ओला-उबर में ट्रैवल करना होगा सस्ता, नए नियम बनाने की तैयारी में सरकार

सरकार कैब एग्रीगेटर्स के लिए जल्द ही नए नियम बनाने जा रही है जिसके बाद पैसेंजर्स के लिए कैब में सफर करना 10% तक सस्ता हो जाएगा.  

ओला-उबर में ट्रैवल करना होगा सस्ता, नए नियम बनाने की तैयारी में सरकार
फाइल फोटो

नई दिल्ली: अगर आप ओला या उबर (Ola-Uber) कैब में यात्रा करते हैं तो आपके लिए एक काम की खबर आई है. दरअसल, आने वाले दिनों में ओला या उबर कैब में सफर करना सस्ता हो सकता है. सरकार कैब एग्रीगेटर्स के लिए जल्द ही नए नियम बनाने जा रही है जिसके बाद पैसेंजर्स के लिए कैब में सफर करना 10% तक सस्ता हो जाएगा.  

सूत्रों के मुताबिक परिवहन मंत्रालय ऐसे नियम बनाने जा रही है जिसके तहत कैब एग्रीगेटर्स किसी भी पैसेंजर से कमाए गए कुल किराए पर अधिकतम 10% कमीशन ही ले सकेंगे. आपको बता दें कि फिलहाल यह कमीशन 20% है. अगर यह नियम लागू हो जाता है तो कैब एग्रीगेटर्स का पैसेंजर किराए पर कमाए गए कमीशन शुल्क में कटौती हो जाएगी. ऐसे में जाहिर है कि ओला-उबर में सफर अभी के मुकाबले सस्ता हो जाएगा. 

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यही नहीं कैब एग्रीगेटर्स द्वारा सर्ज प्राइसिंग की आड़ में दोगुना, तीनगुना से भी ज्यादा किराया वसूलने पर लगाम लगेगा. सूत्रों के मुताबिक कैब एग्रीगेटर्स को रेगुलेट करने के लिए प्रस्ताव में सर्ज प्राइसिंग पर भी कैपिंग या अधिकतम सीमा निर्धारित करने की योजना है. 

सूत्रों की मानें तो सरकार ओला-उबर जैसे सभी कैब एग्रीगेटर्स पर सर्ज प्राइसिंग पर भी नकेल कसने जा रही है. प्रस्ताव है की सर्ज प्राइस बेस फेयर का अधिकतम दोगुना हो सकता है. हालांकि बेस फेयर या आधार किराया राज्य सरकार तय कर सकती या फिर कैब एग्रीगेटर्स तय कर सकते हैं जिसे हर 3 महीने में संशोधित किया जा सकता है.

इसके अलावा ओला-उबर ड्राइवर के कैब कैंसिल या फिर ना आने जैसी ढेरों शिकायतों से निबटने के लिए सख्त प्रावधान का प्रस्ताव है. प्रस्ताव के तहत अगर कैब ड्राइवर राइड कैंसिल करता है तो उसपर किराए का 10-50% तक की पेनाल्टी लगेगी जो कि अधिकतम 100 रुपये तक होगी. यही नियम पैसेंजर पर भी लागू होगा. अगर वो राइड बुक करने के बाद गलत वजहों से कैंसिल करता है तो उसपर भी किराए का 10-50% तक की पेनल्टी भरने का प्रस्ताव है.

यही नहीं कैब एग्रीगेटर्स रूल्स ड्राफ्ट के मुताबिक पैसेंजर के 5 लाख रुपए के इंश्योरेंस कवर तक शामिल करने का प्रस्ताव है. कैब ड्राइवर का सही और नियमित अंतराल पर बॉयोमेट्रिक या फेशियल वेरिफिकेशन भी प्रावधानों में शामिल है.

आपको बता दें कि ये पहला मौका होगा जब सरकार कैब एग्रीगेटर्स के कमीशन वसूलने या सर्ज प्राइसिंग जैसे अहम विषयों को रेगुलेट करने जा रही है. सरकार एग्रीगेटर्स रूल्स या नियमों को लेकर तैयार ड्राफ्ट को संभवत: अगले हफ्ते पब्लिक कंसल्टेशन के लिए जारी कर सकती है. दरअसल सरकार कैब एग्रीगेटर्स को तो देश में बढ़ावा देना चाहती है लेकिन अभी तक कोई ठोस नियम नहीं होने के चलते अक्सर ओला-उबेर से जुड़ी कई शिकायतें या विवाद सामने आते रहे हैं. जिसके चलते सरकार की किरकिरी होती रही है ऐसे में सरकार नियमों के जरिये कैब एग्रीगेटर्स को भी जवाबदेह बनाना चाहती है.