B'DAY SPECIAL: फिल्मों में काम पाने के लिए दीपक तिजोरी लगाते थे दफ्तरों के चक्कर

दीपक आज यानी 28 अगसक्त को अपना जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं और उनके बर्थडे के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें. दीपक का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था. उन्होंने अपनी पढ़ाई नरसी मुंजी कॉलेज से की.

B'DAY SPECIAL: फिल्मों में काम पाने के लिए दीपक तिजोरी लगाते थे दफ्तरों के चक्कर
28 अगस्त को होता है जन्मदिन (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: यूं तो देश में ऐसे कई लोग हैं जो रोज हीरो बनने के सपने को लेकर मुंबई पहुंचते हैं, लेकिन अपने इस सपने को पूरा नहीं कर पाते. इनमें से ही कुछ लोग ऐसे भी हैं जो हीरो बनने की चाह लेकर जाते हैं, लेकिन सपोर्टिंग एक्टर बन कर ही रह जाते हैं और कई सारी फिल्मों में अलग-अलग एक्टर्स के साथ काम करने के बाद भी उनको कोई नहीं पहचानता. आज हम आपको इसी तरह के एक सपोर्टिंग एक्टर के बारे में बताने वाले हैं. बॉलीवुड के इस एक्टर का नाम दीपक तिजोरी है. 

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एक्टिंग में थी दिलचस्पी
दरअसल, दीपक आज यानी 28 अगसक्त को अपना जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं और उनके बर्थडे के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें. दीपक का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था. उन्होंने अपनी पढ़ाई नरसी मुंजी कॉलेज से की और इसी दौरान उन्हें एक्टिंग का भी चस्का लग गया था और उन्होंने एक थिएटर ग्रुप ज्वाइन कर लिया था. इस थिएटर ग्रुप में उनके साथ आमिर खान, आशुतोष गोवारीकर, परेश रावल जैसे बड़ें कलाकार भी थे. उनके दोस्तों ने भी उनकी एक्टिंग को काफी सराहा और इस तरह उनके मन में हीरो बनने का सपना पनपने लगा और इसके बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया. 

कई दफ्तरों के लगाने पड़े चक्कर
यूं तो बॉलीवुड में किसी भी नए इंसान के लिए काम पाना या बड़ा रोल पाना आसान नहीं होता. अपने इस सफर में दीपक को कई दफ्तरों और डायरेक्टर्स के चक्कर लगाने पड़े. तिजोरी ने अपने करियर की शुरुआत 'तेरा नाम मेरा नाम' फिल्म से तो की लेकिन फिल्म में उनको हीरो का किरदार नहीं मिला वह एक सपोर्टिंग रोल में थे. इसके बाद उन्होंने 'पर्वत के उस पार', 'मैं तेरा दुश्मन' और 'क्रोध' जैसी फिल्मों में भी छोटा-मोटा रोल निभाए.

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डायरेक्शन में भी आजमाई किस्मत
एक्टिंग में अपनी किस्मत आजमाने के बाद उन्होंने डायरेक्शन में कदम रखा लेकिन यहां भी उनकी किस्मत ने उनका कुछ खास साथ नहीं दिया. 2003 में बतौर डायरेक्टर उनकी पहली फिल्म आई थी. हालांकि, यह फिल्म अपने बोल्ड कंटेंट के कारण विवादों में रही. इसके अलावा 'टॉम डिक और हैरी', 'खामोशी- खौफ की एक रात' फिल्में भी कुछ खास कमाल नहीं कर पाई. 

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