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SPARC के तहत भारत और विदेशी यूनिवर्सिटी के बीच 282 ज्वाइंट रिसर्च प्रोजेक्ट मंजूर

स योजना के तहत 250 करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान किया गया है और इससे 500 वैज्ञानिक परियोजनाओं का वित्त पोषण किया जायेगा.

SPARC के तहत भारत और विदेशी यूनिवर्सिटी के बीच 282 ज्वाइंट रिसर्च प्रोजेक्ट मंजूर
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर. (फाइल)

नई दिल्ली: मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अकादमिक और अनुसंधान सहयोग संवर्धन योजना (SPARC) के तहत 282 संयुक्त शोध परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है जो भारतीय संस्थानों और उत्कृष्ट विदेशी विश्वविद्यालयों के बीच होंगी. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने  बताया, 'स्पार्क योजना के तहत 282 संयुक्त शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. ये शोध 69 भारतीय संस्थान और 27 देशों के 270 उत्कृष्ट विदेशी विश्वविद्यालयों के बीच होंगे' उन्होंने कहा कि ये 282 परियोजनाएं 179 करोड़ रूपये की हैं और इसका मकसद अनुसंधान एवं शोध को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है.

उन्होंने बताया कि इसके अलावा हाल ही में विज्ञान में उन्नत शोध एवं बदलाव योजना (स्टार्स) को मंजूरी दी गई है जिसका उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्यों का वित्त पोषण करना है. इस योजना के तहत 250 करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान किया गया है और इससे 500 वैज्ञानिक परियोजनाओं का वित्त पोषण किया जायेगा. परियोजनाओं का चयन प्रतिस्पर्धा के आधार पर होगा. गौरतलब है कि स्‍पार्क योजना का लक्ष्‍य भारतीय संस्‍थानों और विश्‍व के सर्वोत्‍तम संस्‍थानों के बीच अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुगम बनाकर भारत के उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में अनुसंधान परिदृश्‍य को बेहतर बनाना है.

इस योजना के तहत 600 संयुक्‍त शोध प्रस्‍ताव दो वर्षों के लिए दिये जायेंगे, ताकि कक्षा संकाय में सर्वोत्‍तम माने जाने वाले भारतीय अनुसंधान समूहों और विश्‍व के प्रमुख विश्‍वविद्यालयों के प्रख्‍यात अनुसंधान समूहों के बीच उन क्षेत्रों में शोध संबंधी सुदृढ़ सहयोग संभव हो सके जो विज्ञान की दृष्टि से अत्‍याधुनिक माने जाते हैं. भारत के संदर्भ में इनकी सीधी सामाजिक प्रासंगिकता पर जोर रहेगा. इस योजना के तहत 31 मार्च, 2020 तक शोध कार्यो को आगे बढ़ाना है.

स्पार्क के तहत प्रत्येक योजना के लिये 50 लाख रूपये से 1 करोड़ रूपये की धनराशि आवंटित की जायेगी. अकादमिक शोध एवं गठजोड़ प्रोत्साहन योजना :एसपीएआरसी: चुनिंदा उत्कृष्ट देशी और विदेशी विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थाओं के बीच संयुक्त प्रयास है. इसके तहत एनआईआरएफ रैकिंग में उत्कृष्ट स्थान पाने वाले भारतीय संस्थान तथा क्यूएस रैकिंग में उत्कृष्ट स्थान पाने वाले विदेशी संस्थान हिस्सा ले सकेंगे. इस तरह इसमें 254 भारतीय विश्वविद्यालय एवं संस्थान और 478 विदेशी विश्वविद्यालय हिस्सा ले सकेंगे. इस संयुक्त शोध पहल के तहत एक टीम में दो विदेशी और दो भारतीय शिक्षक तथा दो भारतीय एवं दो विदेशी छात्र होंगे. एक टीम कुल आठ लोगों की होगी. इसके तहत चुने गए छात्रों को दुनिया की श्रेष्ठ प्रयोगशाला में एक वर्ष के लिये पहुंच उपलब्ध करायी जायेगी.

(इनपुट-भाषा)