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आज से होंगे ये 5 बड़े बदलाव, बैंक टाइमिंग से लेकर बदल जाएगा ये सब...

1 नवंबर दिन शुक्रवार, आपके लिए कई नियमों में बदलाव होने जा रहा है. आपकी जेब से जुड़े कई नियम बदल जाएंगे. बैंकों की टाइमिंग से लेकर टोल किराए तक में बदलाव देखने को मिलेगा.

आज से होंगे ये 5 बड़े बदलाव, बैंक टाइमिंग से लेकर बदल जाएगा ये सब...

नई दिल्ली : 1 नवंबर यानी शुक्रवार, आज से आपके लिए कई नियमों में बदलाव हो जाएगा. आपकी जेब से जुड़े कई नियम बदल जाएंगे. बैंकों की टाइमिंग से लेकर टोल किराए तक में बदलाव देखने को मिलेगा. वहीं, देश के सबसे बड़े बैंक के लोन ग्राहकों के लिए अच्छी खबर भी मिलने वाली है. आइए आपको बताते हैं कि आज से आपके लिए कौन से 5 बड़े बदलाव होने जा रहे हैं.

1. बदलेगा बैंकों का टाइम
महाराष्ट्र में बैंकों का नया टाइम टेबल लागू होगा. अब यहां सभी बैंक एक ही टाइम पर खुलेंगे और बंद होंगे. नए टाइम टेबल के मुताबिक, बैंक सुबह 9 बजे खुलेंगे और शाम 4 बजे तक कामकाज होगा. हालांकि, कुछ बैंक सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक खुलेंगे. फिलहाल, बैंकों का समय सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक का होता है, लेकिन पैसों का लेनदेन दोपहर 03:30 बजे तक ही होता है. महाराष्ट्र में बैंकों का नया टाइमटेबल बैंकर्स कमेटी ने तय किया है. वित्त मंत्रालय ने बैंकों के कामकाज का समय एक जैसा करने का निर्देश दिया था.

2. महंगा होगा एक्सप्रेस वे से सफर
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर एक नवंबर से सफर महंगा हो जाएगा. NHAI ने उद्घाटन के एक महीने के अंदर ही टोल दर दोगुनी करने का निर्णय लिया है. सड़क एवं परिवहन मंत्रालय से इसकी मंजूरी मिल गई है. पिलखुवा टोल प्लाजा पर बढ़ी दर वसूली जाएगी. टोल दरों के अलावा मासिक पास भी महंगे कर दिए गए हैं. यह भी करीब दोगुना महंगा होगा. कार, जीप, वैन और हल्के वाहनों से अभी तक एक तरफ का 70 रुपए और दोनों तरफ का 105 रुपए वसूला जाता था. लेकिन, अब एक तरफ का 125 रुपए और दोनों तरफ का टोल 200 रुपए होगा.

5. नहीं वसूला जाएगा MDR
पिछले दिनों केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने निर्देश जारी किया कि एक नवंबर से कारोबारी डिजिटल पेमेंट्स लेने से इनकार नहीं कर सकते हैं. नए नियम के मुताबिक, एक नवंबर से कारोबारियों और ग्राहकों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं वसूला जाएगा. अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि 50 करोड़ रुपए से ज्यादा सालाना टर्नओवर वाले कारोबारी संस्थानों को अपने ग्राहकों को कम लागत वाले भुगतान के डिजिटल मोड की पेशकश करनी चाहिए और ट्रांजैक्शंस पर आने वाली लागत को आरबीआई और बैंकों को वहन करना चाहिए.