School Fees Cut: कोरोना महामारी में कम हो सकती है स्कूल फीस, High Court का दरवाजा खटखटा रहे लोग

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of India) ने राजस्थान सरकार को आदेश देकर छात्रों की स्कूल फीस में कटौती (School Fees Cut) करने के लिए कहा था. अब ऑल नोएडा स्कूल पैरेंट्स असोसिएशन (All Noida School Parents Association, ANSPA) से जुड़े लोग भी इस संबंध में इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की योजना बना रहे हैं.

School Fees Cut: कोरोना महामारी में कम हो सकती है स्कूल फीस, High Court का दरवाजा खटखटा रहे लोग
लॉकडाउन में फीस कटौती का आदेश

नई दिल्ली: School Fees Cut: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of India) ने अपने एक अहम फैसले में देशभर के प्राइवेट स्कूलों को आदेश दिया है कि लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान वे छात्रों से पूरी फीस नहीं वसूल सकते हैं (School Fee Waiver). इसके साथ ही, सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा है कि फीस का भुगतान नहीं करने की स्थिति में 10वीं-12वीं के किसी भी छात्र का रिजल्ट भी नहीं रोका जाएगा और न ही उन्हें कोई परीक्षा में बैठने से रोका जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अभिभावक हाई कोर्ट (High Court) का दरवाजा खटखटाने का प्लान बना रहे हैं.

सिर्फ ट्यूशन फी देना चाहते हैं नोएडा पैरेंट्स असोसिएशन के लोग

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार (Rajasthan School News) को फीस कम (School Fees Cut) करने के संबंध में निर्णय लेने का आदेश दिया था. अब ऑल नोएडा स्कूल पैरेंट्स असोसिएशन (All Noida School Parents Association, ANSPA) से जुड़े लोग इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की योजना बना रहे हैं. उनका कहना है कि कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के दौरान वे ऑनलाइन क्लासेस के लिए सिर्फ ट्यूशन फी (Tuition Fee) देने के पक्ष में हैं.

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फीस माफ करने पर होगा विचार

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of India) ने कहा है कि जो अभिभावक फीस का भुगतान करने में आर्थिक तौर पर सक्षम नहीं हैं, उनकी फीस माफी (School Fee Waiver) पर भी स्कूलों को विचार करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि स्कूल सत्र 2020-21 के लिए वार्षिक फीस ले सकते हैं, लेकिन इसमें भी उन्हें 15 फीसदी की रियायत देनी होगी.

दरअसल, छात्रों ने स्कूलों से वे सुविधाएं नहीं ली हैं, जो वे स्कूल आने पर लेते थे. न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि स्कूल अभिभावकों से बकाया फीस 5 अगस्त से 6 किस्तों में वसूल करें और फीस नहीं देने या भुगतान में देर होने पर 10वीं और 12वीं का रिजल्ट नहीं रोका जाएगा और न ही छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोका जा सकता है.

रिजल्ट नहीं रोकने का दिया आदेश

इतना ही नहीं, अदालत ने स्कूलों से यह भी कहा है कि अगर कोई अभिभावक फीस का भुगतान करने की स्थिति में नहीं है तो स्कूल उनके मामलों पर गंभीरता से विचार करेंगे. उनके बच्चों का रिजल्ट नहीं रोका जाएगा. पीठ ने यह भी माना है कि यह आदेश आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 (Disaster Management Act 2005) के तहत नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसमें यह कहीं भी नहीं है कि सरकार महामारी की रोकथाम के लिए शुल्क और फीस या अनुबंध में कटौती करने का आदेश दे सकती है.

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान स्कूलों ने बिजली, पानी, पेट्रोल-डीजल, स्टेशनरी, रख-रखाव और खेल-कूद के सामान के पैसे बचाए हैं. यह बचत करीब 15 फीसदी के आस-पास बैठती है. ऐसे में छात्रों से इन सबका पैसा वसूलना शिक्षा को बिजनेस बनाने जैसा होगा.

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