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RPF के 'ऑपरेशन थंडर' के बाद भी जारी है यात्रियों की समस्याएं, नहीं मिल रहे टिकट

ऑपरेशन थंडर के तहत देश के 141 शहरों में 276 ठिकानों पर RPF की तरफ से कार्रवाई को अंजाम दिया गया. इस कार्रवाई में 387 रेल टिकट दलालों को गिरफ्तार किया गया.

RPF के 'ऑपरेशन थंडर' के बाद भी जारी है यात्रियों की समस्याएं, नहीं मिल रहे टिकट
ये दलाल सॉफ्टवेयर की मदद से पहले ही टिकट बुक कर लेते हैं. (फाइल)

नई दिल्ली: देश का सबसे बड़ा यात्री साधन भारतीय रेल और अगर इस साधन में ही सेंध लग जाए, तो यात्रियों की यात्रा बंटाधार होना तय है. मई-जून ये वो महीने हैं जब स्कूली बच्चों की छुट्टियां होती हैं. तो इसी मौके पर बच्चों के माता-पिता अपने परिवार के पास जाते हैं या फिर छुट्टियों को एन्जॉय करने हिल स्टेशन, लेकिन जब आप जाने के लिए रेल यात्रा का प्लान करते हैं और रेल टिकट काउंटर या फिर ऑनलाइन टिकट करवाने जाते हैं तो पता चलता है उस ट्रेन की टिकट नहीं है. अगर है तो वो वेटिंग में है. कभी आपने सोचा है ऐसा क्यों होता है? हम आपको बताते हैं वो कौन लोग है जो आपकी टिकटों पर सेंध लगा रहे हैं, क्योंकि इसके पीछे काम करता है एक ऐसा गैंग जो मोटे मुनाफे के लिए आपकी जेब पर डाका डालता है. वो गैंग है टिकट दलाली करने वाला गैंग.

अब आपको बताते हैं की ये एजेंट कैसे काम करते हैं..ये एजेंट पहले फेक पर्सनल मेल आईडी बनाते हैं. सुबह 10 से 10.30 बजे तक तत्काल काउंटर खुलता है. लेकिन10 से सवा 10 बजे का वक्त आम लोगों के लिए होता है. और सवा 10 बजे से साढ़े 10 बजे कमर्शियल लोगों के लिए होता है. लेकिन एजेंट पर्सनल मेल आईडी के जरिये IRCTC की वेबसाईट पर रेड मिर्ची सॉफ्टवेयर के जरिये टिकट बुक करते हैं.

 

 

ये सॉफ्टवेयर एक बार में एक आईडी से 4 टिकट जरूर बुक कर देता है. फिर उन टिकटों को जरूरतमन्द यात्रियों को ब्लैक में तीन गुना दामों पर बेच देते हैं. ऐसे यह रैकेट चलता है. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है की लगातार इन दलालों को गिरफ्तार किया गया है. लेकिन फिर भी इन दलालों का धंधा बदस्तूर जारी है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है हमारा कमजोर कानून, जो इनको गिरफ्तार करने के बाद मामूली सी रकम पर जमानत दे देता है.