नई शिक्षा नीति नए भारत की परिकल्पना को पूरा करेगी: डॉ. रमेश पोखरियाल

रमेश पोखरियाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति अभी तक की शिक्षा प्रणाली में अमूलचूल परिवर्तन लेकर आने वाली है. ये बुनियादी शिक्षा को मजबूत करेगी, मानसिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चे को बढ़ाएगी. ये बच्चे को विश्व स्तर तक के प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगी.

नई शिक्षा नीति नए भारत की परिकल्पना को पूरा करेगी: डॉ. रमेश पोखरियाल
डॉ. रमेश पोखरियाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति बुनियादी शिक्षा को मजबूत करेगी.

नई दिल्ली: मोदी कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति (New Education Policy 2020) को हरी झंडी दे दी है. 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है. शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal Nishank) ने नई शिक्षा नीति को लेकर ज़ी न्यूज़ से खास बातचीत की. डॉ. रमेश पोखरियाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति अभी तक की शिक्षा प्रणाली में अमूलचूल परिवर्तन लेकर आने वाली है. ये बुनियादी शिक्षा को मजबूत करेगी, मानसिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चे को बढ़ाएगी. ये बच्चे को विश्व स्तर तक के प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगी.

360 डिग्री होलिस्टिक मूल्यांकन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमने अंक ज्ञान पर ज्यादा जोर दिया है. वैज्ञानिकों की राय है कि 3 साल से 6 साल की उम्र में बच्चों का 85% मस्तिष्क का विकास होता है. इसीलिए हमने 10+20 के सिस्टम को खत्म किया है. 360 डिग्री होलिस्टिक मूल्यांकन का प्रावधान रखा है. 12वीं तक 100% बच्चों को शिक्षा प्रणाली से जोड़ना हमारा लक्ष्य है. 

उन्होंने कहा, 'नई शिक्षा नीति नए भारत की परिकल्पना को पूरा करेगी. इसीलिए हमने 6 क्लास से ही व्यावसायिक शिक्षा का प्रावधान रखा है. इंटर्नशिप का प्रावधान किया है ताकि 12वीं के बाद जब बच्चा निकले तो पूरी तरह से स्किल्ड होकर निकलेगा. अब हायर एडुकेशन में क्रेडिट बैंक का प्रावधान रखा है. छात्रों के लिए DG लॉकर होगा जिनमें उसकी सारी डिग्री मौजूद रहेगी. '

उच्च शिक्षा के लिए आयोग
डॉ. रमेश पोखरियाल ने कहा, 'मुझे लगता है कि जिस पढ़ाई के लिए बच्चे विदेश जाते थे अब वो देश में ही पा सकते हैं. उच्च शिक्षा के लिए हमने एक आयोग बनाया है(उच्च शिक्षा आयोग) जिसके अंतर्गत UGC, AICTE और NCT को एक बैनर के तहत लाया जाएगा. नई शिक्षा नीति की कुछ बातें जैसे ऑनलाइन पढ़ाई तो हमने शुरू कर दी है, बाकी नए पाठ्यक्रम के लिए कमेटी बनेगी. NCF बनेगी और उसका काम शुरू होगा.'

डेढ़ लाख से ज्यादा ग्राम समितियों के सुझाव आए
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिनको शंका है उनको बताना चाहूंगा, हमारे प्रधानमंत्री जी जो बोलते हैं वो करके दिखाते हैं. ये मोदी जी की सरकार है. वो तो कहते हैं कि प्लान बाद में बनाओ और पहले ये बताओ कि क्रियान्वयन कैसे होगा. मानव संसाधन मंत्रालय जो अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा. हमने नाम ही नहीं नीति भी बदली है. जो लोग इस नीति को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं उनको ये बताना चाहूंगा कि अभी तक दुनिया में  किसी भी नीति को बनाने के लिए इतना बड़ा परामर्श नहीं हुआ होगा, जितना इसके लिए हुआ है. ये नीति किसी कमरे में बैठकर नहीं बनी है. डेढ़ लाख से ज्यादा ग्राम समितियों के सुझाव आए.

डॉ. रमेश पोखरियाल ने कहा, 'शिक्षकों , विद्यार्थियों, अभिभावकों, सांसदों से विधायकों से यहां तक कि ग्राम प्रतिनिधियों से भी परामर्श किया गया. उसके बाद भी पब्लिक डोमेन में हमने इस शिक्षा नीति को डाल दिया. सवा दो लाख लोगों के सुझाव आए. 2 सचिवालय बनाकर इन सभी सुझावों को सम्मिलित किया गया. इस पूरे मंथन से जो अमृत निकला वही ये नई शिक्षा नीति है.'

उन्होंने कहा, 'मेरी समझ में ये नहीं आया कि लोग एक ही जगह आकर ठहर जाते है. लोगों का ही ये सुझाव आया कि प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए, अपनी क्षेत्रीय भाषा में होनी चाहिए. इस देश में 22 भाषाएं हैं. ये राज्यों की मांग भी थी. किस राज्य का ये विरोध हो सकता है कि उस राज्य के बच्चों को स्थानीय भाषा में हो.'

डॉ. रमेश पोखरियाल ने कहा, 'पहले ये होता था कि 1 से लेकर 10 तक कोई बोर्ड नहीं होगा. सबको पास कर दो. फिर ये देखने को आया कि 10वीं के बहुत सारे बच्चों को अंक ज्ञान नहीं है पढ़ नहीं पा रहा है लिख नहीं पा रहा है. बिना मूल्यांकन के बच्चों को आगे बढ़ा दिया जाता था. इसको ठीक कराने की जिम्मेदारी किसकी होगी. बच्चा पीछे तो नहीं जा सकता. संसद में तो इसपर चर्चा हो चुकी है. शिक्षा नीति की कॉपी नहीं पढ़ी लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है.'

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