मोराटोरियम अवधि में लोन के ब्याज पर नहीं मिलेगी छूट, RBI ने सुप्रीम कोर्ट से कहा-बैंकों को होगा नुकसान

सुप्रीम कोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हलफनामा दायर कर 6 महीने की मोराटोरियम अवधि के दौरान ब्याज माफी की मांग को गलत बताया है. 

मोराटोरियम अवधि में लोन के ब्याज पर नहीं मिलेगी छूट, RBI ने सुप्रीम कोर्ट से कहा-बैंकों को होगा नुकसान
फाइल फोटो

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हलफनामा दायर कर 6 महीने की मोराटोरियम अवधि के दौरान ब्याज माफी की मांग को गलत बताया है. RBI ने कहा कि लोगों को 6 महीने की EMI अभी न देकर बाद में देने की छूट दी गई है, लेकिन इस अवधि का ब्याज भी नहीं लिया गया तो बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपये  का नुकसान होगा. सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी जिसमें मांग की गई है कि लॉकडाउन के दौरान लोन की किश्त के ब्याज में छूट मिलनी चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से जवाब मांगा था. अब इस मामले पर शुक्रवार को अगली सुनवाई होगी. 

लॉकडाउन में मिली है सुविधा
दरअसल, लॉकडाउन के कारण रिजर्व बैंक ने 27 मार्च को EMI पर तीने महीने के लिए मोराटोरियम पीरियड की घोषणा की थी. मोराटोरियम पीरियड में ग्राहक 3 महीनों (मार्च-अप्रैल-मई) के लिए अपने लोन की EMI टाल सकते हैं. हालांकि मोराटोरियम सुविधा का लाभ लेने पर उन्हें लोन का अतिरिक्त इंट्रेस्ट का भुगतान करना होगा. 

वरिष्ठ वकील अमित साहनी ने शीर्ष अदालत में जनहित याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि अदालत उचित आदेश जारी करे कि बड़े सार्वजनिक हित में बैंक और वित्तीय संस्थान कम से कम मोराटोरियम पीरियम के लिए अपने ग्राहकों से अतिरिक्त ब्याज नहीं वसूलें.

अमित साहनी ने पीआईएल में कहा है कि मोराटोरियम कानूनी रूप से देनदार को भुगतान स्थगित करने की अनुमति देता है. लिहाजा उनकी तरफ से कहा गया है कि लॉकडाउन के चलते लोग बेहद कठिनाई का सामना कर रहे हैं. व्यापार और कामकाज रुक गया है और पूरा बाजार धराशाही हो गया है. जब पूरा देश स्वास्थ्य आपातकाल से प्रभावित है, वित्तीय संस्थानों को लाभ अर्जित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.

पीआईएल में कहा गया है प्रत्येक व्यक्ति, जिसने ऋण लिया है, आर्थिक रूप से स्थिर नहीं है और स्वास्थ्य आपातकाल के कारण बाजार की हालत सुधरने में भी पर्याप्त समय लग सकता है. अर्जी में जोर देकर कहा गया है कि वह यह मांग नहीं कर रहे कि लोन की ईएमआई ही न ली जाए, बल्कि मांग यह है कि मोराटोरियम अवधि के दौरान ईएमआई पर कोई ब्याज नहीं होना चाहिए.

अर्जी में यह भी सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि अगर भविष्य में महामारी की स्थिति और प्रभाव को देखते हुए सरकार द्वारा लॉकडाउन को और आगे बढ़ाया जाता है तो आगे की अवधि के लिए भी लोन देनदारों से ब्याज न वसूला जाए.

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