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अजब है महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019! विपक्ष की धार है कुंद तो सत्तापक्ष भर रहा फर्राटे

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में विपक्ष सरकार को घेरने में नाकाम साबित होती दिख रही है. कांग्रेस और एनसीपी जैसे मुख्य विपक्षी दल देवेंद्र फडणवीस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है लेकिन, कोई ठोस सबूत नहीं दे पाने के चलते आरोप जनता के बीच प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं. 

अजब है महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019! विपक्ष की धार है कुंद तो सत्तापक्ष भर रहा फर्राटे
Maharashtra Assembly Elections 2019 में विपक्ष सत्तापक्ष पर आरोप लगाने में पूरी तरह फेल साबित हो रही है.

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly Elections 2019) में विपक्ष सरकार को घेरने में नाकाम साबित होती दिख रही है. कांग्रेस (Congress) और एनसीपी (NCP) जैसे मुख्य विपक्षी दल देवेंद्र फडणवीस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है लेकिन, कोई ठोस सबूत नहीं दे पाने के चलते आरोप जनता के बीच प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं. विपक्ष के आरोपों पर बीजेपी (BJP)+शिवसेना की सरकार जनता को समझाने में सफल होती दिख रही है कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कारगार कदम उठाए हैं. बीजेपी (BJP) के कई नेताओं पर विपक्ष के जरिए आरोप लागाने पर मंत्रालय के कार्यभार से मुक्त कर जांच भी कराया है. साल 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान कई नेताओं को उम्मीदवारी भी नहीं देने के पीछे विपक्ष का आरोप भी अहम कारण बना.

विपक्ष के आरोप पर सरकार की दलील

  • भ्रष्टाचार के मुद्दे पर देवेंद्र फडणवीस सरकार जीरो टॉलरेंस रवैया रखती है.
  • बीजेपी (BJP) भ्रष्टाचार मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के एजेंडे पर काम कर रही है.
  • प्रचार के दौरान बीजेपी (BJP) गिना रही है कि इस सरकार ने कांग्रेस (Congress) और एनसीपी (NCP) के कई नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुकदमें दर्ज किए हैं.
  • फडणवीस सरकार बता रही है कि उनके राज में कई नेताओं को जेल में डाला गया है.

शरद पवार के भतीजे अजित पवार पर शिकंजा
साल 2014 में महाराष्ट्र का शासन बीजेपी (BJP) के हाथों में आते ही पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (NCP) प्रमुख के भतीजे अजित पवार के खिलाफ सिंचाई घोटालों की फेहरिस्त खोल दी. केवल उपमुख्यमंत्री अजित पवार ही नहीं, सार्वजनिक निर्माण विभाग के तत्कालीन मंत्री छगन भुजबल और जल संसाधन मेत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. सार्वजनिक निर्माण विभाग के मंत्री छगन भुजबल पर महाराष्ट्र सदन के निर्माण के दौरान तकरीबन 900 करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार के मामले में 443 करोड़ की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्डरिंग मामले के तहत जब्त किया.

अजित पवार और जल संसाधान मंत्री पर सिंचाई घोटाले के आरोप लगे, जिन परियोजनाओं को लेकर आरोप लगा उनमें मुख्य रूप से-:

1. कोंकण सिंचाई परियोजना.

2. विदर्भ सिंचाई परियोजना.

3. बालगंगा सिंचाई परियोजना

इनकी जांच में तकरीबन 30000 पन्नों की रिपोर्ट एंटी करप्शन विभाग की तरफ से पेश की गई. हालांकि इन मामलों में सीधे-सीधे उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और जल संसाधान मेत्री सुनील तटकरे के जुड़े होने के तथ्य सामने नहीं आए हैं, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है. सत्ता में आने के साथ बीजेपी (BJP) ने इसकी जांच और त्वरित तरीके से किया. इन परियोजना से जुडे कांन्ट्रेक्टर और बालगंगा परियोजना से जुड़े इंजीनियर का विश्व भ्रमन करने औऱ सैकड़ों करोड़ रुपए रिश्वत लेकर पानी की तरह बहाने के कई मामलों का खुलासा सरकार ने अपनी जांच में किया. सार्वजिक निर्माण में तत्कलीन मंत्री छगन भुजबल और सांसद भजीते पर महाराष्ट्र सदन के भ्रष्टाचार का मामला भी एनसीपी (NCP) कांग्रेस (Congress) सरकार के लिए एक काला धब्बा साबित हुई थी.

दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण के लिए 900 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार सामने आया था. निर्माण के लिए दिए टेंडर के बदले कांट्रेक्टर से लाभ लेने के मामले में छगन भूजबल और भतीजे समीर भुजबल फंसे हैं. मामला 2015 में दर्ज हुआ और 2016 में गिरफ्तारी भी प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से की गई.

सत्ता में आने के साथ ही देवेंद्र फडणवीस सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना रुख साफ रख कर कार्रवाई शुरू कर दी थी, जो अपने विधान मंडल के मंत्रियों के खिलाफ मिले आरोपों तक बरकरार रखा है.

महाराष्ट्र सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री आशीष शेलार ने कहा, 'हमारी सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस पर काम किया है. विपक्ष के पास ऐसा कोई मुद्दा नहीं है. हमने कई नेताओं को टिकट नहीं दिये इसका फैसला पार्लियामेन्ट्री बोर्ड का है. प्रकाश मेहता और एकनाथ खड़से के मामले से पार्टी हर नेता और कार्यकर्ताओं को सीख लेनी चाहिए.

सत्ता में आने के बाद बीजेपी (BJP) और शिव सेना के मंत्रियों के खिलाफ भी आरोप लगे किसी को पद से मुक्त किया गया तो किसी को विधान सभा चुनाव से में उम्मीदवारी से मुक्त किया. बीजेपी (BJP) के मंत्रियो के लिस्ट में पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से पर तीन एकड़ औद्योगिक जमीन अपनी पत्नी और दामाद के नाम पर खरीदने के आरोप लगे. पद से मुक्त तो किया ही गया साल 2019 के चुनाव में पार्टी की तरफ से उम्मीदवार भी नहीं बनाया गया.

शिव सेना नेता और उद्योग मंत्री सुभाष देसाई पर औद्योगिक एरिया में फेरबदल कर निजी बिल्डर को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा, जिसके खिलाफ सरकार ने खुद जांच बिठाई. पूर्व गृह निर्माण मंत्री प्रकाश मेहता पर एमपी मिल की जमीन को किसी निजी बिल्डर को फायदा पहुंचाने के आरोप में तुरंत जांच के साथ पद से मुक्त किया गया और साल 2019 के चुनाव की उम्मीदवारी भी हटाई गई.

उच्च और तकनीकि शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े को उम्मीदवारी से इसलिए हाथ धोना पड़ा क्यों कि उनपर आरोप लगे कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान स्कूली शिक्षा की जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभा पाए. सरकार ने अपने मंत्रियों के खिलाफ कोई रियायत ना बरतते हुए ठोस कदम उठाए. अब विपक्ष जो कभी बीजेपी (BJP) शिवसेना सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने की कोशिश करती थी. उसके पास ये मुद्दा ही नहीं बचा है, लेकिन सरकार को नाकाम घोषित करने के लिए अलग-अलग तर्क जरूर देने की कोशिश कर रही है.

एनसीपी (NCP) नेता और राज्यसभा सांसद माजिद मेमन ने कहा, 'सरकार पूरी तरह अक्षम है, किसानों को मुआवजे नहीं मिल रहे, नौकरिजां जा रही हैं. लोग मुफलिसी से जी रहे हैं इसकी जड़ क्या है. इसकी जड़ में जाने पर सरकार की पोल खुल जाएगी.

चुनाव के दौरान सत्ताधारी दल पर भ्रष्टाचार के आरोप हमेशा से विपक्ष लगाने की को कोशिश करती रही है, लेकिन इस चुनाव में ये पहला मौका है जब सरकार की धारा 370, देश हित में किया गया रक्षा सौदा, किसानों के मुद्दे पर सरकार के किए काम को कम बताते हुए विपक्ष चुनावी मैदान में चिल्लाने की कोशिश कर रही है. ये नतीजे ही बता सकेंगे कि विपक्ष की चिल्लाहट काम आती है या सरकार का भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस रणनीति के जरिए किया गया काम.