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मोदी सरकार-2 में क्या बदल जाएगी रियल एस्टेट की तस्वीर? अच्छे दिन आने का इंतजार

लंबे समय से मंदी का मार झेल रहा ये सेक्टर अब पटरी पर लौटने की बाट जोह रहा है.

मोदी सरकार-2 में क्या बदल जाएगी रियल एस्टेट की तस्वीर? अच्छे दिन आने का इंतजार
निवेशक अभी भी मार्केट से दूरी बना कर बैठे हैं और लंबे समय से जो प्रोजेक्ट लटके पड़े हैं. (फाइल)

नई दिल्ली: मोदी सरकार-2 बनने के बाद हर सेक्टर आस लगाए बैठा है कि समय बदलेगा और ग्रोथ की रफ्तार बढ़ेगी. सब सेक्टर की तरह सबसे बड़ी उम्मीद अगर कोई सेक्टर लगाए बैठा है तो वह है रियल एस्टेट सेक्टर. लंबे समय से मंदी का मार झेल रहा ये सेक्टर अब पटरी पर लौटने की बाट जोह रहा है. सवाल कई हैं. क्या इस मार्केट में निवेशकों की वापसी होगी ? लंबे समय से घरों का इंतजार कर रहे होम बायर्स को इंसाफ मिलेगा ? क्या बिल्डर्स की मनमानियों पर लगाम लगाई जा सकेगी ? मोदी सरकार-1 में 2022 तक हर परिवार को छत देने की बात कही गई थी, उसकी रफ्तार कितनी तेजी से बढ़ेगी. 

NDA सरकार-2 और रियल एस्टेट
देश की जनता ने तो अबकी बार 300 के पार का अपना वादा पूरा कर दिया, लेकिन अब समय आ गया है कि मोदी सरकार-2 अपने वादे को निभाए और रियल एस्टेट सेक्टर की गाड़ी जो पटरी से उतरी हुई है, उसे दोबारा से ट्रैक पर वापिस लाने में तेजी से काम करे. जिस तरह से मोदी सरकार-2 को प्रचंड बहुमत मिला है उससे रियल एस्टेट सेक्टर को काफी उम्मीदें हैं. निवेशक अभी भी मार्केट से दूरी बना कर बैठे हैं और लंबे समय से जो प्रोजेक्ट लटके पड़े हैं, उसे पूरा करने की कवायद तेजी से करने की जरूरत है. 

क्या हैं चुनौतियां?
नेशनल रियल इस्टेट डिवेलपमेंट काउंसिल(NREDCO) के वाइस-चेयरमैन प्रवीण जैन ने माना है कि सरकार-2 के सामने सबसे बड़ी चुनौती होम बायर्स को घर दिलवाना है. जो घर खरीदार पिछले 7-8 सालों से पजेशन का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए सरकार को काफी कदम उठाने चाहिए. बेशक गलत बिल्डर्स को सरकार सजा दिलवाए लेकिन साथ में होम बायर्स की समस्या का हल भी करें. जैन मानते हैं कि सरकार GDP बढ़ाने की कोशिश कर रही है, ऐसे में सरकार अगर रियल एस्टेट इंडस्ट्री की तरफ ध्यान दे और नए निवेश की सोचे तो जीडीपी में कम से कम 2-2.5% का इजाफा हो सकता है. इसका सीधा फायदा सरकार को तो मिलेगा, साथ में इंडस्ट्री की रफ्तार भी बढ़ेगी.  

रिफॉर्म का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद- शाह
रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन क्रेडाई के चेयरमैन जक्से शाह के मुताबिक, मोदी सरकार-1 में RERA, नोटबंदी, और जीएसटी जैसे बड़े निर्णय लिए गए. वहीं, अफोर्डेबल हाउसिंग की रफ्तार को बढ़ाने के लिए काफी कदम उठाए गए जिसका सीधा फायदा आम लोगों तक पहुंचा है. मोदी सरकार-2 से यही उम्मीद है कि आने वाले समय में भी रिफॉर्म का सिलसिला जारी रहेगा. NBFC को लेकर काफी मुश्किल का दौर चल रहा है जिसे जल्द ही सुलझाने की जरूरत है. बिना बिके मकानों की संख्या को कम करने के लिए भी कई अहम फैसले लेने की जरूरत है ताकि बिल्डर्स पर बोझ कम हो और नए प्रोजेक्ट्स तेजी से आएं. स्टांप ड्यूटी को जीएसटी के अन्दर मर्ज करने की जरूरत है. 

NCR में रुके प्रोजेक्ट्स पर काम हो शुरू
गुलशन होम्स के डायरेक्टर दीपक कपूर का कहना है सरकार-2 से सबसे पहली उम्मीद यही है कि जो अटके प्रोजेक्ट्स हैं, उसे तेजी से पूरा किया जाए ताकि होम बायर्स को घर मिल सकें. अभी तक बातें ज्य़ादा हुई हैं और एक्शन न के बराबर हुआ है. अटके प्रोजेक्ट्स की ज़्यादातर मुश्किलें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा (वेस्ट) में हैं. सरकार को चाहिए कि इस तरफ सबसे पहले ध्यान दें. दूसरा, कुछ डेवलपर्स की वजह से मार्केट काफी ख़राब हुई है जिससे बैंकों और (NBFS) एनबीएफसी का भरोसा काफी कम हुआ है और जो अच्छे डेवलपर्स हैं, उन्हें काम करने की काफी दिक्कत हो रही है. ऐसे में काफी सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है. सरकार को इज ऑफ डूंइग बिजनेस की तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है. 

2022 तक हर परिवार को छत
सिग्नेचर ग्लोबल के फाउंडर चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल का कहना है कि मोदी सरकार-2 को जिस तरह से जीत मिली है और देश की जनता ने जिस तरह से भरोसा जताया है, अब जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है. मोदी सरकार का सपना है कि 'हाउसिंग फॉर ऑल' जिसे हर हालात में पूरा करना है. फिलहाल इस सपनो को पूरा करने के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस की मांग काफी समय से उठ रही है जिसे पूरा करना काफी ज़रुरी है. वहीं, PMAY यानी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सालाना 22,000 करोड़ का फंड जारी होता है, जिसे डबल करने की जरूरत है. इसके अलावा, अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए सस्ते लोन देने की जरूरत है ताकि प्रोजेक्ट्स की रफ्तार को तेजी से बढ़ाया जा सके. 

होम बायर्स की उम्मीदें
नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि अगर कोई अस्पताल में होता है तो डॉक्टर इलाज करता है तो ऐसे में रियल एस्टेट इंडस्ट्री बीमार पड़ी है और सरकार को इसकी तरफ ध्यान देना चाहिए. भारी निराशा के बावजूद मोदी सरकार को वोट दिया गया है और अब समय है कि बायर्स के हितों की रक्षा हो और पिछली सरकार के साथ बिल्डर्स नो जो गलतियां की हैं---उसको ठीक किया जाए. प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए सरकार को फंड देना चाहिए ताकि जो जीवनभर की कमाई दे चुके हैं, उनके घर का सपना पूरा हो सके. 

बायर पुनीत प्रॉशर कहते हैं कि दरअसल नोएडा के सेक्टर 107 में हॉर्ट बीट सिटी प्रोजेक्ट 2011 में शुरु हुआ था और 8 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक स्ट्रक्चर ही खड़े हैं. प्रोजेक्ट का काम पूरी तरह से बंद है. बायर्स कई बार राज्य और केंद्र सरकार से गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक मिले हैं तो झूठे आश्वासन. पुनीत मानते हैं कि अब मोदी सरकार से काफी उम्मीदें हैं और सरकार को एक फंड बनाकर काम पूरा करवाना चाहिए ताकि होम बायर्स को घर मिले सकें. इसके अलावा, प्रमोटर्स की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए. सबसे बड़ी बात ये है कि रेरा यानी रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी को और मजबूत बनाने की जरूरत है क्योंकि रेरा ने काफी ऑर्डर बायर्स के हक में दिए हैं लेकिन इन ऑडर्स का क्या करें अगर इसको लागू ही न किया जा सके.  

क्या कहते हैं एक्सपर्टस 
एनॉरॉक कंस्लटेंट के वाइस-चेयरमैन संतोष कुमार का कहना है डायरेक्ट और इन-डायरेक्ट तरीके से देखा जाए तो रियल एस्टेट सेक्टर दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार देने वाला सेक्टर है और इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि फिलहाल रियल एस्टेट सेक्टर काफी बुरे दौर से गुजर रहा है. मार्केट में लिक्विडिटी की काफी कमी है जिसकी वजह से प्रोजेक्ट्स पर काम रुका पड़ा है. लिक्विडिटी की कमी से नए प्रोजेक्ट्स काफी कम आ रहे हैं और बायर्स का ज़्यादातर रुझान रेडी टू मूव की तरफ है. बैंक भी बिल्डर्स को पैसा देने में हिचकिचा रहे हैं. अगर यही हालात रहे तो आने वाले समय में रियल एस्टेट का क्या हाल होगा, अंदाजा लगाना काफी मुश्किल होगा. संतोष के मुताबिक, रियल एस्टेट में फिलहाल सबसे बड़ी मुश्किल जीएसटी (GST) भी है. नॉन-अफोर्डेबल पर फिलहाल बिना इनपुट क्रेडिट GST रेट 5% तय किया गया है जिसकी वजह से डेवलपर्स को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, बैंकों को ज़मीन पर फंडिंग के बारे में भी विचार करने की जरूरत है.  

सवाल कई हैं पर जवाब सिर्फ सरकार के पास है. चुनौतियां बढ़ी हैं पर ऐसा नहीं है कि अंसभव है क्योंकि नारा यही है कि मोदी है तो मुमकिन है. बिल्डर, बायर और एक्सपर्टस मानते हैं कि सरकार चाहेगी तो हर समस्या का हल हो जाएगा. हर कोई मोद सरकार से काफी उम्मीदें लगाए बैठे हैं और जनता ये भी कह रह रही है कि मोदी है तो मुमकिन है. अब देखना काफी अहम होगा कि मोदी सरकार 2 कितनी जल्दी इन चुनौतियों से निपटेगी और कब इस सेक्टर की रफ्तार तेजी से बढ़ेगी.