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नई क्रेडिट पॉलिसी: रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती, कम हो सकती है आपकी EMI

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की। रेपो में इस साल यह तीसरी कटौती है जो कि बाजार एवं सरकार की उम्मीदों के अनुरूप है। उम्मीद की जा रही थी कि केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि को बढावा देने के लिए कर्ज की लागत कम करेगा।

नई क्रेडिट पॉलिसी: रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती, कम हो सकती है आपकी EMI

मुंबई: रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की। रेपो में इस साल यह तीसरी कटौती है जो कि बाजार एवं सरकार की उम्मीदों के अनुरूप है। उम्मीद की जा रही थी कि केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि को बढावा देने के लिए कर्ज की लागत कम करेगा।

आरबीआई ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर रेपो को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 7.25 प्रतिशत कर दिया है पर बैंकों पर लागू आरक्षित नकदी अनुपात (सीआरआर) को चार प्रतिशत तथा सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) को 21.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है।

चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्वैमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए राजन ने कहा ‘घरेलू उत्पादन क्षमता के उपयोग का स्तर कम रहने, हालत में सुधार के मिश्रित संकेतों और निवेश तथा रिण वृद्धि में नरमी के मद्देनजर आज नीतिगत ब्याज दर में कटौती का तर्क बनता है।’

रिजर्व बैंक ने इससे पहले रेपो दर में जनवरी और मार्च में 0.25 - 0.25 प्रतिशत कटौती की थी। शेयर बाजार ने हालांकि, इस पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद बंबई शेयर बाजार सूचकांक 400 से अधिक अंक गिरा।

राजन ने कहा उन्हें उम्मीद है कि बैंक व्यक्तिगत एवं कापरेरेट रिण लेने वालों को नीतिगत दर में कटौती का फायदा देंगे। उन्होंने कहा ‘बैंकों को सिलसिलेवार ब्याज दर कटौती का फायदा देना चाहिए।’ रिजर्व बैंक ने जनवरी से अब तक तीन बार मुख्य दर में कटौती की है।

रेपो दर (अल्पकालिक ऋण दर) में कटौती के बाद रिवर्स रेपो दर (अल्पकालिक उधार दर) को समायोजित कर 6.25 प्रतिशत कर दिया गया और आंशिक स्थायी सुविधा (मार्जिनल स्टैडिंग फेसिलिटी) दर और बैंक दर 8.25 प्रतिशत पर आ गई है। वृहद आर्थिक हालात के बारे में रिजर्व बैंक ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां नरम रही और कृषि क्षेत्र सबसे अधिक निराशाजनक रहा। मार्च में देश के ज्यादातर हिस्सों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से ऐसा हुआ। हालांकि, राजन ने कहा कि अप्रैल में मुदास्फीति के लिए जिन जोखिमों की पहचान की गई थी, लेकिन लगातार दूसरे वर्ष मानसून सामान्य से कम रहने की आंशका को देखते हुये संकट के बादल गहरा सकते हैं।

आरबीआई ने कहा है कि जोखिमों के लेखा जोखा और वर्ष 2014-15 के जीवीए (सकल मूल्य वर्धित) के अनुमानों को घटाए जाने की स्थितियों को परिलक्षित करने के लिए चालू वित्त वर्ष की वृद्धि के अनुमान को 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया गया है। राजन ने निकट भविष्य में मुद्रास्फीति और मुद्रास्फीतिक अनुमानों को नियंत्रित रखने के लिए खाद्य नीति का बंदोबस्त मजबूत करने पर बल दिया है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा नीतिग ब्याज दर में कटौती से सरकार के लिए पूरी नीतिगत दृढ़ता दिखाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा। सरकार की नीतिगत पहल कई क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने पर टिकी है और इससे निजी निवेश भी आकर्षित होगा। इससे मध्यम अवधि में अपूर्ति की दिक्कतें दूर होंगी तथा मुद्रास्फीति में कमी लागने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा ‘बैंकों ने नीतिगत दर में की गई पिछली कुछ कटौतियों का फायदा अब अपनी ब्याज दरों में कटौती के तौर पर लोगों तक पहुंचाना शुरू कर दिया (सात अप्रैल को मौद्रिक नीति बैठक में उन्होंने इसे एक शर्त के तौर पर रखा था), मुख्य मुद्रास्फीति अनुमान के अनुरूप चल रही है (अप्रैल में 4.86 प्रतिशत), बेमौसम बारिश का असर अब तक नरम ही रहा है, सरकार द्वारा नियंत्रित मूल्यों में वृद्धि भी हल्की ही रही है और फिलहाल लगता है कि अमेरिका में मौद्रिक नीति को सामन्य बनाने का कदम आगे के लिए टाल दिया गया है।’ वैश्विक आंकड़े भी बहुत अच्छी तस्वीर पेश नहीं कर रहे। वैश्विक अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार अभी भी धीमा है और दुनिया के अलग अलग क्षेत्रों में स्थिति अलग अलग है। अमेरिकी आंकड़े ज्यादा चिंताजनक हैं क्योंकि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था आश्चर्यजनक तौर पर पहली तिमाही में 0.7 प्रतिशत संकुचित हुई जबकि उसकी मुद्रा की विनिमय दर रिकार्ड उच्च स्तर पर है।

राजन ने बेहतर खाद्य नीति का बंदोबस्त मजबूत करने पर बल दिया है ताकि बारिश कम होने पर मुद्रास्फीतिक के किसी दबाव से निपटा जा सके। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यदि बड़े उतार-चढ़ाव के बीच कच्चे तेल में लगातार तेजी और भू-राजनैतिक संकटों से मुद्रास्फीति के अनुमानों के गड़बड़ाने का जोखिम भी है।

राजन ने कहा कि उपरोक्त इस पृष्ठभूमि में ‘सावधानी बरतने और प्रतीक्षा करने की रणनीति ही ठीक होगी क्यों कि इससे विशेष तौर पर मानसून की स्थिति और उसके कमजोर रहने की स्थिति में सरकार के कदमों के बारे में स्थितियां और स्पष्ट हो जाएंगी।’ गवर्नर ने ब्याज दर में आज की कटौती का औचित्य बताते हुए कहा , ‘ निवेश में अब भी हल्का है (2018 के प्रारंभ तक मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत तक सीमित रखने) की विस्फीतिकारी राह पर बने रहने के लिए आज शुरू में ही नीतिग दर में कटौती करने के बाद अनश्चितता दूर करने के लिए आंकड़ों का इंतजार करना अधिक उचित दृष्टिकोण होगा।’ मुख्य दर में कटौती की एक मुख्य वजह यह है कि केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर का अनुमान 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है।