6.50 प्रतिशत पर है. गत पांच अक्टूबर को हुई समीक्षा बैठक में इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया. जीडीपी वृद्धि का अनुमान भी 7.4 प्रतिशत पर पूर्ववत रखा गया है.