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Maharashtra topped in corruption: सरकार चाहे किसी दल की हो उसके नेता खुद को दूसरे दलों के नेताओं से ज्यादा पाक-साफ बताते हैं. ये कुछ वैसा है जैसा कि सरकारें गुड गवर्नेंस के लाख दावे करती हैं, बावजूद इसके भ्रष्टाचार (corruption) के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं. खैर ज्यादा हैरानी तो तब होती है जब राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के सालाना आंकड़े सामने आते हैं तो उसकी रिपोर्ट में एक ही बार में कई-कई चौंकाने वाले खुलासे हो जाते हैं.
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के सबसे ज्यादा केस कहां?
NCRB हालिया रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में भारत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 763 मामले सामने आए हैं. आपको बताते चलें कि ये वो केस है जो रजिस्टर हुए यानी इस हिसाब से ये आंकड़ा कहीं ज्यादा भी हो सकता है. आंकड़ों की इस पड़ताल में ये बात भी सामने आई है कि कॉपीराइट उल्लंघन के मामलों में भी यही स्टेट टॉप पर रहा है. जहां कॉपीराइट वॉयलेशन के स्टेट में कुल 335 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 340 लोगों ने पीड़ित होने का दावा किया.
यूपी दूसरे पायदान पर
भ्रष्टाचार के मामलों में, उत्तर प्रदेश 216 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा. आईटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों में महाराष्ट्र साल 2023 में दर्ज 960 मामलों के साथ 6ठे स्थान पर रहा. इसी तरह कर्नाटक 21,870 आईटी एक्ट के मामलों में शीर्ष पर रहा. इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉपीराइट अधिनियम के तहत महाराष्ट्र में सबसे अधिक 335 मामले दर्ज किए गए, उसके बाद कर्नाटक में 204 मामले और उत्तर प्रदेश में 198 मामले दर्ज हुए.
SC-ST एक्ट के सबसे ज्यादा केस कहां?
वहीं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अनुसूचित जातियों के विरुद्ध अपराधों के मामले में महाराष्ट्र 340 मामलों के साथ देश में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि उत्तर प्रदेश में ऐसे 2,771 मामले दर्ज किए गए.
FAQ-
सवाल- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत महाराष्ट्र में कुल कितने केस आए?
जवाब- सबसे ज्यादा 763 मामले.
सवाल- देश में एससी-एसटी एक्ट में सबसे ज्यादा केस कहां दर्ज हुए?
जवाब- UP