थोक मंडी में सस्ती सब्जी कॉलोनी में क्यों हो जाती है महंगी, ये है वजह

जिस टमाटर की कीमत महीने भर पहले 20 रुपये प्रति किलो थी, वो अब 60 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा है. ये ही हाल इस वक्त आलू और प्याज का है. आलू की कीमत 50 रुपये प्रति किलो और प्याज भी इसी भाव में मिल रहा है.

थोक मंडी में सस्ती सब्जी कॉलोनी में क्यों हो जाती है महंगी, ये है वजह
फाइल फोटो

नई दिल्लीः देश में इस वक्त सब्जियों की कीमतों ने रसोई का बजट पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. आलू-टमाटर से लेकर प्याज और अन्य हरी सब्जियों की कीमतें इस वक्त आसमान छू रही हैं. हालांकि थोक मंडियों में सब्जियों का भाव काफी कम है, लेकिन कॉलोनी में पहुंचने के बाद कीमतों में दोगुने से ज्यादा का अंतर हो जाता है. कॉलोनी के हिसाब से सब्जियों के रेट तय होते हैं. पॉश कॉलोनी में सब्जियां काफी महंगी हैं, वहीं छोटी कॉलोनियों में सब्जियां थोड़ी कम महंगी हैं.

60 से 80 रुपये किलो बिक रहा है टमाटर
जिस टमाटर की कीमत महीने भर पहले 20 रुपये प्रति किलो थी, वो अब 60 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा है. ये ही हाल इस वक्त आलू और प्याज का है. आलू की कीमत 50 रुपये प्रति किलो और प्याज भी इसी भाव में मिल रहा है. दिल्ली में लगातार सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी हो रही है. गाजीपुर सब्जी मंडी में एक सब्जी विक्रेता ने बताया, "बारिश में सब्जियां खराब हो गई है इसलिए सब्जी महंगी हो गई है. इस समय टमाटर 60 रुपये किलो बिक रहा है और 1300-1400 रुपये कैरेट बिक रहा है.

एशिया की सबसे बड़ी थोक फल और सब्जी मंडी आजादपुर (Azadpur-APMC)) में टमाटर का दाम 40 से 60 रुपये किलो चल रहा है. आजादपुर मंडी के पीपीए टोमैटो एसोसिशन के अशोक कौशिक ने कहा कि कम सप्लाई की खबरों से टमाटर के दाम चढ़ रहे हैं. कौशिक ने बताया कि बारिश के चलते फसल को हुए नुकसान की वजह से नई फसल की आवक पर असर पड़ा है.

उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, पंजाब, तमिलनाडु, केरल, जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश में इस बार टमाटर की पैदावार पर असर पड़ा है. आंकड़ों के मुताबिक, देश में टमाटर का सालाना उत्पादन 1.97 करोड़ टन और खपत 1.51 करोड़ टन की है. दिल्ली में क्वालिटी और इलाकों के हिसाब से टमाटर 60 से 80 रुपये किलो बिक रहा है. शनिवार को पूर्वी दिल्ली की शाहदरा मंडी के आसपास टमाटर 60 रुपये और कृष्णा नगर में 80 रुपये किलो बिक रहा था.   

हरी सब्जियों पर भी महंगाई की मार
आलू, प्याज और टमाटर के साथ अन्य सब्जियां भी महंगी हो गई हैं. बाजार में इस समय लौकी को छोड़कर कोई भी सब्जी 60 रुपये किलो से नीचे नहीं बिक रही है. लौकी के दाम 40 रुपये किलो हैं. शिमला मिर्च और टिण्डा 100 रुपये किलो पर पहुंच गए हैं. मटर 200 से 250 रुपये किलो और फूलगोभी 150 रुपये किलो के आसपास बिक रही है. धनिया पत्ता लगभग बाजार से गायब है. इस वक्त इसकी कीमत 400 रुपये प्रति किलो है आपकों बता दें कि अगले महीने से पूरे देशभर भर में प्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और ऐसे ही सब्जियों के रेट हाई होते रहे तो लोगों का सब्जियां खाना दुभर हो जाएगा.

बारिश ने फसल की बर्बाद
आजादपुर मंडी के थोक व्यापारी संदीप खंडेलवाल ने बताया कि बारिश के कारण अधिकतर किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं. ऐसे में बची हुई फसल का दाम स्वयं ही बढ़ गया है. रही सही कसर कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉकडाउन ने पूरी कर दी.

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पॉश कॉलोनियों में होता है ज्यादा फर्क
आजादपुर मंडी के थोक व्यापारी जसराज ने बताया कि बड़ी मंडियों से सब्जियां निकलने के बाद छोटी मंडी में पहुंचती हैं. कई बार सब्जियों के दाम में अन्य कॉलोनियों के मुकाबले पॉश कॉलोनी में 50 रुपये तक का अंतर देखने को मिलता है. यही वजह है कि जो आलू बाकी कॉलोनियों में 30 से 35 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा होता है वही, पॉश कॉलोनियों में 45 से 55 रुपये किलो तक में आसानी से बिक जाता है. इसी तरह अन्य सब्जियों का भी ये ही हाल है.

अन्य सब्जियों की कीमत में भी तेजी
40 रुपये किलो बिकने वाला परवल 60 रुपये किलो बिक रहा है. करेला 80 रुपये किलो, कद्दू 35 रुपये, पत्ता गोभी 60 रुपये किलो में बिक रहा है. इसी तरह प्याज 40 रुपये किलो, बैगन 70 रुपये, मूली 40 रुपये, भिंडी 50 रुपये, आलू 40 रुपये, फूल गोबी 100 रुपये किलो बिक रहा है. दुकानदारों ने बताया गांव, देहात में सब्जियों के आवाक कम रहने के चलते भाव बढ़ा है.

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