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ये है Samsung की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री, जानिए क्या है इसकी खासियत

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में दुनिया के मानचित्र पर सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री होने का टैग चीन या दक्षिण कोरिया के पास नहीं है. अमेरिका के पास भी नहीं है, बल्कि यह भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के शहर नोएडा के नाम है.

ये है Samsung की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री, जानिए क्या है इसकी खासियत

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री जिसकी स्थापना सैमसंग ने की है. कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में दुनिया के मानचित्र पर सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री होने का टैग चीन या दक्षिण कोरिया के पास नहीं है. अमेरिका के पास भी नहीं है, बल्कि यह भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के शहर नोएडा के नाम है. नोएडा के सेक्टर 81 में स्थित सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की 35 एकड़ में फैली है. इस फैक्ट्री का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन करेंगे. उनके हेलिकॉप्टर को उतारने के लिए फैक्ट्री के पास ही हेलिपैड बनाया गया है. 

क्या हैं इस फैक्ट्री की खासियत
- नोएडा के सेक्टर 81 में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की यह फैक्ट्री 35 एकड़ में फैली है.
- दक्षिण कोरियाई कंपनी की इस फैक्ट्री में 4,915 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है.
- सैमसंग की नई फैक्ट्री में दोगुना उत्पादन करने की क्षमता है.
- सैमसंग अभी भारत में 6.7 करोड़ स्मार्टफोन बना रही है. इस फैक्ट्री के शुरू होने पर करीब 12 करोड़ मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग होगी.
- नई फैक्ट्री में सिर्फ मोबाइल ही नहीं बल्कि सैमसंग के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन भी होगा.

1990 में देश में पहली यूनिट हुई थी शुरू
सैमसंग के देश में दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं. एक नोएडा और दूसरा श्रीपेरुंबदूर में है. इसके अलावा सैमसंग के पास देश में पांच रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर हैं. देश में कंपनी के 1.5 लाख रिटेल आउटलेट हैं. कंपनी का 2016-17 में मोबाइल बिजनेस रेवेन्यू 34,400 करोड़ रुपए और कुल बिक्री 50,000 करोड़ रुपए रही. सैमसंग के जरिए 70 हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है.

भारत में ही क्यों लगी सबसे बड़ी फैक्ट्री?
सैमसंग ने दुनिया के कई बड़े देशों को छोड़कर भारत में ही सबसे बड़ी फैक्ट्री क्यों शुरू की. दरअसल, इसके कई कारण हैं. लेकिन, सबसे बड़ा यह कि भारत में मोबाइल कंपनियों को अपनी फैक्ट्री लगाने में ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ती. वहीं, दूसरे देशों में कई तरह की कानूनी बाधाएं और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. दूसरा यह कि भारत के मुकाबले दूसरे देशों में टैक्स की भी अधिकता है. श्रम लागत भी ज्यादा होती है. भारत में विनिर्माण कंपनियों के लिए इसलिए फायदेमंद होता है क्योंकि यहां एक बड़ा घरेलू बाजार है. इसलिए वैश्विक निर्माता यहां जोखिम लेने के लिए भी तैयार रहते हैं. दूसरे देशों की अपेक्षा भारत उनके लिए एक बेहतरीन विकल्प है. यही कारण है कि कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपनी विनिर्माण इकाई भारत में खोला है.

‘3P’ एजेंडे को बढ़ाना चाहते हैं मून
भारत में दक्षिण कोरिया की सैमसंग, एलजी, हुंडई समेत 500 से ज्यादा कंपनियां हैं. भारत चाहेगा कि कोरिया इन परियोजनाओं में भूमिका और बढ़ाए. कोरिया डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया के साथ ही भारत की 70 हजार करोड़ रुपए जुटाने में मदद कर रहा है. यही वजह है कि पहली बार मून खुद भारत दौरे पर हैं. मून नई दक्षिण नीति के तहत ‘3P’ एजेंडे पर आगे बढ़ना चाहते हैं. ‘3P’ में पीपुल्स, प्रॉसपेरिटी(समृद्धि) और पीस शामिल है. 

क्या है ‘3P’ का मकसद
पहला- पीपुल्स: लोगों के जरिए संबंध बढ़ाना
दूसरा- प्रॉसपेरिटी: साझेदारी निर्माण
तीसरा- पीस: शांति