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महाराष्ट्र चुनाव 2019: शिवसेना प्रत्याशी प्रदीप शर्मा ने अपने चुनाव क्षेत्र में लिया घर

मुंबई पुलिस में रहते हुए उन्होंने कई खूंखार अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया. चुनाव के मैदान में उतरने के बाद विरोधी उनपर बाहरी होने का आरोप लगा रहे हैं, जिसका जवाब देने के लिए प्रदीप शर्मा ने अपने चुनाव क्षेत्र में नया घर लिया है.

महाराष्ट्र चुनाव 2019: शिवसेना प्रत्याशी प्रदीप शर्मा ने अपने चुनाव क्षेत्र में लिया घर
नालासोपारा विधानसभा सीट से शिवसेना प्रत्याशी प्रदीप शर्मा .

मुंबई: महाराष्ट्र पुलिस में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रहे पुलिस ऑफिसर प्रदीप शर्मा इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly Elections 2019) में भाग्य आजमा रहे हैं. प्रदीप शर्मा को शिवसेना ने नालासोपारा विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है. प्रदीप शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन उनकी कर्मभूमि महाराष्ट्र है. करीब 25 साल तक प्रदीप ने पुलिस की नौकरी करते हुए महाराष्ट्र के लोगों की सेवा की. मुंबई पुलिस में रहते हुए उन्होंने कई खूंखार अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया. चुनाव के मैदान में उतरने के बाद विरोधी उनपर बाहरी होने का आरोप लगा रहे हैं, जिसका जवाब देने के लिए प्रदीप शर्मा ने अपने चुनाव क्षेत्र में नया घर लिया है.

प्रदीप शर्मा की बहादुरी, ईमानदारी और अपने फर्ज के प्रति उनकी वफादारी की महाराष्ट्र की मीडिया में चर्चा आम रही है. इन सारी उपलब्धियों के बावजूद प्रदीप को इस बात का अहसास है की वे राजनीति में अपनी पहली पारी खेल रहे हैं. उन्हें नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ेगी और लोगों को उनके प्रति अपनी प्रतिबद्धिता का विश्वास दिलाने के लिए कुछ 'एक्स्ट्रा' करना पड़ेगा.

किसी समय 150 से अधिक खूंखार अपराधियों और आतंकियों को मार गिराने के लिए टाइम पत्रिका के मुख पृष्ठ पर दर्ज हुए शर्मा ने मध्य जुलाई में महाराष्ट्र पुलिस से इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफे के वक्त शर्मा ठाणे फिरौती रोधी प्रकोष्ठ (एईसी) के प्रमुख थे, जो उनके नेतृत्व में पिछले दो सालों से हाई प्रोफाइल हो गया था.

किसी समय अंडरवर्ल्ड के दहशत बने और आम जनता के बीच एनकाउंटर विशेषज्ञ के रूप में लोकप्रिय शर्मा ने 1990 के दशक के अन्य प्रमुख एनकाउंटर विशेषज्ञों जैसे विजय सालस्कर, प्रफुल्ल भोसले, अरुण बोरुडे, असलम मोमिन, राजू पिल्लै, रविंद्र आंग्रे और दया नायक के साथ मिलकर शहर को संगठित अपराधियों से साफ करने में मदद की थी. इनमें से कई बंदूकबाज तत्कालीन डीजीपी अरविंद इनामदार द्वारा प्रशिक्षित थे, वे अत्याधुनिक हथियार रखते थे और अक्सर एनकाउंटर कीलिंग के लिए सुर्खियां बनते थे.