Madvi Hidma Killed: मारेदुमिल्ली में पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई. इस अभियान में शीर्ष माओवादी नेता हिडमा समेत छह माओवादी मारे गए. अभी व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. आपको बताते चलें कि पुलिस को आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमावर्ती इलाकों में माओवादी गतिविधियों की पूर्व सूचना थी.
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Top Maoist Leader Madvi Hidma Killed In Police Encounter: मंगलवार की सुबह लंबे समय से कथित रेड बेल्ट में खौफ का दूसरा नाम रहे टॉप माओवादी नेता हिडमा के एक मुठभेड़ में मारे जाने की खबर आई. माओवादियों की केंद्रीय समिति का वरिष्ठ नेता हिडमा एक करीबी मुठभेड़ में मारा गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोलीबारी के दौरान उनकी पत्नी और कई करीबी फॉलवोवर्स जो उसके एक इशारे पर कुछ भी कर सकते थे वो भी साथ में मारे गए. इस पूरे एनकाउंटर को भारत से माओवाद खत्म होने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
मारेदुमिल्ली में एनकाउंटर
आज सुबह अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेदुमिल्ली में पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई. यह गोलीबारी सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच हुई. इस अभियान में शीर्ष माओवादी नेता हिडमा समेत छह माओवादी मारे गए. अभी व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. आपको बताते चलें कि पुलिस को आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमावर्ती इलाकों में माओवादी गतिविधियों की पूर्व सूचना थी. इस एनकाउंटर पर पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता स्थिति पर कड़ी नज़र रख रहे थे.
कौन था हिडमा?
केंद्र की मोदी सरकार 2026 में देश में नक्सलवाद के पूर्ण सफाए के लिए काम कर ही है. माना जाता है कि हिडमा देश के अंदर हुए कम से कम 26 बड़े हमलों का मास्टर माइंड था. इन हमलों में 2017 का सुकमा हमला और 2013 का झीरम घाटी नरसंहार शामिल है, जिसमें 27 लोग मारे गए थे. हिंसा का शिकार लोगों में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी शामिल थे. वो 2010 के दंतेवाड़ा हमले में भी शामिल था, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हो गए थे और 2021 के सुकमा-बीजापुर मुठभेड़ में भी शामिल था, जिसमें 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे.
इससे पहले, आईजी सुंदरराज ने कहा था कि उन्हें 31 मार्च, 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने के अपने लक्ष्य को पूरा करने की उम्मीद है और पिछले 20 महीनों में 2200 से ज़्यादा नक्सली मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं.
पिछले कुछ दशकों से वामपंथी उग्रवाद न केवल बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए बल्कि देश के बड़े हिस्से के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती रहा है. पिछले कुछ साल बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के लिए बहुत निर्णायक रहे हैं. पिछले दो सत्रों में बस्तर क्षेत्र में 450 से अधिक नक्सली शव बरामद हुए. इसी दौरान बसवराजू और अन्य जैसे शीर्ष नक्सली कैडर मारे गए. बीते कुछ महीनों में, केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्यों और अन्य संभागीय समिति के सदस्यों सहित 300 से अधिक माओवादी कैडरों ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है.