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क्या सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं शरद पवार? दाऊद से रिश्ते के आरोपों पर भी नहीं हुआ था बड़ा नुकसान

एमएससीबी बैंक घोटाला केस मेँ शरद पवार (Sharad Pawar) के खिलाफ FIR के बाद उनके भतीजे अजित पवार समेत कई एनसीपी नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसने के बाद पार्टी की हालत खस्ता होती दिख रही है. 

क्या सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं शरद पवार? दाऊद से रिश्ते के आरोपों पर भी नहीं हुआ था बड़ा नुकसान
शरद पवार भारतीय राजनीति के कद्दावर नेता माने जाते हैं.

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly Elections 2019) का ऐलान होने के साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सुप्रीमो शरद पवार (Sharad Pawar) पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा कसता जा रहा है. एमएससीबी बैंक घोटाला केस मेँ शरद पवार (Sharad Pawar) के खिलाफ FIR के बाद उनके भतीजे अजित पवार समेत कई एनसीपी नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसने के बाद पार्टी की हालत खस्ता होती दिख रही है. महाराष्ट्र की सियासत जबरदस्त करवटें बदल रही है. सूबे के मुख्यमंत्री से लेकर देश के रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री रह चुके एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार (Sharad Pawar) पर जांच की आंच आ गई है.

ये पहली बार हुआ है जब शरद पवार (Sharad Pawar) पर कानूनी शिकंजा कसा है. एमएससीबी बैंक घोटाले मेँ विधानसभा चुनाव से ऐन पहले एनसीपी नेताओं पर कसता शिकंजा पार्टी की नैय्या डुबो सकता है. बीजेपी के नेता डॉक्टरकिरीट सोमैया ने कहा कि एनसीपी को ये दिन तो देखना ही था. इस बैंक घोटाले के बाद एनसीपी का जहाज तो डूबना ही था. किरीट सोमैया ने कहा, 'ये घोटाले की जांच अदालत के आदेश पर शुरू हुई है और शिकंजा कसेगा तो पार्टी का जहाज तो डूबेगा ही.'

पश्चिमी महाराष्ट्र में पावरफुल माने जाते हैं पवार
शरद पवार (Sharad Pawar) की महाराष्ट्र की राजनीति इस मोड़ पर आई कैसे? क्या है वह मामला जिसमें आया है शरद पवार (Sharad Pawar) का नाम? और इसका अक्टूबर के चुनावी संग्राम पर क्या असर पड सकता है. इस सबसे पर्ददा उठेगा, लेकिन पहले ये देख लीजिए कि शरद पवार (Sharad Pawar) का क्या कहना है. इस पूरे मसले पर शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा, 'मैं खुद ही ईडी जा रहा हूं. मैं दिल्ली के दबाव के आगे झुकने वाला नहीं हूं.'

चीनी मिलों और सहकारिता समितियों के सहारे महाराष्ट्र की राजनीति का अखाड़ा सजता है. शरद पवार (Sharad Pawar) की एनसीपी को सियासी ताकत पश्चिमी महाराष्ट्र में पिछले विधानसभा चुनाव में कुल 58 सीटों में से बीजेपी को 19 और एऩसीपी को 16 सीटें मिलीं थी. इस गढ मेँ सेँध लगानी है तो बीजेपी को 122 के आंकड़े से आगे बढ़ना है तो पश्चिम महाराष्ट्र में कमल को और ज्यादा खिलाना होगा. पार्टी भी ये जानती है और हाल ही में पश्चिमी महाराष्ट्र के मराठा बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटिल को पार्टी ने सूबे की कमान प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर थमाई है. इलाके की राजनीति समझने वाले पूछ रहे हैं कि कहीं शरद पवार (Sharad Pawar) पर केस कर सहकारिता के पावरफुल लोगों को पावर का डर तो नहीं दिखाया जा रहा? बैँक घोटाले से पवार का पावर खत्म तो नहीं हो जायेगा. 

वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र परांजपे के मुताबिक पवार पर नई आफत उनके सियासी कद को जरूर बौना कर देगी. एनसीपी का जहाज मजधार मेँ फंस सकता है. शैलेंद्र परांजपे ने कहा, 'पवार पर मुकदमा होने से पार्टी की छवि खराब होना तय है. पार्टी को इसका नुकसान भी हो सकता है.'

किस बैंक घोटाले में फंसे हैं पवार?
महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव घोटाला 2009 से 2011 के बीच में हुआ था. उस वक्त महाराष्ट्र और केंद्र में एनसीपी सत्ता में थी. आरोपों के मुताबिक महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर ने बैंकिंग और आरबीआई के नियमों का उल्लंघन कर अपने करीबियों को करोड़ों रुपए लोन के रूप में बांटे गए. घोटाला करीब 25 हज़ार करोड़ का बताया जा रहा है. अजित पवार जो उस वक्त महाराष्ट्र के वित्त मंत्री थे और MSCB बैंक के डायरेक्टर भी थे.

आरोप है कि शरद पवार (Sharad Pawar) एनसीपी के प्रमुख हैं और ये सब उनके कहने पर किया गया. 2014 में पृथ्वीराज चव्हाण जब कांग्रेस-एनसीपी सरकार में सीएम थे तब उन्हें महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक में हो रही अनियमिता का पता चला. बैंक की डायरेक्टर बॉडी बर्खास्त की गई. 5 साल बाद अब एक याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश दिए और अब एफआईआर दर्ज हो गई है.

दाऊद प्रकरण में भी आरोप झेल चुके हैं पवार
ऐसा पहली बार हुआ है जब एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार (Sharad Pawar) पर कोई बड़ा नामजद केस दर्ज हुआ है. इससे पहले पवार का नाम लेकर विपक्षी पार्टियों ने कई घपले और घोटाले में नाम उछाला, लेकिन कोई सुबूत सामने नहीं आया और ना ही केस दर्ज हुए.

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और शरद पवार (Sharad Pawar) का नाम भी उछल चुका है. सूबे की राजनीति में इसकी शुरुआत पूर्व उप मुख्यमंत्री दिवंगत गोपीनाथ मुंडे ने की थी. दाऊद इब्राहीम और शरद पवार (Sharad Pawar) के बीच कथित केमिस्ट्री  का सनसनीखेज आरोप लगाकर बीजेपी के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे ने साल 1993 मुंबई धमाके के बाद सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया था.

मशहूर वकील और पूर्व कानून मंत्री दिवंगत राम जेठमलानी ने भी सियासत में ये कहकर भूचाल ला दिया था कि महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहते हुए शरद पवार (Sharad Pawar) से कहा था कि दाऊद इब्राहिम सरेंडर करना चाहता है. जेठमलानी की दलील थी कि तब शरद पवार (Sharad Pawar) ने दाऊद के सरेंडर करने पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया था. 

एनसीपी ने मुंडे के आरोपों को बेबुनियाद बताया था. साथ ही जेठमलानी के आरोपों पर शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा था दाऊद इब्राहिम अपनी शर्तों पर सरेंडर करना चाहता था. उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल में रहना पसंद नहीं था. वह अपने घर पर ही नजरबंद होकर सरकार के सामने शर्त रख रहा था. लिहाज़ा सरकार ने दाऊद की शर्तें नहीं मानी थी. हालांकि कोई सबूत नहीं सामने आया और पवार का पावर महाराष्ट्र समेत देश की सियासत में बरकरार रहा.

एनसीपी नेता नवाब मलिक की दलील है कि राजनीतिक नफे नुकसान की वजहों से पवार पर ईडी शिकंजा कसा जा रहा है. हालांकि पार्टी नेता बेदाग साबित होँगे. नवाब मलिक ने कहा, 'हम ईडी के सामने खुद जा रहे हैं. हमारी पार्टी झुकने वाली नहीं है. शरद पवार (Sharad Pawar) की राजनीति इस मजधार में फंसी है जिसमें से निकलना बेहद मुश्किल है.