रुपए में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट, आप के लिए है यह बड़े खतरे की घंटी

गुरुवार को भारतीय करेंसी अब तक के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. गुरुवार को रुपया 28 पैसे की गिरावट के साथ डॉलर के मुकाबले 68.89 रुपए के स्तर पर खुला. 

रुपए में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट, आप के लिए है यह बड़े खतरे की घंटी

नई दिल्ली: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है. गुरुवार को भारतीय करेंसी अब तक के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. गुरुवार को रुपया 28 पैसे की गिरावट के साथ डॉलर के मुकाबले 68.89 रुपए के स्तर पर खुला. यह रुपये में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है. क्रूड की बढ़ती कीमतें, महंगाई बढ़ने के आसार, करेंट अकाउंट डेफिसिट के बढ़ने का असर रुपए पर पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स की मानें तो आज रुपया 69 प्रति डॉलर के स्तर को छू सकता है. इससे पहले बुधवार को भी रुपया 19 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा था. बुधवार को रुपया 37 पैसे कमजोर होकर प्रति डॉलर 68.61 के स्तर पर बंद हुआ. यह 24 नवंबर, 2016 के बाद का सबसे निचला स्तर था.

क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर बढ़ने की आशंकाओं के चलते भारतीय करंसी पर दबाव बन रहा है. इसके अलावा महीने के आखिर में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (HPCL, IOC, BPCL) की ओर से डॉलर की मांग बढ़ जाती है. इसीलिए महीने के अंत में भारतीय रुपया कमजोर होता है. 

आम आदमी पर क्या होगा असर
> भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट आयात करता है.
> रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा.
> तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं.
> डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है.
> इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है.
> रुपये के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

इस साल 7% से ज्यादा टूटा रुपया 
2018 की शुरुआत से ही रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. इस साल में अभी तक रुपया लगभग 7 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. इससे पहले रुपए ने 24 नवंबर, 2016 को सबसे निचला स्तर छुआ था. उस वक्त रुपया 68.68 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर था. 28 अगस्त, 2013 को रुपया 68.80 का ऑल टाइम लो पर पहुंचा था.