खुदरा महंगाई घटकर 2.18 फीसदी, सब्ज़ियों और दालों की क़ीमत में तेज़ गिरावट

उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचंकाक में (सीएफपीआई) मई में अपस्फीति देखी गई और यह नकारात्मक 1.05 फीसदी रही, जबकि साल 2016 की समान अवधि में यह 7.45 फीसदी पर थी.

खुदरा महंगाई घटकर 2.18 फीसदी, सब्ज़ियों और दालों की क़ीमत में तेज़ गिरावट
मई में सब्जियों की कीमतों में 2016 की तुलना में 13.44% की गिरावट आई. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: सब्जियों व दालों की कीमतों में भारी गिरावट के चलते खुदरा मुद्रास्फीति मई में महीने में रिकॉर्ड 2.18 प्रतिशत के निम्न स्तर पर आ गयी. इससे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में कटौती का सरकार का मामला और मजबूत हुआ है. जनवरी 2012 के बाद पहली बार खाद्य कीमतो में अपस्फीति (-1.05%) देखने को मिली. इस साल अच्छे मॉनसून के अनुमान से आने वाले दिनों में भी खाद्य मुद्रास्फीति नीची बनी रहने का अनुमान है.

मुद्रास्फीति के अलावा औद्योगिक उत्पादन भी अप्रैल महीने में घटकर 3.1 फीसद रह गया जो पिछले साल समान महीने में 6.5 फीसद रही थी. औद्योगिक उत्पादन पर संभवत: सरकार की नोटबंदी के कदम का असर दिखा. आलोच्य महीने में औद्योगिक उत्पादन के लिहाज से सबसे खराब प्रदर्शन विनिर्माण, पूंजीगत सामान व टिकाउ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का रहा.

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक र्सीपीआईी आधारित मुद्रास्फीति से वित्त मंत्रालय का यह रख मजबूत हुआ है कि कीमतों में बढोतरी को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्वानुमान में बड़ी त्रुटि थी और कि नीतिगत ब्याज दर में कटौती का मजबूत मामला बनता है ताकि निजी निवेश बढ़े और आथर्कि वृद्धि को बल मिले. खुदरा मुद्रास्फीति सरकार द्वारा 2012 में सीपीआई डेटा का प्रकाशन शुरू किए जाने के बाद सबसे निचले स्तर पर है. अप्रैल 2017 में यह 2.99 प्रतिशत और मई 2016 में यह 5.76 प्रतिशत थी.

आलोच्य महीने में कपड़ा, आवास, ईंधन और बिजली की दरें सस्ती हुईं. वहीं सब्जी के दाम 13.44 फीसद घटे तो दालों व उत्पादों के दाम में 19.45 फीसद की गिरावट दर्ज की गई. उल्लेखनीय है कि बीते सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक ने यह कहते हुए नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव से इनकार कर दिया था कि वह मुद्रास्फीति को लेकर और अधिक आश्वस्त होना चाहता है. लगातार ब्याज दर में कटौती का माहौल बना रहे वित्त मंत्रालय ने इस पर नाराजगी जताई थी.

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के प्रधान अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि हालांकि मुद्रास्फीति की दर नीची बनी रहेगी लेकिन केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में किसी बड़ी कटौती की संभावना बहुत ही कम है. वहीं विनिर्माण, खनन व बिजली क्षेत्रों के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन तथा पूंजीगत व टिकाऊ उपभोक्ता सामान का उठाव घटने के बीच अप्रैल महीने में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 3.1 फीसद रह गई.

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल अप्रैल महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक र्अाईआईपी 6.5 फीसद रहा था. संगठन ने मार्च महीने की औद्योगिक वृद्धि दर को संशोधित आंकड़े में बढ़ाकर 3.75 प्रतिशत किया है. पिछले महीने जारी मार्च के प्रारंभिक आंकड़ों में इसे 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था.

उधर बिकवाली दबाव के चलते बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स सोमवार (12 जून) को 166 अंक टूटकर दो सप्ताह के निचले स्तर 31,096 अंक पर बंद हुआ. कारोबारियों का कहना है कि औद्योगिक उत्पादन व मुद्रास्फीति के आंकड़ो से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया. उद्योग मंडल एसोचैम ने आईआईपी में गिरावट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में कटौती की जानी चाहिए. वहीं फिक्की ने कहा है कि उसे आगामी विदेश व्यापार नीति समीक्षा में विनिर्माण निर्यात को बढावा दिए जाने की उम्मीद है.

Zee News App: पाएँ हिंदी में ताज़ा समाचार, देश-दुनिया की खबरें, फिल्म, बिज़नेस अपडेट्स, खेल की दुनिया की हलचल, देखें लाइव न्यूज़ और धर्म-कर्म से जुड़ी खबरें, आदि.अभी डाउनलोड करें ज़ी न्यूज़ ऐप.