Siva Industries case: 4,863 करोड़ रुपये का लोन, 323 करोड़ रुपये में ही मान गए बैंक; ऐसा क्यों?

शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग (Siva Industries and Holdings) पर बैंकों का 4,863 करोड़ रुपये का बकाया है. इस कंपनी के खिलाफ 2019 में दिवालिया कार्यवाही शुरू की गई थी.  

Siva Industries case: 4,863 करोड़ रुपये का लोन, 323 करोड़ रुपये में ही मान गए बैंक; ऐसा क्यों?
फाइल फोटो.

नई दिल्ली: शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग लोन सेटलमेंट मामले (Siva Industries Loan Settlement Case) में गंभीर सवाल उठ रहे हैं. इसकी वजह है, बैंकों ने इस ग्रुप होल्डिंग कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही (bankruptcy proceedings) वापस लेने पर सहमति जताई है. हैरानी की बात है जो बैंक पाई-पाई का हिसाब रखती हैं वे 4,863 करोड़ रुपये का लोन मात्र केवल 323 करोड़ रुपये यानी कि केवल 6.5% की वसूली के साथ ही अदालत के बाहर सुलझाने पर सहमति बन गई है. 

जनता के 4,700 करोड़ रुपये का नुकसान

दिलचस्प बात यह है कि CoC मेंबर और देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने सेटलमेंट प्रपोजल के खिलाफ वोटिंग की है. इसके अलावा, मामला और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब ऋणदाता बैंक शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया को वापस ले रहे हैं. इसके अलावा, यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि बैंकों द्वारा स्वीकार की गई सेटलमेंट राशि शिवा इंडस्ट्रीज और होल्डिंग्स की liquidation value से भी कम है. इस समझौते से जनता के 4,700 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. 

IBC अपनी प्रासंगिकता खो सकती है

इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक केनरा बैंक ने निजी तौर पर एआरसी - इंटरनेशनल असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (आईएआरसी) को 1,148 करोड़ रुपये का अपना एक्सपोजर बेच दिया है. चर्चा है कि यह मामला एक गलत मिसाल कायम करेगा और Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 के उद्देश्य पर पानी फेर देगा. इतना नहीं इस मामले के बाद IBC अपनी प्रासंगिकता खो सकता है.

अगली सुनवाई 18 जून 2021 को

दिलचस्प बात यह है कि लीड बैंकर के रूप में IDBI बैंक उसी प्रमोटर के साथ मामले का निपटारा कर रहा है, जिसे आईडीबीआई लोन केस में सीबीआई की जांच का सामना करना पड़ा था. हालांकि इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, चेन्नई बेंच की मंजूरी का इंतजार है. मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 जून 2021 तय की गई है. 

क्या है पूरा मामला?

शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग्स लिमिटेड के मालिक चेन्नई के बिजनेसमैन सी शिवशंकरन हैं, जिन्होंने टेलिकॉम कंपनी एयरसेल (Aircel) की भी स्थापना की थी. शिवशंकरन ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), चेन्नई बेंच में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 (IBC) की धारा 12A के तहत कंपनी के खिलाफ कार्यवाही को वापस लेने के लिए अर्जी दायर की है. 

-शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग्स पर लेंडर्स का लगभग 4863 करोड़ रुपये बकाया है. आईडीबीआई बैंक प्रमुख ऋणदाता है, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एलआईसी, पीएनबी भी इस लोन केस को निपटाने के लिए सहमत हुए हैं. शिवा इंडस्ट्रीज के प्रमोटरों के वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) ऑफर को स्वीकार करके 4863 करोड़ रु. का लोन 323 करोड़ रुपये में खत्म करने पर बैंक सहमत हो गए हैं. 

1. Chronology समझिए

-NCLT, चेन्नई के 5 जुलाई, 2019 के आदेश के तहत शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग्स के खिलाफ 2019 में दिवालिया कार्यवाही शुरू की गई थी. 

शिवा इंडस्ट्रीज का CIRP सफल नहीं रहा है क्योंकि CoC/Lenders ने 'रॉयल पार्टनर्स इन्वेस्टमेंट फंड लिमिटेड' से प्राप्त रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी नहीं दी थी. 

रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने रजिस्ट्रार के सामने Liquidation Petition दायर की, जिसकी गणना 5 अक्टूबर, 2020 तक होनी बाकी है.

- शिवा इंडस्ट्रीज के एक शेयरधारक वल्लल आरसीके ने एनसीएलटी, चेन्नई के सामने 31 अगस्त, 2020 को धारा 60(5) के तहत एक एप्लीकेशन दी, जिसके तहत OTS प्रपोजल पर CoC से विचार करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देने की अपील की गई.

- एनसीएलटी, चेन्नई ने 5 अक्टूबर, 2020 के अपने आदेश के तहत रेजोल्यूशन प्रोफेशनल को ओटीएस पर विचार करने के लिए सीओसी की बैठक बुलाने का निर्देश दिया.

- अप्रैल, 2021 में आयोजित अपनी बैठक में सीओसी ने ओटीएस को मंजूरी दी और Resolution Professional को आईडीबीआई बैंक द्वारा धारा 12A of IBC के तहत आवेदन दाखिल करने के लिए अधिकृत किया गया. 

2. OTS की रूपरेखा 

A. पेमेंट शेड्यूल क्या तय हुआ?

पेमेंट शेड्यूल के मुताबिक, बैंक को 323 करोड़ रुपये के भुगताल के लिए 6 महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है, कुल 4863 करोड़ रुपये की बकाया राशि के मुकाबले एडवांस पेमेंट मात्र 5 करोड़ रुपये तय हुआ है. जो शेड्यूल तय हुआ है उससे प्रतीत होता है कि बैंक इस मामले में 'एक्स्ट्रा एफर्ट' कर रहे हैं. ऋणदाताओं को पूरा भुगतान तय समय सीमा के भीतर यानी NCLT से अनुमोदन प्राप्त होने की तारीख से 180 वर्किंग डे के भीतर प्राप्त होगा.

-OTS के अनुसार, सेटलमेंट एमाउंट का भुगतान प्रमोटर द्वारा जुटाए गए धन/ऋण से या स्वयं या संपत्ति की बिक्री से प्राप्त आय से, ऋण जुटाने या Lenders को सिक्योरिटी के रूप में दी की गई प्रोपर्टी का उपयोग करके बाहरी पूंजी जुटाने से किया जाएगा.

B. लंबित कानूनी कार्यवाही का क्या?

-ऋणदाताओं ने OTS योजना के तहत शिवशंकरन की कंपनियों के खिलाफ सभी लंबित कानूनी कार्यवाही को वापस लेने पर भी सहमति व्यक्त की है.

C. सेटलमेंट के क्या इफेक्ट होंगे?

एनसीएलटी एप्रूवल डेट पर शिवा इंडस्ट्रीज के मौजूदा निदेशक मंडल को बहाल किया जाएगा और शिवा इंडस्ट्रीज पर पूर्ण नियंत्रण प्रमोटरों के पास होगा.

- पूरी सेटलमेंट राशि मिलने पर शिवा इंडस्ट्रीज के सभी खाते रेगुलर हो जाएंगे और उनकी संपत्ति का क्लासिफिकेशन सभी उद्देश्यों के लिए 'स्टैंडर्ड' के रूप में किया जाएगा. OTS प्रमोटरों, शिवा इंडस्ट्रीज, शिवा इंडस्ट्रीज के अधिकांश शेयरधारकों और सीओसी के ऐसे सदस्यों के लिए बाध्यकारी है, जिन्होंने ओटीएस के आधार पर withdrawal application को मंजूरी दी है.

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D. नया लोन मिलेगा?

-शिवा इंडस्ट्रीज के प्रमोटर शिव इंडस्ट्रीज के नाम पर नए लोन का लाभ उठा सकते हैं. 

-यह सौदा बैंकों को आईबीसी अदालत के बाहर और अधिक ओटीएस सौदों पर जोर देने के लिए प्रेरित करेगा, इस प्रकार कानून को कमजोर करेगा. यह विलफुल डिफॉल्टरों को भी प्रोत्साहित करेगा कि वे लिए गए ऋण के एक छोटे से हिस्से को चुकाकर बैंकों पर अपना स्वामित्व बनाए रखने के लिए दबाव डालें. 

दिवालिया आवेदन की वर्तमान स्थिति?

-आवेदन पर शुक्रवार, 11 जून 2021 को एनसीएलटी, चेन्नई बेंच द्वारा सुनवाई की गई. खंडपीठ ने आवेदकों से वोटिंग पैटर्न/रिजल्ट की क्लियर कॉपी दाखिल करने को कहा और मामले को आगे की सुनवाई के लिए 18 जून 2021 की तारीख दी. 

गौरतलब है कि हमारे सहयोगी चैनल ज़ी बिजनेस ने शिवा इंडस्ट्रीज के इस मामले में बैंकों से संपर्क करने की कोशिश की थी. 

क्या कहा बैंकों ने?
प्रमुख ऋणदाता आईडीबीआई बैंक ने न तो ईमेल पर जवाब दिया और न ही बैंक के शीर्ष प्रबंधन ने किए गए कॉल और मैसेज का जवाब दिया. हालांकि, पिछले महीने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बैंक ने दावा किया था कि सेटलमेंट वैल्यू Liquidation value से अधिक है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि सीओसी ने योजना को किस राशि से मंजूरी दी थी. सीओसी का हिस्सा एसबीआई ने निपटान योजना का विरोध किया है और इसके खिलाफ एनसीएलटी का रुख किया है. ज़ी बिजनेस को विस्तृत प्रतिक्रिया में बैंक ने स्पष्ट किया कि 'एसबीआई शिवा इंडस्ट्रीज का ऋणदाता नहीं है, इसलिए ये प्रश्न Lead Lender या सीओसी को एड्रेस किए जा सकते हैं. संयोग से, एसबीआई ने ग्रुप की कंपनियों में से एक को लोन दिया है, जिस कंपनी की शिवा इंडस्ट्रीज द्वारा गारंटी ली गई है. शिवा इंडस्ट्रीज की सीआईआरपी प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, इस कॉर्पोरेट गारंटी के आह्वान पर एसबीआई के दावे को स्वीकार किए गए दावों में शामिल किया गया, जो कुल दावों का 5.77% है. एसबीआई ने समझौता प्रस्ताव के खिलाफ वोटिंग की है और अपने हितों की रक्षा के लिए एनसीएलटी के सामने अपना प्रस्ताव दायर कर रखा है.

-सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, पीएनबी आईएआरसीएल और शिवा इंडस्ट्रीज एंड होल्डिंग्स ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

(नोट: हमारे सहयोगी चैनल ज़ी बिजनेस को जब भी इस मामले से जुड़ी कोई प्रतिक्रिया मिलेगी, उसे इस स्टोरी में शामिल किया जाएगा)

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