US-Iran War Update: पहले प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोका, फिर 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को बंद कर अमेरिका ने चुपचाप ईरान के साथ जंग को खत्म कर दिया है. कल तक जो ट्रंप ईरान का नामोनिशान मिटाने की धमकी दे रहे थे, अचानक उन्होंने ये फैसला क्यों लिया है और इस फैसले में भारत का फायदा कैसे छिपा है?
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US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अब खत्म होता दिख रहा है. अमेरिका की ओर से होर्मुज पर चल रहे पहले प्रोजेक्ट फ्रीडम को खत्म किया गया, फिर कुछ घंटों बाद ऐलान किया गया कि वो ईरान के साथ जंग को खत्म कर रहे हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई खत्म हो रही है. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' , जिसे उन्होंने इजरायल के साथ मिलकर 28 फरवरी को शुरू किया था, उसने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है. इसलिए उसे खत्म किया जा रहा है. ट्रंप कल तक ईरान का नामोनिशान मिटाने की धमकी दे रहे थे, अचानक उन्होंने यूटर्न ले लिया.
अमेरिकी विदेश मंत्री ने ऑपरेशन खत्म होने की बात कही है, लेकिन दोनों के बीच टकराव पूरी तरह खत्म नहीं हुई है . अमेरिकी राष्ट्रपति युद्ध के बजाए अब इस विवाद को शांति से निपटाना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए ईरान को परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी ट्रंप की शर्तों को मानना होगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना होगा.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक अमेरिका ने जिस मकसद के साथ इस ऑपरेशन को शुरू किया था, वो हासिल हो चुका है, इसलिए अब अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर इसे बंद किया जा रहा है. ये तो वो वजह हैं, जिसे अमेरिका ने दुनिया को बताया है. युद्ध पर बैकफुट पर आने की असली वजह ट्रंप की बेबसी है.
अमेरिका की युद्ध अधिनियम की वजह से ट्रंप बैकफुट पर आ गए. नियम के मुताबिक युद्ध शुरू होने के 60 दिन बाद ट्रंप प्रशासन को कांग्रेस के सामने जंग के शुरुआत की वजह बतानी होगी. ईरान पर हमले के बाद से ही ट्रंप को कांग्रेस के सदस्यों की ओर से घेरा जा रहा था. सीजफायर का हवाला देकर ट्रंप अब तक बच रहे थे, लेकिन मिड-टर्म चुनावों से पहले ट्रंप यह रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. ट्रंप पर युद्ध को खत्म करने का दबाव लगातार बढ़ रहा था. चुनावों में युद्ध का मुद्दा ट्रंप की मुश्किल बढ़ा सकता है. ऐसे में अब वो जल्दी से जल्दी ईरान के साथ समझौता करना चाहते हैं.
अमेरिका होर्मुज में फंसे जहाजों को निकालने के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट फ्रीडम को तीन दिन के भीतर ही खत्म कर चुका है. अब उसने युद्ध में भी कदम पीछे खींच लिए हैं. होर्मुज पर अब भी ईरान की नाकाबंदी जारी है. ईरान ने इसे दुश्मन देशों के टैंकरों के लिए पूरी तरह से बंद कर रखा है. वहीं, बाकी जहाजों को यहां से गुजरने के लिए पहले परमिशन लेनी होगी. ईरान ने 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' से उन्हें ट्रांजिट परमिट लेना होगा.
अमेरिका ने इधर प्रोजेक्ट फ्रीडम, ऑपरेशन एपिक बंद किया और इधर भारत को तेल पर खुशखबरी मिल गई. इराक ने प्रति बैरल तेल पर 30 डॉलर का भारी छूट दे रहा है. वहीं सऊदी अरब ने जून महीने के लिए एशिया में बिकने वाले अपने कच्चे तेल के दाम के दाम में भारी कटौती कर उसे 19.50 डॉलर से 15.50 डॉलर प्रति बैरल तय कर दिया है. इसके अलावा OPEC+ के देशों ने जून में तेल उत्पादन 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और छूट का फायदा भारत को होगा. भारत अपनी जरूरत का 85-90% तेल आयात करता है. आयात बिल कम होने से महंगाई को नियंत्रित कम करने में मदद मिलेगी.