पहले नहीं देखा होगा सूफी गायक बाबू साहेब का ऐसा परफॉर्मेंस, VIDEO देख खुश हो जाएगा दिल

बाबू साहेब का एक नाम प्रेम सागर सिंह भी है जो पूर्व में प्रेम सागर सिंह के नाम से भोजपुरी के प्रसिद्ध गायक रह चुके हैं, अब सूफी पारी इन्होंने बाबूसाहेब के नाम से शुरू किया है.

पहले नहीं देखा होगा सूफी गायक बाबू साहेब का ऐसा परफॉर्मेंस, VIDEO देख खुश हो जाएगा दिल
बाबू साहेब पूरब की सांस्कृतिक सुगंध को समेटकर अंतस में सांगीतिक मिठास भरने का एक अनूठा प्रयास करते हैं. (फोटो साभार- वीडियो ग्रैब, यूट्यूब)

नई दिल्ली: कहते हैं सूफी संगीत की रवायत बहुत पुरानी है. कहा तो यह भी जाता है कि इसके जरिया खुदा से रूबरू होने का भी कलाम पेश किया जाता है. हजरत निजामुद्दीन ओलिया की हकीकत में अमीर खुसरो ने जितने भी बंद लिखे, वे सब सूफी संगीत की विरासत बन गए. मूलतः बिहार के आरा के रहने वाले बाबू साहेब दिल्ली और मुंबई के श्रोताओं को अपने सूफी गायन के माध्यम से पूरब की सांस्कृतिक सुगंध को समेटकर अंतस में सांगीतिक मिठास भरने का एक अनूठा प्रयास करते हैं, जो दर्शकों और श्रोताओं को अनाहत में प्रवेश करा कर प्राकृतिक की सूक्ष्म तत्व से मिलवाकर एक अद्भुत मानसिक शांति प्रदान करता है. 

मंत्रमुग्ध हुए सभी लोग
पिछले दिनों दिल्ली के कनॉट प्लेस के रीगल बिल्डिंग का एटिक सभागार गवाह बना उनके लिखे स्वरबद्ध और गाए लगभग एक दर्जन गीतों का जिन्हें उन्होंने बेहतरीन रागों और तालों निबद्ध किया था. नील नदी के पार बसे हैं सैंयाजी, रे मांझी पार लगा दे, मुझको कैसा रोग लगा है, इस पल भी मोहे चैन ना आवे, सजग रहो री भोली चिरैया, किसे ढूंढ रही है तू जो तेरे अंदर बैठा है, बड़ा निर्मोही है रे मोरा सजनवा, पातर हो ही गए मोरे नयनवा जैसे गीतों पर सभी श्रोतागण मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह पाए. 

की-बोर्ड पर बुलेट तबले पर मुकेश मधुकर कि संगत तथा संचालन आनंदी सागर ने किया. सोनू भारद्वाज और सुनील ने गायन सहयोग और प्रिंस एवं रीटा सागर ने सुंदर समन्वय किया. बता दें, बाबू साहेब का एक नाम प्रेम सागर सिंह भी है जो पूर्व में प्रेम सागर सिंह के नाम से भोजपुरी के प्रसिद्ध गायक रह चुके हैं, अब सूफी पारी इन्होंने बाबूसाहेब के नाम से शुरू किया है. भोजपुरी मैं लगभग 400 गाने इन्होंने लिखा और गया भी है.

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