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ZEE Jankari: क्‍या भारत में घरेलू उड़ानों का हाल किसी ई-रिक्शा जैसा हो सकता है!

अगर किसी एयरलाइन का पार्टनर कहे कि उसकी कंपनी पान की दुकान से भी बुरा काम कर रही है...तो उस पर चिंता करना बहुत ज़रूरी है. इसीलिये आज हम पान की दुकान बन चुकी इंडिगो एयरलाइंस का DNA टेस्ट कर रहे हैं.

ZEE Jankari: क्‍या भारत में घरेलू उड़ानों का हाल किसी ई-रिक्शा जैसा हो सकता है!

अगर आप विमान में सफ़र करते हैं...या जल्द ही हवाई यात्रा करना चाहते हैं...तो अगला DNA विश्लेषण आपके लिये है. आज हम आपको एक तरह से सावधान कर रहे हैं क्योंकि अब भारत में घरेलू उड़ानों का हाल किसी ई-रिक्शा जैसा हो सकता है...क्योंकि भारत में विमान उड़ाने वाली कंपनियों के पार्टनर कह रहे हैं कि उनकी एयरलाइन से बेहतर मैनेजमेंट तो अब किसी पान की दुकान में होता है.

अगली बार आप एयरपोर्ट जाएं...तो मुमकिन है आपको चकाचौंध से भरा एयरपोर्ट...और एयरलाइंस के काउंटर किसी पान की दुकान की तरह नज़र आएं. आपको ये बात मज़ाक लग रही होगी, लेकिन आज इस बात को बहुत ही गंभीरता से लेने की ज़रूरत है, क्योंकि इससे आपकी, हमारी और हज़ारों लाखों लोगों की ज़िंदगी जुड़ी हुई है.

अगर किसी एयरलाइन का पार्टनर कहे कि उसकी कंपनी पान की दुकान से भी बुरा काम कर रही है...तो उस पर चिंता करना बहुत ज़रूरी है. इसीलिये आज हम पान की दुकान बन चुकी इंडिगो एयरलाइंस का DNA टेस्ट कर रहे हैं. भारत के घरेलू एयरलाइन बिज़नेस में इंडिगो की हिस्सेदारी क़रीब 49 प्रतिशत है. इसके 230 से ज़्यादा विमान रोज़ 60 से ज़्यादा शहरों के बीच हज़ारों लोगों को लेकर उड़ान भर रहे हैं.

लेकिन इस कंपनी के दो पार्टनर राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया आपस में लड़ रहे हैं. राकेश गंगवाल ने कहा है कि ज़्यादा हिस्सेदारी रखने वाले राहुल भाटिया अब इंडिगो को किसी पान की दुकान से भी ख़राब तरीक़े से चला रहे हैं. राकेश गंगवाल ने इसकी शिकायत शेयर बाज़ार पर नज़र रखने वाली संस्था SEBI से की है. उन्होंने इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी चिट्ठी लिखी है.

इंडिगो एयरलाइंस Inter Globe Enterprises Pvt. Ltd का हिस्सा है. इस कंपनी में राकेश गंगवाल की 37 प्रतिशत हिस्सेदारी है. जबकि राहुल भाटिया के पास सबसे ज़्यादा 38 प्रतिशत हिस्सेदारी है. राकेश गंगवाल के मुताबिक़ राहुल भाटिया के पास ही इंडिगो के Controlling Rights यानी उसे चलाने के अधिकार हैं. उनका आरोप है कि कंपनी के निदेशकों को फ़ैसले लेने की आज़ादी नहीं है और इसीलिये इंडिगो में प्रबंधन की हालत बुरी हो गई है. गंगवाल ने Sebi को लिखी चिट्ठी में आरोप लगाया है कि राहुल भाटिया दूसरी कंपनियां खड़ी कर रहे हैं, जो इंडिगो के साथ कारोबार करें. इसके लिये ऑडिट कमेटी की भी मंज़ूरी नहीं ली जा रही है. उन्होंने कहा है कि 'पान की दुकान' में भी इंडिगो से बेहतर तरीक़े से काम होता है.

राकेश गंगवाल ने कहा है कि राहुल भाटिया के एकतरफ़ा फ़ैसलों से इंडिगो के निवेशकों को नुक़सान हो रहा है. निवेशक कंपनी में भरोसा खो रहे हैं.
 
राहुल भाटिया ने इन आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि राकेश गंगवाल झूठी बातें फैला रहे हैं और उनके पास कोई सबूत नहीं है. उनका दावा है कि कंपनी के प्रबंधन में भी राकेश गंगवाल का दख़ल है और उनकी सहमति से ही बोर्ड के अधिकारियों की नियुक्ति होती है.

कुल मिलाकर इंडिगो की कहानी ये है कि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में इस वक़्त अंदरूनी झगड़ा चल रहा है। इसके प्रबंधन को पान की दुकान से भी गया गुज़रा बताया जा रहा है. ज़ाहिर है इसका असर कंपनी के स्टाफ पर पड़ेगा. कंपनी के विमानों पर इसका असर होगा और इंडिगो में यात्रा करने वाले लोग भी इससे प्रभावित होंगे.
इंडिगो एयरलाइंस में यात्रा करने वाले लोगों को चिंता करने की ज़रूरत है.

भारत में यात्री विमानों और उनकी कंपनियों पर नज़र रखने वाली नियामक संस्था DGCA ने इंडिगो एयरलाइंस को 4 नोटिस भेजे हैं. इस नोटिस में इंडिगो एयरलाइंस के ऑडिट पर सवाल उठाये गये हैं. ये नोटिस Flight Operations, Flight Training and Flight Safety के लिये ज़िम्मेदार अधिकारियों को भेजे गये हैं. इससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इंडिगो में सुरक्षित उड़ान को लेकर हालात संतुष्ट करने वाले नहीं हैं. कोई भी विमान एक बार Take Off करता है...तो उसमें सवार यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह उसके पायलट की क़ाबिलियत और विमान की तकनीकी हालत पर निर्भर करती है. इंडिगो की अंदरूनी लड़ाई देखकर लगता नहीं कि उसके स्टाफ़ का मनोबल बहुत अच्छा होगा और उसके विमानों की हालत और उड़ानों की सुरक्षा को लेकर अब DGCA ने भी सवाल उठा दिये हैं.

इंडिगो की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी...तब राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया ने साथ मिलकर इस एयरलाइन को शुरू किया था. इंडिगो ने करीब 2-3 वर्षों तक बहुत अच्छा काम किया और फिर इस कम दाम वाली एयरलाइन का विस्तार होता गया. आज मार्केट शेयर के मामले में ये देश की नंबर 1 एयरलाइन बन गई है. लेकिन अब इसके सामने जेट एयरवेज़ और किंगफ़िशर एयरलाइंस जैसे हालात बनते जा रहे हैं. ये दोनों कंपनी अब बंद हो चुकी हैं. जेट एयरवेज़ की आख़िरी उड़ान इसी वर्ष अप्रैल में भरी गई थी. ख़राब मैनेजमेंट का असर इंडिगो एयरलाइंस पर भी पड़ रहा है.

दिसंबर 2018 में इंडिगो का शुद्ध मुनाफ़ा 75 प्रतिशत तक गिर गया था. जबसे ये विवाद शुरू हुआ है...इंडिगो के शेयर में 10 प्रतिशत से ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई है. सरकारी विमान कंपनी Air India को सरकार लगातार बेचने की कोशिश कर रही है. लेकिन सरकार को अब तक कोई ख़रीदार नहीं मिला है. Air India क़र्ज़ में डूबी हुई है और सरकार की मदद के बिना अपना ख़र्च भी नहीं उठा पा रही है.

Air India की आर्थिक हालत इतनी ख़राब हो चुकी है कि आशंका है कि इस वर्ष अक्टूबर के बाद कंपनी अपने कर्मचारियों को तनख़्वाह तक नहीं दे पाएगी. एक और विमान कंपनी Spice Jet की भी हालत अच्छी नहीं है. इसकी बड़ी वजह Spice Jet के 13 Boeing 737 Max 8 विमान हैं...जिनकी उड़ान अभी रुकी हुई हैं, क्योंकि इंडोनेशिया और Ethiopia के ऐसे ही दो विमान तकनीकी ख़राबी की वजह से क्रैश हो गये थे. 14 प्रतिशत मार्केट शेयर के लिहाज़ से Spice Jet भारत की तीसरी बड़ी विमान कंपनी है. लेकिन इसका Net Profit 77 प्रतिशत तक गिरा है.

वैसे Aviation सेक्टर में अस्थिरता की कई और भी बड़ी वजह हैं. जब ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो एयरलाइंस को घाटा होता है. एक विमान को उड़ाने में जो ख़र्च आता है...उसमें ईंधन की लागत 45 प्रतिशत होती है. और पिछले एक वर्ष में विमान का ईंधन 30 प्रतिशत महंगा हुआ है. इसलिये जब डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट होती है, तब भी एयरलाइंस को घाटा होता है.

लेकिन जब किसी विमान कंपनी का मैनेजमेंट भी पान की दुकान से निम्न स्तर का हो जाए...तो फिर महंगा ईंधन और मज़बूत डॉलर...किसी विमान कंपनी के बुरे दौर में मंदी वाले बोनस के समान देखा जाएगा और इस वक़्त इंडिगो एयरलाइंस के साथ यही हो रहा है.

आज की तारीख़ में दुनियाभर में विमान कंपनियां बुरे दौर से गुज़र रही हैं. एविएशन सेक्टर में कंपनियों का क़र्ज 60 हज़ार करोड़ रुपये से पार होने जा रहा है. अगर नागरिक उड्डयन उद्योग को मज़बूत बनाना है तो अगले 3 से 4 वर्षों में इसमें 35 हज़ार करोड़ रुपये की फंडिंग की ज़रूरत होगी.

लेकिन बढ़ती मांग के बावजूद भारत जैसे बाज़ार में इन कंपनियों को घाटा होना हैरान करता है. सरकार देश के छोटे शहरों को हवाई मार्गों से जोड़ रही है. कम अवधि वाली उड़ानों को फ़ायदे में लाने की योजना बनाई जा रही हैं. ऐसे में इस सेक्टर के लिए भविष्य की उम्मीद है. एविएशन सेक्टर में अमेरिका और चीन के बाद भारत का तीसरा नंबर है.

भारत में हर वर्ष विमान में यात्रा करने वाले लोगों की तादाद क़रीब 18 प्रतिशत बढ़ रही है. वर्ष 2018 से 2019 के बीच विमान में सफ़र करने वाले लोगों की तादाद 24 करोड़ से ज़्यादा थी. वर्ष 2020 में ये संख्या 30 करोड़ के क़रीब पहुंचने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2017 में उड़ान योजना यानी 'उड़े देश का आम नागरिक'...की शुरुआत के साथ एक बात कही थी.  उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार का लक्ष्य है कि हवाई चप्पल पहनने वाले लोग भी हवाई जहाज़ की सैर कर पायें. उड़ान योजना का लक्ष्य देश में क्षेत्रीय हवाई यात्रा को सस्ता और बेहतर बनाना है, ताकि लोग ट्रेन जितना किराये देकर भी विमान से यात्रा कर पाएं. लेकिन ज़रूरत है कि आम भारतीय का विमान टिकट सस्ता हो...साथ में उसकी यात्रा भी सुरक्षित हो.