VIVO के साथ डील खत्म होने से कितना नुकसान होगा? गांगुली ने दिया ये जवाब

चीनी मोबाइल कंपनी VIVO के Indian Premier League के 2020 में आयोजित हो रहे 13वें संस्करण में टाइटल स्पॉन्सरशिप से हटने से बीसीसीआई को किसी तरह का वित्तीय संकट नहीं पड़ेगा.

VIVO के साथ डील खत्म होने से कितना नुकसान होगा? गांगुली ने दिया ये जवाब
फाइल फोटो

नई दिल्लीः चीनी मोबाइल कंपनी VIVO के Indian Premier League के 2020 में आयोजित हो रहे 13वें संस्करण में टाइटल स्पॉन्सरशिप से हटने से बीसीसीआई को किसी तरह का वित्तीय संकट नहीं पड़ेगा. बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा कि फिलहाल 2020 के सीजन में ही कंपनी और क्रिकेट बोर्ड में करार स्थगित किया गया है. 

आईपीएल के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा टाइटल स्पॉन्सर से आता है, जिसका हिस्सा आठ फ्रैंचाइजी की ओर से साझा किया जाता है. साल 2015 में वीवो ने पेप्सीको के बाद टाइटल स्पॉन्सरशिप हासिल की थी, जिसने अनुबंध समाप्त होने से दो साल पहले ही आईपीएल प्रायोजक के तौर पर हाथ खींच लिए थे. फिर 2017 में वीवो ने औपचारिक रूप से 2022 सीजन तक आईपीएल टाइटल स्पॉन्सरशिप हासिल की और करीब 241 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2199 करोड़ रुपये) का भुगतान किया.

गांगुली ने शनिवार को लर्नफ्लिक्स ऐप की ओर से आयोजित एक वेबिनार में कहा, 'मैं इसे वित्तीय संकट नहीं कहूंगा. यह एक छोटी सी बात है, जो अचानक हुई. केवल एक ही तरीका है कि आप इसका सामना कर सकते हैं कि पेशेवर रूप से मजबूत बने रहें. बड़ी चीजें रातभर में नहीं आती हैं और ना ही केवल रातभर चलती हैं. लंबे समय तक की गई आपकी तैयारी ही नुकसान से बचाती है, जिससे आप सफलताओं के लिए तैयार हो जाते हैं.'

BCCI के लिए होगी बड़ी उपलब्धि
वीवो की ओर से बोर्ड को एक साल के लिए करीब 440 करोड़ रुपये दिए जाते थे अगर बोर्ड विकल्प के तौर पर आई कंपनी से 180 करोड़ रुपये के करीब की रकम जुटा लेता है तो यह बोर्ड के लिए बड़ी उपलब्धि होगी.

यह भी पढ़ेंः PM मोदी ने दी सौगात: एग्री इंफ्रा फंड लॉन्च, 8.5 करोड़ किसानों की छठी किस्त भी जारी की

इस वजह से स्थगित हुई थी साझेदारी
गुरुवार को बीसीसीआई और वीवो ने आईपीएल 2020 के लिए अपनी साझेदारी को स्थगित करने की घोषणा की थी. जून में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में हुई हिंसक लड़ाई में कर्नल समेत 20 भारतीय सेना के जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने का भारी विरोध हुआ है. वीवी चीनी मोबाइल निर्माता कंपनी है, जिसका भारत में बड़ा व्यापार है.

(इनपुट: भाषा से भी)

ये भी देखें---