दिल्ली: PTM पर जारी सियासी घमासान, छात्रों और अभिभावकों के बीच भी असमंजस की स्थिति

शिक्षको का यह भी कहना है कि जब एडवांस क्लास चल रहीं हैं तो पीटीएम क्यों नहीं हो सकती.

दिल्ली: PTM पर जारी सियासी घमासान, छात्रों और अभिभावकों के बीच भी असमंजस की स्थिति
फाइल फोटो

नई दिल्ली: सरकारी स्कूलों में चार जनवरी को प्रस्तावित पेरेंट्स टीचर मीटिंग (पीटीएम) को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार में ठन गई है. जारी सियासी घमासान के बीच छात्रों और अभिभावकों में भी असमंजस की स्थिति है, जहां एक तरफ कुछ पेरेंट्स का मानना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए कल ही पीटीएम होनी चाहिए तो दूसरी तरफ कुछ पेरेंट्स का मानना है कि छुट्टियों में पीटीएम कराने का कोई मतलब नहीं है, जब आपको पीटीएम ही करना था तो 15 जनवरी तक छुट्टी क्यों घोषित की.

इसके उलट दिल्ली (Delhi) के सरकारी स्कूलों की शिक्षकों का भी कहना है कि प्री बोर्ड एग्जाम्स के रिजल्ट आए हैं और यह पीटीएम बोर्ड एग्जाम्स के लिहाज से बेहद अहम है क्योंकि प्री बोर्ड एग्जाम में जो भी रिजल्ट आए हैं, वह इस मीटिंग में डिस्कस होता है इसलिए कल ही पीटीएम होनी चाहिए. शिक्षको का यह भी कहना है कि जब एडवांस क्लास चल रहीं हैं तो पीटीएम क्यों नहीं हो सकती.

केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बुधवार को उपराज्यपाल को लिखा पत्र 

इन सब के बीच स्टूडेंट्स भी कंफ्यूज नजर आ रहे हैं. कुछ छात्रों का कहना है कि ठंड बहुत है और इस दौरान जब स्कूल बंद है तो पीटीएम क्यों? कुछ ऐसे भी छात्र थे जिन्होंने कहा कि पीटीएम जरूरी है और यह कल ही होना चाहिए. दरअसल, कल होने वाले पीटीएम पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बुधवार को उपराज्यपाल को पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने ठंड के इस मौसम में पीटीएम से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का हवाला देते हुए पीटीएम के आयोजन को लेकर संज्ञान लेने और आवश्यक निर्देश जारी करने का निवेदन किया था.

स्टूडेंट्स ने ठंड का दिया हवाला

दिल्ली के सरकारी स्कूलों (Government School) में चार जनवरी को प्रस्तावित पीटीएम के विरोध में सोमवार को सरकारी स्कूल शिक्षक संघ (जीएसटीए) ने केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन से मुलाकात की थी. इसमें जीएसटीए ने पूरे उत्तर भारत में ठंड का कहर जारी होने और इस स्थिति में स्कूल बंद होने का हवाला देते हुए पीटीएम के आयोजन को लेकर आपत्ति जताई थी. साथ ही इसे रद्द करने की मांग की थी. जीएसटीए की इस मांग का संदर्भ लेते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने इस पर संज्ञान लेने की गुजारिश उपराज्यपाल से की थी.