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49 हस्तियों के आरोप के जवाब में कंगना रनौत समेत 62 बड़ी हस्तियों का खुला खत

इससे पहले 49 बड़ी हस्तियों ने पीएम मोदी को ओपन लेटर लिख कर कहा था कि सिर्फ पार्लियामेंट में मॉब लिंचिंग की निंदा करने से काम नहीं चलेगा. 

49 हस्तियों के आरोप के जवाब में कंगना रनौत समेत 62 बड़ी हस्तियों का खुला खत
49 बुद्धिजीवियों के चुनिंदा आक्रोश और झूठी सोच के खिलाफ 61 हस्तियों ने लिखी खुली चिट्ठी.

नई दिल्ली: बॉलीवुड से लेकर टॉलीवुड तक की 49 बड़ी हस्तियों ने हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी को ओपन लेटर लिखा था, जिसमें सेलेब्स ने पीएम मोदी से डिमांड की थी कि वो देश में राम के नाम पर हो रहे क्राइम को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं. अब इस मुद्दे ने नया मोड़ ले लिया है. अब कंगना रनौत, प्रसून जोशी, सोनल मानसिंह और मधुर भंडारकर सहीत 62 हस्तियों ने उन 49 बुद्धिजीवियों के चुनिंदा आक्रोश और झूठी सोच के खिलाफ खुली चिट्ठी लिखी है, जिसमें कहा गया है कि 49 लोगों ने लोकतंत्र को बदनाम किया है. इनके झूठे आरोपों से लोकतंत्र बदनाम हुआ है. 

क्या कहना है कंगना रनौत का?
इस मामले में कंगना ने कहा, 'कुछ लोग झूठी कथा उत्पन्न करने के लिए अपनी शक्ति और पद का दुरुपयोग कर रहे हैं, जो कि वर्तमान सरकार के तहत गलत हो रही है, जबकि इस राष्ट्र में पहली बार चीजें सही दिशा में जा रही हैं. हम एक प्रमुख बदलाव का एक हिस्सा हैं. इस देश की बेहतरी के लिए चीजें बदल रही हैं और इस पर कुछ लोगों का गुस्सा है. आम लोगों ने अपने प्रतिनिधियों और नेताओं को चुना है, जो लोग उनकी इच्छा की अवहेलना करते हैं, वे लोकतंत्र के लिए कोई सम्मान या विचार नहीं रखते हैं'. 

बता दें, इससे पहले 49 बड़ी हस्तियों ने पीएम मोदी को ओपन लेटर लिख कर कहा था कि सिर्फ पार्लियामेंट में मॉब लिंचिंग की निंदा करने से काम नहीं चलेगा. इसके खिलाफ क्या एक्शन लिया जा रहा है? वो बताइए. सेलेब्स ने कहा कि हमें लगता है कि ऐसे किसी भी क्राइम की बेल नहीं होनी चाहिए और ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए. ऐसी हत्या करने वालों को बना पैरोल के आजीवन करावास की सजा सुनाई जानी चाहिए.  

देश में लगातार बढ़ रही लिंचिंग की घटनाओं से लोगों के बीच गुस्सा और आक्रोश है. राम के नाम पर बढ़ रहे इस अपराध से देश का एक वर्ग खौफजदा है. साल 2009 से अक्टूबर 2018 तक देश में लगभग 254 धर्म के नाम पर नफरत पैदा करने वालीं क्राइम की घटनाएं हो चुकी हैं. वहीं साल 2016 में 840 क्राइम की घटनाएं सिर्फ दलितों के साथ रिपोर्ट की गई हैं. ये आकंड़े चिट्ठी में लिखकर पीएम को अर्जी दी गई थी कि बढ़ते क्राइम को रोकने के लिए वो कोई ठोस कदम उठाएं. 

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