Mutual Funds निवेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इन स्कीम्स से नहीं निकाल सकेंगे पैसा

फ्रैंकलिन टेम्पल्टन म्यूचुअल फंड (Franklin Templeton Mutual Fund) के निवेशकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को फ्रैंकलिन टेम्पल्टन म्यूचुअल फंड के 6 स्कीम्स से पैसे निकालने पर फिलहाल रोक लगा दी है.

Mutual Funds निवेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इन स्कीम्स से नहीं निकाल सकेंगे पैसा

नई दिल्ली: फ्रैंकलिन टेम्पल्टन म्यूचुअल फंड (Franklin Templeton Mutual Fund) के निवेशकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को फ्रैंकलिन टेम्पल्टन म्यूचुअल फंड के 6 स्कीम्स से पैसे निकालने पर फिलहाल रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगले आदेश तक निवेशक यूनिट्स को बेच नहीं सकेंगे. 

Franklin Templeton MF पर सु्प्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की पीठ फ्रैंकलिन टेम्पलटन Mutual Funds की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी. याचिका पर मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि यह बड़ा मसला है और लोग अपना पैसा वापस चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव किए बिना ट्रस्टियों को एक हफ्ते के अंदर बंद 6 स्कीम्स के लिए यूनिटधारकों की बैठक बुलाने की इजाजत दी जाती है, ताकि इस फैसले पर उनकी सहमति ले सकें. मामले की सुनवाई अगले हफ्ते होगी.

फ्रैंकलिन टेम्पल्टन ने हाई कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती

अक्टूबर में कर्नाटक हाई कोर्ट ने फ्रैंकलिन टेम्पलटन को निवेशकों की बिना पूर्व सहमति के अपनी डेट फंड योजनाओं को बंद करने से रोक दिया था. हाई कोर्ट ने ये फैसला निवेशकों की याचिका पर दिया था. जिसमें फ्रैंकलिन द्वारा योजनाओं को बंद करने को लेकर चुनौती दी गई थी. 

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क्या है पूरा मामला 

फ्रैंकलिन टेम्पल्टन ने 23 अप्रैल को लिक्विडिटी की कमी का हवाला देते हुए 6 लोन म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद कर दिया था. निवेशकों ने जिन छह योजनाओं के खिलाफ याचिका दायर की हैं, वे योजनाएं फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन फंड, फ्रैंकलिन इंडिया अल्ट्रा शॉर्ट बॉन्ड फंड, फ्रैंकलिन इंडिया शॉर्ट टर्म इनकम प्लान, फ्रैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड, फ्रैंकलिन इंडिया डायनेमिक एकरुअल फंड और फ्रैंकलिन इंडिया इनकम ऑपर्च्यूनिटी फंड शामिल हैं. इन योजनाओं के तहत कुल 25,000 करोड़ रुपये की असेट्स का मैनेजमेंट किया जाता था.

SEBI ने किया किनारा

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के वकील प्रताप वेणुगोपाल ने कहा कि मार्केट रेगुलटर की इस प्रक्रिया को पूरा करने में कोई भूमिका नहीं है, लेकिन उसने इस बारे में भारतीय रिजर्व बैंक को लिखा था.

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