Tips: कोरोना वायरस के दौर में बच्चों पर बढ़ रहा है मेंटल प्रेशर, ऐसे रखें खास ख्याल

लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी हालात सामान्य होने में काफी समय लग सकता है. ऐसे में बच्चों के साथ ही अपने इमोशनल बैलेंस और मेंटल हेल्थ का भी पूरा ख्याल रखें.

Tips: कोरोना वायरस के दौर में बच्चों पर बढ़ रहा है मेंटल प्रेशर, ऐसे रखें खास ख्याल
कोरोना के दौर में बच्चों की जिंदगी सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है

नई दिल्ली: बच्चे हों या बड़े, कोरोना वायरस (coronavirus) ने सभी की जिंदगी को बदल कर रख दिया है. जहां पहले बच्चे पढ़ाई-लिखाई के साथ खेलने-कूदने या दोस्तों से मिलने-जुलने जाते थे, वहीं अब डर और लॉकडाउन (lockdown) के चलते वे अपने घरों में कैद हैं. यहां तक कि स्कूल-कॉलेज बंद होने की वजह से अब वे सिर्फ डिजिटल एजुकेशन पर ही निर्भर हैं. हालांकि, लाइफ में पढ़ाई-लिखाई के अलावा भी बहुत से गंभीर मुद्दे हैं, जिनके प्रति हमें ध्यान देना जरूरी है और अब बच्चों की कंडीशनिंग उसी तरह से होनी चाहिए. फिलहाल के हालात को देखते हुए बच्चों को आपके सही गाइडेंस की ज़रूरत है, उन्हें ऐसे हालात का सामना करने के लिए मजबूत बनाएं और इसके दूरगामी प्रभावों से भी परिचित करवाएं.

कोरोना ने बदले तौर-तरीके
कोरोना वायरस (coronavirus) के कहर ने सारी दुनिया के तारतम्य को बदल कर रख दिया है. जिन कंपनियों ने कभी बेहद मजबूरी में भी अपनी एंप्लॉइज को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा नहीं दी थी, उनके पास भी अब इसके सिवाय कोई चारा नहीं है. ऐसे में भारतीय शिक्षण व्यवस्था (इंडियन एजुकेशन सिस्टम-Indian Education System) में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. बात चाहे प्राइमरी एजुकेशन की हो, हायर सेकेंड्री की या यूनिवर्सिटी लेवल की, सभी जगह फेरबदल कर दिया गया है. मार्च से सभी स्कूल, कॉलेज व यूनिवर्सिटी बंद हैं. यहां तक कि इतिहास में पहली बार हर तरह की परीक्षाओं तक को टाल दिया गया है. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का लॉस होना भी लाजिमी था और इसीलिए भारत में ऑनलाइन एजुकेशन (education) के महत्व को समझते हुए आनन-फानन में हर लेवल के स्टूडेंट की पढ़ाई शुरू करवा दी गई. सभी को पता है कि महीने-6 महीने में कोरोनावायरस से जंग तो जीतनी ही है और उसके बाद जिंदगी फिर उसी पुराने ढर्रे पर भी लौट आएगी और ऐसे में बच्चों की पढ़ाई को जारी रखना भी जरूरी है.

बच्चों पर बढ़ रहा मेंटल प्रेशर
पढ़ाई की नई व्यवस्था के लिए प्राइमरी के बच्चे भी अब हाथों में फोन और टैबलेट लिए नजर आते हैं. आज-कल स्टूडेंट्स और टीचर्स घंटों ऑनलाइन मीडियम को समझने और फिर उसे अपनी जिंदगी में शामिल करने की कोशिश में लगे हुए हैं. हम और आप तो कोरोना वायरस के कहर के खत्म होने के बाद एक बार फिर जिंदगी के उसी पुराने ढांचे में वापिस लौट जाएंगे. हो सकता है कि हम में से काफी लोगों को इस दौरान आर्थिक तौर पर काफी नुकसान उठाना पड़े, मगर मुझे लगता है कि हमारी जिंदगी इन मासूमों से तो आसान ही रहेगी. जहां स्कूल जाने वाले बच्चों को इतने महीनों बाद अचानक स्कूल जाने की दिनचर्या को अपनाना पड़ेगा तो वहीं कॉलेज के सीनियर स्टूडेंट्स को लंबे समय तक नौकरी न मिलने या कम आमदनी में संतोष करने वाली स्थिति से गुजरना पड़ेगा. सिर्फ इतना ही नहीं, कोर्स कवर करने के लिए पड़ने वाले दबाव के कारण इन सभी का मेंटल स्ट्रेस डबल होने की भी आशंका है.

थामिए अपने बच्चों का हाथ
बच्चों पर मेंटल प्रेशर बढ़ रहा है, ऐसे में पेरेंट्स को अभी उनको समझकर उनका साथ देने की खास जरूरत है. यहां आपको इस बात का ख्याल रखना होगा कि पढ़ाई के साथ ही आपके बच्चे की जिंदगी और मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही मायने रखता है. ऐसे में इन बातों पर ध्यान दें-
1. बच्चों का टाइमटेबल सेट करके रखें. उनके उठने-सोने और पढ़ाई-लिखाई व खेलने का समय नियत कर दें, जिससे कि कई महीनों बाद अचानक से स्कूल जाने में उन्हें अटपटा न लगे.
2. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की वजह से बच्चे घरों में कैद हैं. अभी उन्हें बेशक बहुत मजा आ रहा होगा, मगर उन्हें उनके दोस्तों व टीचर्स के टच में रखने की कोशिश करें, वर्ना आने वाला समय काफी कठिन सबित होगा.
3. उन पर अपनी इच्छाओं का लोड न डालें. इस समय आपको उनकी मेंटल और इमोशनल हेल्थ का ध्यान रखने की जरूरत है.
4. बच्चों के टीचर्स से बातचीत करें. उनके साथ डिस्कस करके बच्चों का डेली शेड्यूल तैयार करें.
5. अगर आपके बच्चे कॉलेज में हैं तो उनसे दोस्तों की तरह बात करने की कोशिश करें. हर समय उनको डांटने या ताने देने के बजाय एक बार उनके नजरिए से सोचने की कोशिश करें.
लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी हालात सामान्य होने में काफी समय लग सकता है. ऐसे में बच्चों के साथ ही अपने इमोशनल बैलेंस और मेंटल हेल्थ का भी पूरा ख्याल रखें.