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Cyber Criminals Digitally Arrested Former Banker News: दिल्ली के गुलमोहर पार्क में रहने वाले 78 वर्षीय नरेश मल्होत्रा, जिनका पूरा जीवन बैंकिंग जगत में बीता, कभी सोच भी नहीं सकते थे कि बुढ़ापे की बचत इस तरह खत्म हो जाएगी. एक महीने के भीतर वे 23 करोड़ रुपए गंवा बैठे. वो भी किसी डकैत या लुटेरे के हाथों नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों की ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ में फंसकर.
यह सब एक फोन कॉल से शुरू हुआ. कॉल करने वाले ने खुद को मोबाइल कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मुंबई में हुआ है, जो आतंकवाद फंडिंग से जुड़ा है. इसके बाद लगातार फोन आते रहे. कभी मुंबई पुलिस, कभी सीबीआई, कभी ईडी का हवाला दिया गया. हर कॉल में एक ही बात दोहराई जाती- आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके गंभीर अपराध किए गए हैं.
'आप घर से बाहर नहीं जा सकते'
कॉल करने वाले बदमाशों की ठगी का नया हथियार था 'डिजिटल अरेस्ट'. नरेश मल्होत्रा को कहा गया, 'आप पुलिस की निगरानी में हैं और घर से बाहर नहीं जा सकते. आपको हर दो घंटे में वीडियो कॉल पर रिपोर्ट करनी होगा. इस बारे में परिवार या दोस्तों को भी कुछ नहीं बताना है.' बदमाश इतने रौब के साथ पुलिसिया अंदाज में बात कर रहे थे कि एक पूर्व बैंकर भी अपनी समझ खो बैठा.
धीरे-धीरे उनसे बैंक बैलेंस, निवेश और संपत्ति की जानकारी मांगी गई. उन्हें भरोसा दिलाया गया कि यह सिर्फ जांच प्रक्रिया है, पैसा बाद में वापस कर दिया जाएगा. हर लेन-देन के बाद उन्हें नकली RBI सर्टिफिकेट भेजे जाते. धमकी इतनी गहरी थी कि मल्होत्रा ने खुद बैंक जाकर अपनी जमा पूंजी और निवेश भुनाए और ठगों के खातों में डालते गए.
4 हजार से ज्यादा खातों में घुमाई गई रकम
एक महीने में कुल 20 लेन-देन हुए और उनकी पूरी जिंदगी की कमाई ठगों के पास चली गई. जब उनसे सुप्रीम कोर्ट के नाम पर 5 करोड़ और मांगे गए, तो उन्हें शक हुआ और उन्होंने साफ इनकार कर दिया. इसके बाद फोन आना बंद हो गया. 19 सितंबर को उन्होंने हिम्मत जुटाकर पुलिस से संपर्क किया और पूरी सच्चाई बताई.
दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट इस मामले की जांच कर रही है. अब तक करीब 2.67 करोड़ रुपए फ्रीज किए जा चुके हैं. पुलिस का कहना है कि यह रकम 4,000 से ज्यादा खातों में घुमाई गई ताकि ट्रेस न हो सके. लेकिन जांचकर्ता आश्वस्त हैं कि अपराधियों को जल्द पकड़ लिया जाएगा.
'मैं चाहता हूं कि मेरी कहानी दूसरों के लिए चेतावनी बने'
नरेश मल्होत्रा कहते हैं, 'मैंने पूरी जिंदगी की कमाई अपने बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए बचाई थी लेकिन एक महीने में ही सब खत्म हो गया क्योंकि मैंने गलत लोगों पर भरोसा किया. मैं चाहता हूं कि मेरी ये कहानी दूसरों के लिए चेतावनी बने. आप कोई भी फोन कॉल या धमकी पर एकदम से यकीन मत कीजिए. उसे वेरिफाई कीजिए और उसके बाद ही कोई फैसला कीजिए.'
अगर ऐसा फोन कॉल आपको आए तो क्या करें:-