close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

लाल किले पर क्रिकेट खेला करते थे अक्षय कुमार और...

सरकार द्वारा शुरू किए गए खेलो इंडिया पर बात करते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि इसे काफी पहले ही शुरू किया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि वह सरकार के इस प्रोग्राम से काफी इंप्रेस हैं

लाल किले पर क्रिकेट खेला करते थे अक्षय कुमार और...

नई दिल्ली: बॉलीवुड में फिल्म 'खिलाड़ी' से डेब्यू करने वाले एक्टर अक्षय कुमार खेलों के लिए अपनी रुचि के कारण जाने जाते हैं. वह इस वक्त मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर एंड स्पोर्ट्स खेलो इंडिया प्रोग्राम के ब्रेंड एम्बेसडर हैं. हाल ही में अक्षय दिल्ली के इंद्रा गांधी स्टेडियम में पहुंचे थे. यहां उन्होंने खेलो इंडिया प्रोग्राम में बच्चों के परफॉर्मेंस को देखा. इसके बाद एक अंग्रेजी अखबार से बात करते वक्त उन्होंने अपने बचपन की याद शेयर करते हुए कहा कि वह पुरानी दिल्ली में क्रिकेट खेला करते थे. 

सरकार को पहले ही शुरू करनी चाहिए थी यह मुहीम
सरकार द्वारा शुरू किए गए खेलो इंडिया पर बात करते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि इसे काफी पहले ही शुरू किया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि वह सरकार के इस प्रोग्राम से काफी इंप्रेस हैं और यह युवाओं को अपना टेलेंट दिखाने का एक प्लेटफॉर्म दिला रहा है. इस वजह से ही वह इस मुहीम का हिस्सा बने. उन्होंने कहा, "यह बहुत समय पहले किया जाना चाहिए था. आपको कम उम्र में खिलाड़ियों का पोषण करना चाहिए और स्कूल सबसे अच्छा समय है. ऐसा तब होता है जब वो खेलना शुरू कर रहे हैं और पता चलता है कि दुनिया कैसी है. इन बच्चों को अनुभव है कि प्रतिस्पर्धात्मक जीवन कैसे आगे बढ़ रहा है. वो बड़े स्टेडियम, उत्साही भीड़, और पहली बार उनके आस-पास की चीजों का अनुभव करेंगे. मुझे लगता है कि अभी इसका प्रचार करना सबसे महत्वपूर्ण बात है."

रेड फॉर्ट के पास खेला करते थे क्रिकेट
अपनी बचपन की यादों के बारे में बात करते हुए अक्षय ने कहा, दिल्ली से जुड़ी मेरी सबसे अच्छी याद है पुरानी दिल्ली में क्रिकेट खेलना. हम लाल किले के पास क्रिकेट खेलते थे. अब तो वहां खेलना बंद कर दिया गया है. मैं और मेरे दोस्त इंडिया गेट पर क्रिकेट खेलने जाते थे. उस वक्त वहां के इलाकों में ज्यादा सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे. जब भी मैं लाल किले को देखता हूं तो मुझे उन दिनों की याद आ जाती है जब हम सकड़ों पर चौक्के और छक्के मारा करते थे. हर रविवार को एक मैच होता था जिसमें पैसे लगते थे. जीतने वाली टीम को 1100 या 1500 रुपए मिलते थे और टीम के हर सदस्य को खेलने के लिए 100 रुपए मिलते थे, जिसे सब मिल कर पुरानी दिल्ली में छोले कुल्चे खाने में खर्च किया करते थे. 

एक्टर से पहले हूं स्टंटमैन
उन्होंने आगे कहा कि वह पहले एक स्टंटमैन हैं और बाद में एक एक्टर. उन्होंने कहा कि वह इस बात को मानते हैं कि 90 के दशक में वह अपनी स्पोर्टमैन वाली इमेज की वजह से सक्सेसफुल हुए. उन्होंने आगे कहा मेरी तो पहली फिल्म ही खिलाड़ी थी. मैं आज जो भी हूं वो सिर्फ एक्टिंग की वजह से नहीं बल्कि स्पोर्ट्स की वजह से हूं. मैं पहले एक स्पोर्ट्स परसन और मार्शलआर्टिस्ट हूं और उसके बाद एक एक्टर.

बॉलीवुड की और खबरें पढ़ें