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RBI ने फंसे हुए कर्ज की वसूली के नियम बदलें, बैंकों को राहत

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फंसे कर्जों के समाधान के बारे में गत वर्ष फरवरी में जारी व्यवस्था को खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दो महीने बाद शुक्रवार को नए नियम जारी किए.

RBI ने फंसे हुए कर्ज की वसूली के नियम बदलें, बैंकों को राहत

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फंसे कर्जों के समाधान के बारे में गत वर्ष फरवरी में जारी व्यवस्था को खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दो महीने बाद शुक्रवार को नए नियम जारी किए. नई व्यवस्था में पिछले परिपत्र की भावनाओं को बरकरार रखते हुए बैंकों को ऋण भुगतान में चूक के मामलों को 30 दिन के अंदर चिह्नित कर उसके वसूली/समाधान की प्रक्रिया शुरू करनी होगी. इससे पहले 12 फरवरी, 2018 में जारी परिपत्र के तहत एक दिन की चूक पर भी खाते को एनपीए घोषित कर समाधान की कार्रवाई शुरू करना अनिवार्य कर दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई के 12 फरवरी के परिपत्र को उसके अधिकार से बाहर बताते हुए उसे 2 अप्रैल 2019 को खारिज कर दिया था. रिजर्व बैंक ने कहा कि 2000 करोड़ रुपये या उससे ऊपर के ऋण खातों के संबंध में जारी नई व्यवस्था ऋण समाधान की पुरानी सभी व्यवस्थाओं- ऋण खातों के समाधान के लिए संकटग्रस्त संपत्तियों को पुनर्जीवित करने, कॉर्पोरेट कर्ज पुनर्गठन योजना, मौजूदा दीर्घकालिक परियोजना ऋणों का लचीला ढांचा, रणनीतिक कर्ज पुनर्गठन योजना (एसडीआर) और फंसी हुई संपत्ति का सतत पुनर्गठन (एस4ए)- का स्थान लेगी. नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव लागू हो गई है.

नई व्यवस्था में ऋणदाता बैंकों और वित्तीय संस्थानों को एनपीए या वसूल नहीं हो रहे ऋणों के संबंध में नुकसान के लिए प्रावधान करने में थोड़ी मोहलत दी गई है. इससे कम पूंजी वाले बैंकों को सहूलियत होगी. नई व्यवस्था के तहत बैंकों को पहले 180 दिन के अंदर ऋण का समाधान न होने पर 20 प्रतिशत का प्रावधान करना होगा और 365 दिन के अंदर भी समाधान न होने पर 15 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रावधान करना होगा. इस तरह उन्हें फंसे ऋणों के कुल 35 प्रतिशत पूंजी की व्यवस्था करनी होगी.

आरबीआई ने कहा कि इस नयी व्यवस्था के लागू होने के बाद भी वह खुद ब खुद बैंकों को किसी ऋण नहीं चुकाने वाली कंपनी के खिलाफ दिवाला कानून के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दे सकता है. आरबीआई का नया परिपत्र फंसे कर्ज की जल्द पहचान, उनकी सूचना देने और समयबद्ध समाधान की रूपरेखा प्रदान करता है. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि कर्ज देने वाले बैंकों/वित्तीय संस्थानों को ऋण वसूली में दिक्कत शुरू होते ही उसे विशेष उल्लेख वाले खाते (एसएमए) के रूप में वर्गीकृत करना होगा.

यदि कोई बैंक, वित्तीय संस्थान, सूक्ष्म वित्त बैंक या एनबीएफसी किसी कर्जदार के कर्ज भुगतान में चूक करने की सूचना देता है तो सभी कर्जदाताओं को 30 दिन के भीतर उसकी समीक्षा करनी होगी. इस अवधि में कर्जदाता उस खाते के समाधान की रणनीति पर फैसला कर सकते हैं. इसमें समाधान योजना (आरपी) की प्रकृति और योजना के क्रियान्वयन के लिए दृष्टिकोण शामिल होंगे. रिजर्व बैंक ने नए परिपत्र में कहा कि समीक्षा के दौरान, जिन मामलों में समाधान योजना लागू की जानी है, उनमें सभी कर्जदाताओं को आपस में एक समझौता (आईसीए) करना होगा.

नई व्यवस्था में यदि ऋण के मूल्य के हिसाब से 75 प्रतिशत और संख्या के हिसाब से 60 प्रतिशत वित्तीय ऋणदाता किसी समाधान योजना पर सहमत होंगे तो वह योजना सब पर लागू होगी. केंद्रीय बैंक ने कहा कि बैंक/ वित्तीय कर्जदाता वसूली या दिवाला कानून के तहत ऋण समाधान के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने को स्वतंत्र होंगे. आरबीआई ने नयी व्यवस्था में कर्जदाताओं के संयुक्त मंच (जेएलएफ) की व्यवस्था समाप्त कर दी है. यह संकटग्रस्त खातों के समाधान के लिए अनिवार्य संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है.

मालूम हो कि शीर्ष न्यायालय ने दो अप्रैल को फंसे कर्ज के समाधान के संबंध में रिजर्व बैंक के 12 फरवरी 2018 के परिपत्र को रद्द कर दिया था. इसके तहत एक दिन की कर्ज अदायगी में एक दिन की भी चूक होने पर कंपनी को एनपीए घोषित किया जा सकता है. बैंकों के लिये यह अनिवार्य किया गया था कि अगर किसी फंसे कर्ज का समाधान 180 दिन के भीतर नहीं होता है, तो वे उसे दिवाला संहिता के तहत ऋण समाधान की कार्यवाही के लिये भेजे.

कानूनी विशेषज्ञों ने रिजर्व बैंक के नए नियमों का स्वागत करते हुए कहा कि इसमें 12 फरवरी के परिपत्र की मूल व्यवस्था को बरकरार रखते हुए ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो ऋणदाताओं को बहुमत के आधार पर किसी समाधान तक पहुंचने में मदद करेंगे. सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर एल विश्वनाथन ने कहा, "ऋणदाताओं के बीच पारस्परिक समझौते (आईसीए) की व्यवस्था से बैंक आपस में मिलकर एनपीए खाते का समाधान दिवाला कानून की प्रक्रिया के बाहर भी कर सकेंगे.

अन्य विधि सेवा फर्म इकोनॉमिक लॉ प्रेक्टिस के मैनेजिंग पार्टनर सुहैल नथानी ने कहा कि नए नियम उस मूल कारण का समाधान करते हैं जिसके कारण न्यायालय ने पिछले परिपत्र को खारिज किया था. नई व्यवस्था बैंकों, वित्तीय संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर समान रूप से लागू होगी. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि इससे एनपीए के समाधान में तेजी आएगी.