सिर्फ 4 महीने में हर बार 100 रुपए कमाने के लिए Railway को खर्च करने पड़े इतने रुपए

देश के सबसे बड़े ट्रांसपोर्टर के रूप में रेलवे ने बीते अप्रैल से जुलाई महीने के बीच 111.51 प्रतिशत का रिकॉर्ड हाई ऑपरेटिंग रेशियो हासिल किया है.

सिर्फ 4 महीने में हर बार 100 रुपए कमाने के लिए Railway को खर्च करने पड़े इतने रुपए
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: रेलवे अगर दुनिया का सबसे बड़ा नियोक्ता कहलाता है तो उसके सामने चुनौतियां भी बड़ी हैं. इस साल बीते अप्रैल से जुलाई महीने के बीच देश के सबसे बड़े ट्रांसपोर्टर के रूप में रेलवे ने 111.51 प्रतिशत का रिकॉर्ड हाई ऑपरेटिंग रेशियो हासिल किया है. यानी रेलवे ने 100 रुपये कमाने के लिए 111.51 रुपये खर्च कर दिए. यह दिखाता है कि ट्रांसपोर्ट में रेलवे अपने लक्ष्य से पिछड़ गया है.

रेलवे पर पहले से ही अपने सेवानिवृत कर्मचारियों को पेंशन देने और कामकाज के खर्च का बहुत बोझ है. ऑपरेटिंग रेशियो एक तरह का पैमाना होता है जो राजस्व की तुलना में खर्च को अनुपात के रूप में मापता है. यह किसी संगठन के परिचालन के प्रदर्शन को समझने में मददगार होता है. इस रेशियो के अधिक होने का मतलब है कि रेलवे के पास बचत करने की या राजस्व पैदा करने की क्षमता कम है जिसका इस्तेमाल पूंजी निवेश के रूप में नई लाइनें बिछाने या अधिक कोच लगाने में किया जा सकता है. 

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लक्ष्य से चूक गया रेलवे

रेलवे के वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, यातायात के अन्य साधनों की तुलना में कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने से रेलवे अप्रैल-जुलाई के बीच यात्री से होने वाली कमाई के लक्ष्य 17,736.09 रुपए की तुलना में 17,273.37 रुपए ही हासिल कर सका. वहीं सामान ढुलाई से रेलवे की कमाई बजट में लगाए अनुमान से भी कम रही. इन चार महीनों में रेलवे को माल ढुलाई से कुल 36,480 करोड़ रुपए हासिल हुए, जबकि लक्ष्य 39,253.41 रुपए था.

चालू वित्त वर्ष के पहले चार माह में रेलवे की कुल आमदनी 56,717.84 करोड़ रुपए रही, जबकि लक्ष्य 61,902.51 करोड़ रुपए था. रेलवे के काम करने का खर्च बजट के पूर्वानुमान से पार कर गया. इस दौरान रेलवे का खर्च 52,517.71 करोड़ रुपये रहा, जो सामान्य तौर पर 50,487.36 करोड़ रुपये होना चाहिए. 

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इकोनॉमिक टाइम की खबर के मुताबिक, रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कामकाजी खर्च के अलावे भी रेलवे के कई खर्च हैं, जिस वजह से ऑपरेटिंग रेशियो लक्ष्य से ज्यादा हो गए. उन्होंने कहा कि सातवें वेतन की सिफारिश के लागू होने के बाद पेंशन मद में कुल खर्च का अनुमान करीब 47,000 करोड़ रुपये है. 

पांच-छह सालों में 90 प्रतिशत से अधिक रहा ऑपरेटिंग रेशियो

रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो पिछले पांच-छह सालों में 90 प्रतिशत से अधिक ही रहा है. अधिकारी ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2017-18 के 96 प्रतिशत ऑपरेटिंग रेशियो के मुकाबले चालू वित्तीय वर्ष (2018-19) में ऑपरेटिंग रेशियो 92.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है. हालांकि उनका कहना है कि इस साल (2018-19) माल ढुलाई की मात्रा में 51 मिलियन टन का इजाफा होने की उम्मीद है.