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EXCLUSIVE: लोकसभा चुनाव हारने के बाद निरहुआ ने कहा- 'हम अपने उद्देश्य में कामयाब हुए'

Zee Digital Hindi से खास बातचीत करते हुए निरहुआ ने बताया कि वह भले ही लोकसभा का चुनाव हार गए हों, लेकिन वह अपने उद्देश्य में कामयाब हुए हैं, क्योंकि वह पीएम मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते थे और वही हुआ है कि पीएम मोदी एक बार फिर से देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. 

EXCLUSIVE: लोकसभा चुनाव हारने के बाद निरहुआ ने कहा- 'हम अपने उद्देश्य में कामयाब हुए'
आजमगढ़ के लोगों को निराश नहीं करेंगे निरहुआ (फोटो साभारः फेसबुक, निरहुआ)

नई दिल्ली: इस बार लोकसभा चुनाव 2019 में आजमगढ़ सीट पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा प्रत्याशी दिनेशलाल यादव 'निरहुआ' को 2 लाख 59 हजार वोटों से हरा दिया है. भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार निरहुआ और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच आजमगढ़ सीट पर मुकाबला काफी रोचक रहा. निरहुआ की पॉपुलैरिटी को बीजेपी ने यूपी में भुनाने की कोशिश तो की, लेकिन वह कामयाब नहीं रही. मुस्लिम और यादव समुदाय का वोट इस सीट पर निर्णायक साबित हुआ और उन्होंने वहां के जाने-माने नेता अखिलेश यादव को जीत का ताज पहनाया. 

आजमगढ़ के लोगों को निराश नहीं करेंगे निरहुआ
वहीं, Zee Digital Hindi से खास बातचीत करते हुए निरहुआ ने बताया कि वह भले ही लोकसभा का चुनाव हार गए हों, लेकिन वह अपने उद्देश्य में कामयाब हुए हैं, क्योंकि वह पीएम मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते थे और वही हुआ है कि पीएम मोदी एक बार फिर से देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हार के बाद भी आने वाले 5 सालों में आजमगढ़ में उनकी सक्रियता इतनी हो कि उतना अखिलेश यादव जीत के बाद भी नहीं कर कर पाएंगे. निरहुआ ने कहा कि आजमगढ़ की 3 लाख 60 हजार लोगों ने जो मुझे मत दिया है, वह उन लोगों को निराश नहीं करेंगे. इस बात के लिए उन्होंने लोगों से वादा किया है.

निरहुआ इस चीज को अपनी जीत मानते हैं
निरहुआ ने कहा, 'हमारी सरकार बन गई यानी हम जीत गए, क्योंकि यही हमारी जीत है. मैं यहां सांसद बनने नहीं आया था, क्योंकि मुझे सांसद बनने का कोई लालच नहीं था. मेरा उद्देय़ बहुत बड़ा है. मैं इस उद्देश्य से यहां आया हूं कि वंशवाद है, जातिवाद है, वो लोकतंत्र में नहीं होना चाहिए. वो हमारे देश के लिए जहर है. उसका खात्मा होना चाहिए और राष्ट्रवाद के बारे में लोगों को सोचना चाहिए कि सबसे ऊपर हमारा देश होना चाहिए. तो इसमें कहीं न कहीं हम कामयाब हुए हैं और प्रचंड बहुमद से हमारी सरकार बनी है. तो मैं मानता हूं कि हार तो गठबंधन की हुई है.' 

मुलायम सिंह से 22 हजार वोट ज्यादा मिले
आगे बात करते हुए उन्होंने बताया कि पिछली बार चुनाव में इस सीट से मुलायम सिंह यादव लगभग 3 लाख 40 हजार वोट्स से जीते थे, और इस बार निरहुआ को मुलायम सिंह से 22 हजार वोट ज्यादा मिले हैं. बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव विजयी हुए थे. उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार रमांकात यादव को हराया था. मुलायम सिंह इस बार मैनपुरी से चुनाव लड़े जबकि रमाकांत यादव कांग्रेस के टिकट पर भदोही से चुनाव मैदान में थे. मैनपुरी लोकसभा सीट पर आमने-सामने के मुकाबले में सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने लगातार पांचवी बार जीत हासिल की.

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