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SEBI ने बाजार में काले धन के इस्तेमाल मामले में जांच का दायरा बढाया

बाजार नियामक सेबी ने कर चोरी व काले धन की लांड्रिंग के लिए शेयर बाजार प्लेटफार्मों के इस्तेमाल के मामले में अपनी जांच का दायरा बढा दिया है और बड़ी संख्या में ऐसी छोटी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) तथा ब्रोकर इसके घेरे दायरे में हैं जिन पर बीते दो तीन साल में हजारों करोड़ रुपए मूल्य के अवैध लेनदेन में भूमिका निभाने का संदेह है।

SEBI ने बाजार में काले धन के इस्तेमाल मामले में जांच का दायरा बढाया

मुंबई : बाजार नियामक सेबी ने कर चोरी व काले धन की लांड्रिंग के लिए शेयर बाजार प्लेटफार्मों के इस्तेमाल के मामले में अपनी जांच का दायरा बढा दिया है और बड़ी संख्या में ऐसी छोटी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) तथा ब्रोकर इसके घेरे दायरे में हैं जिन पर बीते दो तीन साल में हजारों करोड़ रुपए मूल्य के अवैध लेनदेन में भूमिका निभाने का संदेह है।

सेबी तथा स्टाक एक्सचेंजों की शुरआती जांच में सामने आया है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में में वित्त वर्ष के अंतिम महीनों में तेजी देखने को मिलती है और बीते कुछ साल में इस तरह का लेन देन कई गुना बढा है। सूत्रों ने कहा कि इसके अलावा व्यैक्तिक व कारपोरेट ब्रोकरेज कंपनियों सहित बड़ी संख्या में ऐसी कंपनियां प्रतिभूति बाजार में इस तरह की गड़बड़ियां बार बार करती पाई गई हैं। कई कंपनियों ने अपने पुरानी गड़बड़ियों को छुपाने के लिए मुखौटा कंपनियां बना लीं।

बाजार नियामक के जांच दायरे में आई इकाइयों में कुछ सूचीबद्ध कपंनियां व उनके प्रवर्तक शामिल है। ये इकाइयों शेयर बाजारों के मंच का इस्तेमाल कर चोरी व काले धन को सफेद बनाने से जुड़ी सेवाओं की पेशकश करती हैं। सूत्रों ने कहा कि शेयर बाजारों के जरिए काले धन की लांड्रिंग और कर चोरी के मामले में राशि की मात्रा तय करना कठिन होगा लेकिन यह आसानी से हजारों करोड़ रुपए हो सकती है। सेबी ने पिछले सप्ताह जिन दो मामलों में अंतरिम आदेश पारित किए थे उनमें ही कुल इकाइयों द्वारा कमाया गया अवैध लाभ 500 करोड़ रुपए मूल्य का आंकडा गया है। मनी लांड्रिंग या कर चोरी के संभावित मामलों के अलावा सेबी ने पाया है कि यह प्रतिभूति बाजार में घपले का मामला भी हो सकता है क्योंकि यह बाजार के दुरूपयोग तथा प्रतिभूतियों में अनेक लेन देन से जुड़ा हुआ है।

उल्लेखनीय है कि शेयर कारोबार मंचों के जरिये कर चोरी तथा काले धन को सफेद बनाने (मनीलॉन्ड्रिंग) के संदेह में अबतक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए बाजार नियामक सेबी ने दो दिन पहले शुक्रवार को 260 इकाइयों को प्रतिभूति बाजार में किसी प्रकार का लेन-देन करने से प्रतिबंधित कर दिया।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बाजार (सेबी) मामले की आगे जांच करेगा। साथ ही इस सिलसिले में जरूरी कार्रवाई के लिये उसने मामले को आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, वित्तीय आसूचना इकाई समेत अन्य एजेंसियों को भेजने को निर्णय किया है। दो अलग-अलग अंतरिम आदेशों में सेबी ने कहा कि इन 260 इकाइयों को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया जाता है। इसके तहत वे न तो प्रत्यक्ष रूप से और न ही परोक्ष तरीके से प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री कर पाएंगे।

फर्स्ट फाइनांशियल ग्रुप के ममले में सेबी ने इस कंपनी के अलावा इसके सात प्रवर्तकों और निदेशकों, वरीयता आवंटन से लाभान्वित होने वाले 80 आवंटियों, समूह की 57 इकाइयों तथा सात अन्य को बाजार से निलंबित किया है। इसी तरह की एक बड़ी कार्रवाईरैडफोर्ड ग्रुप और उससे जुड़े लोगों तथा कंपनियों के खिलाफ की गयी है।

इन मामलों में देखा गया कि पहले प्रतिभूतियों को संबद्ध इकाइयों को वरीयता के के साथ बेहिसाब उंचे दामों पर आवंटित किया गया और बाद में इन निवेशकों को मोटे लाभ के साथ प्रतिभूति वापस कंपनी या किसी अन्य सम्बद्ध पक्ष को बेच का निकलने का रास्ता दिया गया। फर्स्ट फाइनेंशियल के शेयरों के मामले में 80 आवंटियों के एक बैच को 14.50 करोड़ रपए के निवेश पर 20-24 महीने में 172.21 करोड़ रुपए का लाभ हुआ।