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90 साल की हुईं लता मंगेशकर: ऐसा रहा स्कूल छोड़ने से लेकर सिंगर बनने तक का सफर

स्वर कोकिला लता मंगेशकर को दीदी की उपाधी ऐसे ही नहीं मिली, घर में 4 भाई बहनों में सबसे बड़ी लता को बचपन से ही सबसे ज्यादा प्यार अपने छोटे भाई बहनों से रहा.

90 साल की हुईं लता मंगेशकर: ऐसा रहा स्कूल छोड़ने से लेकर सिंगर बनने तक का सफर
लता मंगेशकर जन्म 28 सितंबर 1929 में मध्य प्रदेश के इंदोर में हुआ था (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. लोकप्रिय गायिका लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) आज अपना 90वां जन्मदिन मना रही हैं. उनका जन्म 28 सितंबर 1929 में मध्य प्रदेश के इंदोर में हुआ था. लता मंगेशकर एक ऐसा नाम जो संगीत और सादगी का पर्याय है. सुरीली आवाज के साथ अपने आसपास सबको बड़ी बहन सा प्यार देने वालीं लता मंगेशकर कब लता दीदी बन गईं यह बात शायद ही किसी को याद हो. आज इस महान व्यक्तित्व को लोग जीते जी भी देवी देवताओं की तरह पूजते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लता मंगेशकर कुछ ही दिन स्कूल में पढ़ाई की और 5 साल की उम्र में ही एक दिन अचानक स्कूल जाना पूरे से त्याग दिया. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लता ने पूरी पढ़ाई अपने घर से की. वह स्कूल से एक कक्षा भी पूरी नहीं पढ़ी. 

भाई बहनों में सबसे बड़ी हैं लता 
स्वर कोकिला लता मंगेशकर को दीदी की उपाधी ऐसे ही नहीं मिली, घर में 4 भाई बहनों में सबसे बड़ी लता को बचपन से ही सबसे ज्यादा प्यार अपने छोटे भाई बहनों से रहा. फिर उनके अंदर की बहन वाली ममता के कारण वह एक दिन पूरे बॉलीवुड और संगीत की दुनिया की दीदी बन गई. लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि उनकी यही बहन वाली ममता उनके लिए ऐसी परेशानी बनी कि फिर लता ने कभी स्कूल की तरफ पलटकर नहीं देखा.

स्कूल छोड़ने की वजह
यह बात तो लता मंगेशकर ने कभी नहीं बताई लेकिन उनकी छोटी बहन आशा भोंसले ने लता के स्कूल छूटने का किस्सा सुनाया था. Zee TV के मशहूर शो 'सारेगामापा लिटिल चेंप 5' में अपने बचपन का यह पूरा किस्सा सुनाया था. आशा ताई ने बताया था, 'जब कोल्हापुर के आगे सांगली में 5 साल की उम्र में दीदी स्कूल जाती थीं, तो मैं भी उनका हाथ पकड़ के उनके साथ स्कूल चली जाती थी. मैं बहुत छोटी सी थी. मैं उसे छोड़ती नहीं थी एक पल भी. स्कूल में बिछे दरीचे पर मैं भी दीदी के पास बैठ जाती थी.' 

ऐसा था लता दीदी का प्यार
उन्होंने आगे बताया था कि 8 दिन के बाद मास्टर ने कहा, 'एक लड़की की फीस में दो लड़कियां बैठेंगी क्या, जाओ इसे घर छोड़कर आओ' आशा ने बताया कि बस इसी बात पर दोनों बहनें रोते हुए घर लौटीं, और इसके बाद कभी स्कूल नहीं गईं. यह किस्सा सुनाते हुए आशा भौंसले अपने बचपन की यादों में खो गई थीं और बड़ी बहन का प्यार याद करके भावुक हो गई थीं. उन्होंने कहा था कि 'हम एक ही हाथ की उंगलियों जैसे हैं, कभी अलग हो भी जाएं तो मुश्किल समय में मुट्ठी बनकर एक दूसरे के साथ जुड़ जाते हैं.  

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