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रिजर्व बैंक के सामने ब्याज दर के मोर्चे पर मुश्किल विकल्प

खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट के संकेत नहीं दिखने के बीच रिजर्व बैंक  (आरबीआई) के सामने चालू वित्त वर्ष में दूसरी बार नीतिगत दरों में कटौती का मुश्किल विकल्प सामने हैं ताकि सरकार और उद्योग की वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए ब्याज दर कम करने की उम्मीद पूरी की जा सके।

रिजर्व बैंक के सामने ब्याज दर के मोर्चे पर मुश्किल विकल्प

नई दिल्ली : खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट के संकेत नहीं दिखने के बीच रिजर्व बैंक  (आरबीआई) के सामने चालू वित्त वर्ष में दूसरी बार नीतिगत दरों में कटौती का मुश्किल विकल्प सामने हैं ताकि सरकार और उद्योग की वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए ब्याज दर कम करने की उम्मीद पूरी की जा सके।

ज्यादातर बैंकरों और विशेषज्ञों का मानना है कि चार अगस्त को केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती की संभावना कम है क्योंकि फिलहाल खुदरा मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर है और ऋण का उठान कम है। इधर, उद्योग नीतिगत दरों में कटौती की मांग कर रहा है क्योंकि थोकमूल्य आधारित मुद्रास्फीति कम है और औद्योगिक वृद्धि में नरमी है। यहां तक कि सरकार भी चाहती है कि नीतिगत दर कम रहे ताकि वृद्धि को प्रोत्साहित किया जा सके।

एसबीआई की अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा, ‘नहीं, मैं कोई उम्मीद नहीं कर रही हूं कि आरबीआई नीतिगत दरों में कटौती करेगा।’ उन्होंने कहा, ‘थोकमूल्य आधारित सूचकांक शून्य से नीचे है लेकिन खुदरा मुद्रास्फीति में थोड़ी तेजी आई है। हालांकि ऐसा मुख्य तौर पर खाद्य मूल्यों में बढ़ोतरी के कारण हुआ। आरबीआई इसके खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर आधारित कर रही है इसलिए मुझे लगता है कि नीतिगत दरों में कटौती होगी।’ 

खुदरा मुद्रास्फीति जून में 5.4 प्रतिशत के आठ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई वहीं इसी माह में थोकमूल्य आधारित मुद्रास्फीति शून्य से 2.4 प्रतिशत कम रही। आरबीआई नीतिगत दर पर फैसला करने के लिए मुख्य तौर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को ध्यान में रखता है। अगली समीक्षा चार अगस्त को होनी है।

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