RBI ने किया डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के इस्तीफे की खबरों का खंडन

विरल आचार्य रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख हैं. 

RBI ने किया डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के इस्तीफे की खबरों का खंडन
(फोटो साभारः वीडियो ग्रैब, यूट्यूब)

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के इस्तीफे की खबरों को गलत तथा अफवाह बताया. रिजर्व बैंक के प्रवक्ता ने कहा, ''इस तरह की खबरें कि आचार्य ने भी इस्तीफा दे दिया है आधारहीन और गलत हैं.'' गवर्नर पद से उर्जित पटेल के इस्तीफे के तुरंत बाद इस तरह की चर्चा चलने लगी कि आचार्य भी पद छोड़ रहे हैं. आचार्य ने 26 अक्टूबर को अपने भाषण में रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को कायम रखने पर जोर दिया था. 

RBI के मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख हैं आचार्य
बता दें कि आचार्य रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख हैं. उन्होंने अपने 90 मिनट के भाषण में कहा था कि यदि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से समझौता किया जाता है, तो बाजार की स्थिति खराब हो जाएगी. आचार्य ने कहा था कि स्पष्टया उन्हें इस भाषण के लिए गवर्नर पटेल का समर्थन है. 

उर्जित ने 4 सितंबर, 2013 में संभाला था आरबीआई गवर्नर का पद 
आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने इस्तीफे का कारण निजी बताया है. केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच कुछ मसलों पर विवाद चल रहा था. हालांकि, पिछले माह 19 नवंबर को आयोजित बोर्ड बैठक से पहले इसे निपटाने की बात कही गई थी. गौरतलब है कि उर्जित ने 4 सितंबर, 2013 में आरबीआई गवर्नर का पद संभाला था. पिछले महीने उनके इस्तीफा देने की खबर आई थी, लेकिन बाद में सब कुछ ठीक हो गया था. पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी पिछले माह मुलाकात की थी.

दोनों के बीच इस विवाद को सुलझाने को लेकर एक फॉर्मूला भी तय हुआ था. इस फॉर्मूले के तहत आरबीआई से पैसे मांगने को लेकर केंद्र नरमी बरतेगा और दूसरी तरफ आरबीआई भी सरकार को कर्ज देने में थोड़ी ढिलाई बरतेगा.

सरकार और आरबीआई के टकराव के सवाल टाल गए थे पटेल 
पिछले हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने पिछले हफ्ते मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद होने वाले परंपरागत संवाददाता सम्मेलन में सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच चल रही कशमकश पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा था, "मैं इन सवालों से बचना चाहूंगा क्योंकि हम मौद्रिक नीति समीक्षा पर चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने आरबीआई की स्वायत्तता के विषय में डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के सार्वजनिक रुख और रिजर्व बैंक की आर्थिक पूंजी प्रबंधन नियम के बारे में पूछे गए सवालों को इसी तरीके से टाल दिया. 

बोर्ड की बैठक में जाहिर किये थे मतभेद
गौरतलब है कि गत 23 अक्टूबर को मुंबई में हुई पिछली बोर्ड बैठक ने वित्त मंत्रालय और आरबीआई के आपसी मतभेदों को खुलकर सार्वजनिक कर दिया था. आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता का मुद्दा उठाते हुए आचार्य ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए रिजर्व बैंक को अधिक स्वायत्ता देने की जरूरत है. उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा था कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो परिणाम विनाशकारी हो सकता है. आचार्य ने कहा था कि अगर सरकारें केंद्रीय बैंक की आजादी का सम्मान नहीं करेंगी तो उन्हें बाजारों के गुस्से का सामना करना पड़ेगा.  

बाद में विवाद आगे बढ़ा तो वित्त मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता 'एक महत्वपूर्ण और शासन चलाने के लिए स्वीकार्य जरूरत' है. मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सरकार और आरबीआई दोनों को सार्वजनिक हित और भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से काम करना है.

(इनपुट भाषा से)

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