close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

WTO में गतिरोध दूर हुआ, भारत की खाद्य सुरक्षा पर मांग मानी

महीनों तक चले गतिरोध को समाप्त करते हुए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने खाद्यान्न के सार्वजनिक भंडारण को लेकर अड़चनों को दूर करने की भारत की मांग स्वीकार करते हुए सीमा शुल्क नियमों को सुगम करने के वैश्विक करार के कार्यान्वयन को गुरुवार को मंजूरी दे दी।

WTO में गतिरोध दूर हुआ, भारत की खाद्य सुरक्षा पर मांग मानी

नई दिल्ली : महीनों तक चले गतिरोध को समाप्त करते हुए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने खाद्यान्न के सार्वजनिक भंडारण को लेकर अड़चनों को दूर करने की भारत की मांग स्वीकार करते हुए सीमा शुल्क नियमों को सुगम करने के वैश्विक करार के कार्यान्वयन को गुरुवार को मंजूरी दे दी।

अब इस ऐतिहासिक करार को भारत सहित सदस्य देशों की सरकारों को अनुमोदित करना होगा, जिसके बाद यह अगले साल किसी समय लागू हो सकेगा। बरसों तक चले गतिरोध के बाद यह पहला प्रमुख करार है जिस पर डब्ल्यूटीओ सदस्यों में सहमति बनी है। डब्ल्यूटीओ 1985 में अस्तित्व में आया था। डब्ल्यूटीओ के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय महापरिषद की आज जिनेवा में हुई बैठक में भारत की शांति के उपबंध को जारी रखने की मांग को स्वीकार कर लिया गया। खाद्यान्न भंडारण के मुद्दे का स्थायी समाधान निकलने तक शांति उपबंध जारी रहेगा।

बाली करार के तहत शांति उपबंध सिर्फ 2017 तक जारी रहना था। भारत के एक लाख करोड़ रपये सालाना के खाद्यान्न सुरक्षा कार्यक्रम के लिए यह विस्तार काफी महत्वपूर्ण है। इसके लिए सालाना 6.2 करोड़ टन खाद्यान्न की जरूरत है। इसके जरिये भारत अपने खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के तहत खाद्यान्न की खरीद व भंडारण कर सकेगा। भारत यदि 10 फीसद की सब्सिडी सीमा को पार कर जाता है, तो भी डब्ल्यूटीओ सदस्य उसके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर सकेंगे। बैठक में स्थायी समाधान के लिए कृषि पर विशेष सत्र की सहमति भी बनी, जिससे दिसंबर, 2015 तक इस मुद्दे का हल निकल सके।

एक सूत्र ने कहा कि दो-तिहाई सदस्यों द्वारा व्यापार सुगमता करार (टीएफए) के अनुमोदन के बाद यह उन देशों में अस्तित्व में आ जाएगा। खाद्य सुरक्षा मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए भारत ने खाद्य सब्सिडी की दस प्रतिशत की सीमा की गणना के फार्मूला में संशोधन या फिर इस तरह की योजनाओं को सब्सिडी की सीमा के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव किया है। इससे पहले भारत ने जुलाई में जिनेवा में टीएफए के अनुमोदन से इनकार कर दिया था। उसने मांग की थी कि डब्ल्यूटीओ के सदस्य सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण के मुद्दे का स्थायी समाधान ढूंढे। शांति उपबंध के तहत खाद्य सब्सिडी की सीमा का उल्लंघन करने पर डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश को जुर्माने से छूट मिलती है। कोई विकासशील देश अपने कुल कृषि उत्पादन के 10 प्रतिशत तक खाद्य सब्सिडी प्रदान कर सकता है।

भारत व अमेरिका ने 13 नवंबर को डब्ल्यूटीओ में सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण के मुद्दे पर मतभेदों को दूर कर लिया था। इससे टीएफए के कार्यान्वयन का रास्ता साफ हो गया था। इस घटनाक्रम पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कल संसद में बयान दिए जाने की उम्मीद है।