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उत्तराखंड का यह मेडिकल कॉलेज बना साइकिल बनाने का कारखाना, जानें क्या है पूरा मामला

दरअसल, जिन पहाड़ों में चौपहिया वाहन भी हिचकोले खाते हुए चलते हैं, वहां इन दिनों श्रमिकों, मजदूरों व मनरेगा कार्ड धारकों को साइकिल दी जा रही है.

उत्तराखंड का यह मेडिकल कॉलेज बना साइकिल बनाने का कारखाना, जानें क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली: आपने कम्पनी में पुर्जे बनते देखे होंगे. ITI, IIT और पॉलिटेक्निक जैसे टेक्निकल एजुकेशन वाले कॉलेजों में छात्रों को मशीनी पुर्जे जोड़ते हुए देखा होगा, लेकिन, मेडिकल कॉलेज में साइकिल बनते नहीं देखा होगा. अगर आपको मेडिकल कॉलेज में छात्र साइकिल के कल-पुर्जे जोड़ते दिख जाएं तो आप कॉलेज की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं. गढ़वाल के एकमात्र मेडिकल कॉलेज वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज की हालत बेहद गंभीर है. यहां कॉलेज के मेन बिल्डिंग में साइकिल बनाई और वितरित की जाती है. डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज में इन दिनों श्रम विभाग द्वारा साइकिल वितरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है. मेडिकल कॉलेज की बदहाल व्यवस्था बताने से पहले श्रम विभाग की इस योजना के बारे में थोड़ी जानकारी हासिल करते हैं.

दरअसल, जिन पहाड़ों में चौपहिया वाहन भी हिचकोले खाते हुए चलते हैं, वहां इन दिनों श्रमिकों, मजदूरों व मनरेगा कार्ड धारकों को साइकिल दी जा रही है. पौड़ी जनपद में 500 साइकिलें वितरित की जानी हैं, जिसके लिए श्रीनगर के मेडिकल कॉलेज में बैस कैंप बनाकर यूपी की लोकल नीलम नाम की कम्पनी साइकिल के पुर्जे जोड़ने का काम कर रही है और श्रम विभाग यहां से साइकिल असेंबल कर वितरित कर रहा है.

मेडिकल कॉलेज में 70 फीसदी नर्सिंग स्टॉफ की कमी है. वहीं 45 फीसदी डाक्टरों की कमी यहां बनी हुई है. नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है. नये एमबीबीएस के छात्र कॉलेज में प्रवेश ले रहे है. वहीं, स्टाफ की व्यवस्था कराने के बजाय कॉलेज ने श्रम विभाग की साइकिलों को बनाने के लिए पूरा एक भवन विभाग को दे दिया. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने बताया कि हॉस्पिटल में 42 डॉक्टर की कमी है और 100 से ज्यादा अन्य स्टाफ की कमी है, और साइकिल बनाने की अनुमति तात्कालिक तौर पर दी गई है.