close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

पाकिस्तान के ‘लकी फॉर्मेट’ में हो रहा World Cup, टीम इंडिया को बदलना होगा ‘लक’

रॉउंड रॉबिन फॉर्मेट पाकिस्तान के लिए यह लकी रहा है. उसने एकमात्र वर्ल्ड कप इसी फॉर्मेट में जीता था. तब भारत का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था. 

पाकिस्तान के ‘लकी फॉर्मेट’ में हो रहा World Cup, टीम इंडिया को बदलना होगा ‘लक’
आईसीसी की ट्रॉफी विश्व चैंपियन बनने वाली टीम को सौंपी जाएगी. (फोटो: Reuters)

लंदन: आईसीसी वर्ल्ड कप का इंतजार खत्म होने को है. भारतीय टीम तो वर्ल्ड कप (World Cup 2019) जीतने के इरादे से इंग्लैंड पहुंच भी गई है. महज सात दिन और. इसके बाद दुनिया की 10 टीमें क्रिकेट के इस महासमर में उतर जाएंगी. जब तक वर्ल्ड कप शुरू नहीं होता, तब तक क्रिकेटप्रेमी कयास लगाते रहेंगे कि विश्व चैंपियन कौन बनेगा. लेकिन कोई भी कयास लगाने से पहले यह भी ध्यान में रखें कि इस बार वर्ल्ड कप का फॉर्मेट बदला हुआ है. 44 साल के वर्ल्ड कप (Cricket World Cup) इतिहास में सिर्फ दूसरी बार सभी टीमें एक-दूसरे से मुकाबला करेंगी. 

दरअसल, 2019 का वर्ल्ड कप राउंड रॉबिन एंड नॉकआउट (Round-Robin and Knockout) फॉर्मेट में खेला जा रहा है. इसमें सभी टीमें एक-दूसरे से मैच खेलती हैं. इस बार वर्ल्ड कप (ICC Cricket World Cup 2019) में 10 टीमें हैं. हर टीम कम से कम नौ मैच जरूर खेलेगी. इसके बाद टूर्नामेंट की चार सर्वश्रेष्ठ टीमें सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगी. इससे पहले 1992 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में खेले गए विश्व कप में यह फॉर्मेट इस्तेमाल किया गया था. 

1992 में पाकिस्तान के लिए लकी रहा फॉर्मेट 
आईसीसी ने वर्ल्ड कप में जब पहली बार राउंड रॉबिन फॉर्मेट अपनाया तो यह पाकिस्तान (Pakistan) के लिए लकी साबित हुआ था. पाकिस्तान ने तब इमरान खान की कप्तानी में विश्व कप जीता था. भारत (Team India) 1992 के विश्व कप में सिर्फ दो मैच जीत सका था. वह छह मैच हार गया था. अब जबकि राउंड रॉबिन फॉर्मेट फिर लौटा है, तो इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं. देखना है कि इस बार पाकिस्तान विश्व कप में कैसा प्रदर्शन करता है. यह भी देखना होगा कि भारत 1992 की नाकामी को भुलाकर कैसा प्रदर्शन करता है. 

फेयर और चैलेजिंग है रॉउंड रॉबिन फॉर्मेट
रॉउंड रॉबिन ऐसा फॉर्मेट है, जिसमें सभी टीमें एक-दूसरे से खेलती हैं. इस कारण सभी टीमों को बराबर मौका मिलता. यह नहीं कहा जा सकता कि कोई ग्रुप कमजोर या मजबूत था. ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ जैसी कोई गुंजाइश भी नहीं बनती. लेकिन ज्यादा मैच होने के कारण टूर्नामेंट लंबा खिंच जाता है. इससे खिलाड़ियों के लिए फिटनेस से लेकर फॉर्म कायम रखने की चुनौती बढ़ जाती है. 

11 में से 6 विश्व कप ग्रुप फॉर्मेट में हुए
क्रिकेट विश्व कप अभी तक तीन फॉर्मेट में खेले गए हैं. पहले चार विश्व कप ग्रुप एंड नॉकआउट फॉर्मेट में खेले गए. साल 1999, 2003 और 2007 के विश्व कप ग्रुप एंड सुपर-6/सुपर-8 एंड नॉकआउट फॉर्मेट में खेले गए. अगले दो विश्व कप फिर ग्रुप एंड नॉकआउट फॉर्मेट में हुए. अब एक बार फिर आईसीसी राउंड रॉबिन फॉर्मेट की ओर लौट आई है. 

 

icc

भारत दोनों बार 6-6 मैच जीतकर चैंपियन बना 
जब हम 1983 में विश्व चैंपियन बने तब हमने कुल आठ मैच खेले थे. हमने इनमें से छह मैचों में जीत दर्ज की थी. दो मैचों में हार का सामना करना पड़ा था. 

जब हम 2011 में विश्व चैंपियन बने तब भी हमने कुल नौ मैच ही खेले. हमने सात मैचों में जीत दर्ज की थी. एक मैच में हार का सामना करना पड़ा और एक मैच टाई रहा. 

जब पाकिस्तान 1992 में चैंपियन बना तब उसने 10 में से छह मैच जीते थे. उसने फाइनल में उसी इंग्लैंड को हराया था. दिलचस्प बात यह है कि इंग्लैंड ने शुरुआती राउंड में पाकिस्तान को 74 रन पर ऑलआउट कर दिया था. 

जब ऑस्ट्रेलिया 2007 में चैंपियन बना तो उसे 11 मैच खेलने पड़े थे. इस विश्व कप में ग्रुप स्टेज के बाद आठ टीमों ने सुपर-8 राउंड में प्रवेश किया. इसके बाद सेमीफाइनल और फाइनल हुए. यह पहला और एकमात्र मौका था जब क्रिकेट विश्व कप में किसी टीम ने 11 मैच खेले. 

पहले दो विश्व कप (1975 और 1979) में चैंपियन बनने वाली टीम वेस्टइंडीज की टीम ने महज पांच मैच खेले थे. उसने 1975 में पांचों मैच जीते थे. साल 1979 के विश्व कप में उसने चार मैच जीते और एक मैच रद्द हो गया था.