दिल्ली का ये 'रंगबाज' चढ़ा पुलिस के हत्थे, दर्जनों हत्याओं का आरोप

दिल्ली के द्वारका और साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में कई ऐसे गैंग थे जो पूरे इलाके में कब्जा जमा कर रंगदारी वसूलना, जमीनों पर अवैध कब्जों जैसे धंधों पर अपनी पकड़ बनाना चाहते थे.

दिल्ली का ये 'रंगबाज' चढ़ा पुलिस के हत्थे, दर्जनों हत्याओं का आरोप

नई दिल्ली: देशभर में लगे लॉकडाउन की वजह से पुलिस लॉकडाउन लागू करवाने में लगी थी वहीं देश भर में गैंगस्टर और माफिया अपने गैंग को मजबूत और बड़ा करने में लगे हुए थे. उन्हीं में से एक था ज्योति उर्फ बाबा नाम का रंगबाज, एक वक्त था जब दिल्ली की जमीन पर आए दिन होने वाली गैंगवार में लाशें गिरा करती थी.

दिल्ली के द्वारका और साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में कई ऐसे गैंग थे जो पूरे इलाके में कब्जा जमा कर रंगदारी वसूलना, जमीनों पर अवैध कब्जों जैसे धंधों पर अपनी पकड़ बनाना चाहते थे, और उसी वर्चस्व की लड़ाई में दोनों तरफ से होने वाली गैंगवार में दर्जनों लोगों की जान चली गई थी.

उन्हीं गैंग्स में एक नाम था ज्योति बाबा गैंग, जो हत्या के मामले में जेल में सजा काट रहा था. लेकिन अगस्त 2019 को पैरोल पर बाहर आकर ज्योति उर्फ बाबा फरार हो गया था जिसके बाद उसे पुलिस से बचने के लिए पनाह दी गुजरात के शराब माफिया ने, अपने हरियाणा के गुर्गों के जरिये. ज्योति बाबा पर दिल्ली पुलिस ने उसके संगठित अपराध को देखते हुए मकोका भी लगाया हुआ था और उसपर एक लाख का ईनाम भी पुलिस ने रखा हुआ था. 

पैरोल पर फरार होने के बाद ज्योति उर्फ बाबा अपने छोटे भाई कपिल सांगवान उर्फ नंदू के साथ मिलकर एक अलग गैंग बनाकर लॉकडाउन के समय मे वो अपने गैंग को मजबूत करके अपने दुश्मन मंजीत महाल के गैंग को खत्म करना चाहते थे. मंजीत महाल फिलहाल न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल के अंदर बंद है. लिहाजा वो अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया इससे पहले ही स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस के इंस्पेक्टर विक्रम दहिया के नेतृत्व में एक टीम तैयार की जिसमें एसआई संदीप डबास, एसआई मंजीत, एसआई निशांत दहिया, एसआई सुमेर सिंह, एसआई शामिल थे. पूरे ऑपेरशन की देखरेख काउंटर इंटेलिजेंस के डीसीपी मनीषी चंद्रा कर रहे थे.

दरअसल स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस को लगातार खबर मिल रही थी कि ज्योति उर्फ बाबा ने गुजरात के शराब माफिया से हाथ मिला लिया है और वो लगातार उनके संपर्क में है. काउंटर इंटेलिजेंस को ख़बर मिली कि ज्योति उर्फ बाबा गुजरात के सूरत के एक होटल में नाम बदल कर रह रहा है. पुलिस की टीम गई और ज्योति उर्फ बाबा को उस वक्त पकड़ा जब वो सफेद रंग की लक्सरी ऑडी Q7 में बैठ कर किसी दूसरे शहर में जाने की फ़िराक में था.

गाड़ी की रजिस्ट्रेशन धीरेनभाई करिया के नाम पर थी, धीरेनभाई गुजरात का बड़ा शराब माफिया है. जिसने 2019 में जूनागढ़ से निर्दलीय लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था. फिलहाल धीरेनभाई सूरत जेल मे है, पुलिस को ज्योति उर्फ बाबा के पास से अमेरिकन आर्मी की बनी 0.32 MM की सॉफिस्टिकेटेड पिस्तौल 4 जिंदा कारतूस के साथ मिली.

ज्योति उर्फ बाबा कैसे बना अपराधी
ज्योति उर्फ बाबा का जुर्म की दुनिया मे नाता सिर्फ 16 साल की उम्र से जुड़ गया था जब उसने 16 साल की उम्र में ही गुरुग्राम में एक कत्ल को अंजाम दिया, नाबालिग होने की वजह से वो जल्द ही बाल सुधार गृह से बाहर आ गया. बाहर आकर उसने स्थानीय लड़को को अपने साथ मिलाकर एक गैंग तैयार किया और नजफगढ़ और आस पास के इलाके के गैंगस्टर मंजीत महाल के गैंग को ललकारने लगे जिसका नतीजा ये हुआ कि 19 साल की उम्र में आते आते इन दोनों गैंग की गैंगवार में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी. एक के बाद एक हत्या करने के बाद ज्योति उर्फ बाबा कई बार गिरफ्तार हुआ और अदालत से उसको उम्र कैद की सजा भी हो गई.

उसके जेल जाने के बाद उसके छोटे भाई कपिल सांगवान उर्फ नंदू ने गैंग की कमान भले ही अपने हाथों में ले ली थी लेकिन जेल के अंदर बैठ कर ज्योति उर्फ बाबा ही उसको निर्देश देता था कि क्या करना है और क्या नहीं करना है. जेल के अंदर बंद बाबा का दिमाग और जेल से बाहर नंदू की ताकत, जरायम की दुनिया का ये वो कामयाब फॉर्मूला था जिसकी वजह से अब बाबा-नंदू गैंग ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी और जमीनों पर गैरकानूनी कब्जे, रंगदारी, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के धंधे में अब बाबा-नंदू गैंग की तूती बोलने लगी थी. अब नजफगढ़ और उसके आस पास के इलाके के ज्यादातर गैरकानूनी धंधों पर बाबा-नंदू गैंग का वर्चस्व कायम हो गया था. लेकिन. 24 सितंबर 2016 को हत्या समेत कई मामलों में कपिल सांगवान उर्फ नंदू गिरफ्तार हो गया. जून 2019 में कपिल को भोंडसी जेल से पैरोल मिल गई, जिसके बाद कपिल पैरोल तोड़कर फरार हो गया और जुर्म की दुनिया मे अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए उसने 24 सितंबर 2019 को दिनदहाड़े द्वारका के एक प्रॉपर्टी डीलर की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी. उसके बाद से ही कपिल सांगवान उर्फ नंदू फरार है पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर भी 50 हजार का इनाम रखा हुआ है.

पुलिस की पूछताछ ने ज्योति उर्फ बाबा ने खुलासा किया कि उसके मंजीत महाल के साथ उसकी गैंगवार 2016 में शुरू हुई थी, जब मंजीत ने सुनील उर्फ डॉक्टर की हत्या कर दी थी जो रिश्ते में ज्योति बाबा और कपिल सांगवान नंदू का सगा भाई था.

दरअसल, मंजीत महाल को लगता था कि सुनील उर्फ डॉक्टर गैंगस्टर विकास लगरपुरिया का साथी था। मंजीत महाल की विकास लगरपुरिया के साथ पुरानी दुश्मनी थी. लेकिन सुनील की मौत का बदला लेने में उसके छोटे भाई ज्योति उर्फ बाबा ने समय नहीं लगाया और कुछ ही घंटों के अंदर बाबा-नंदू गैंग के लोगों के मंजीत महाल के करीबी नफे उर्फ मंत्री के घर पर गोलियां चला दी, नफे उर्फ मंत्री सुनील की हत्या में शामिल था.

इस गोलीबारी में नफे उर्फ मंत्री के पिता की मौत हो गई जबकि उसकी मां भी गंभीर रूप से घायल हो गई. जिसके बाद दोनों तरफ से हुई गैंगवार में 6 से ज्यादा हत्याएं हुई. बाबा- नंदू गैंग ने मंजीत महाल के पिता कृष्ण की भी हत्या कर दी जिसके बाद मंजीत महाल गैंग के लोगों ने दिनेश पहलवान और विक्रांत गुलिया नाम के उन दोनों शूटर्स की हत्या कर दी थी जिन्होंने मंजीत महाल के पिता की हत्या की थी. 2012 से शुरू हुई इन दोनों गैंग के बीच शुरू हुई गैंगवार अभी भी जारी है. अब तक दर्जनों लोगो की हत्या गैंगवार में हो चुकी है. लेकिन इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है कि आखिर देश की राजधानी दिल्ली से कब इन रंगबाजों का खात्मा होगा.

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