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कम कीमत में घर खरीदना है तो आज की ये बड़ी खबर कर सकती है आपके सपनों को पूरा

GST काउंसिल की 10 जनवरी को होने वाली अहम बैठक में होम बायर्स और रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. 

कम कीमत में घर खरीदना है तो आज की ये बड़ी खबर कर सकती है आपके सपनों को पूरा
फाइल फोटो.

नई दिल्लीः घर खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए आज एक बड़ी खबर आ सकती है. ये खबर आएगी GST काउंसिल की बैठक से, जहां आज कई जरूरी चीजों पर टैक्स में राहत मिल सकती है. साल 2019 में ये GST काउंसिल की पहली बैठक है. सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर GST स्लैब 12 फीसदी से घटाकर 5 प्रतिशत किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो घर खरीदने वालों को बड़ी राहत मिल सकती है. इससे न सिर्फ घर खरीदने वालों बल्कि घर बनाने वालों को भी राहत मिल सकती है. 

सीमेंट पर अभी नहीं घटेगा GST

 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल ही में इशारा दिया था कि जल्द ही सीमेंट को भी 28% के स्लैब से निकालकर 18% के टैक्स स्लैब में लाया जाएगा. वित्त मंत्री ने कहा था कि कंज्यूमर के लिहाज से 28% स्लैब लगभग खत्म होने के कगार पर है. लेकिन, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में सीमेंट पर GST घटाने का प्रस्ताव नहीं है, लेकिन सीमेंट में भी राहत दी जाएगी. 

और क्या है बैठक का एजेंडा?
जीएसटी काउंसिल की 10 जनवरी की बैठक में सर्विस सेक्टर, MSME को भी बड़ी राहत मिल सकती है. काउंसिल छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी थेसहोल्ड की लिमिट 20 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने की तैयारी कर रही है. छोटे ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चर्स के लिए कंपोजिशन स्कीम का दायरा भी बढ़ाने की तैयारी है. इसे 1.50 करोड़ तक बढ़ाने पर मुहर लग सकती है.

सर्विस सेक्टर को भी राहत
सर्विस सेक्टर को भी कंपोजिशन स्कीम का फायदा देने की तैयारी की जा रही है. 50 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले सर्विस प्रोवाइडर को कंपोजिशन स्कीम का फायदा मिल सकता है. वहीं, स्मॉल सर्विस प्रोवाइडर के लिए 5 पर्सेंट फ्लैट जीएसटी लागू करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है. हालांकि, उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं मिलेगा.

रिटर्न फाइल करने में भी छूट संभव
छोटे कारोबारियों को रिटर्न फाइल करने के मामले में भी बड़ी छूट मिलने के आसार हैं. दरअसल, जीएसटी काउंसिल अब तिमाही के बजाए वार्षिक रिटर्न फाइल करने की मंजूरी दे सकती है. हालांकि, कारोबारियों को टैक्स तिमाही आधार पर ही भरना होगा. ई-वे बिल के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए RFID तकनीक का इस्तेमाल करने पर भी सहमति बनाई जा सकती है. RFID डाटा को ई-वे बिल सर्वर के साथ शेयर करने पर चर्चा हो सकती है.