'भूमि' मूवी रिव्यू: संजय दत्त की दमदार एक्टिंग, लेकिन कमजोर कहानी

फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के आगरा की है.

'भूमि' मूवी रिव्यू: संजय दत्त की दमदार एक्टिंग, लेकिन कमजोर कहानी
शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: डायरेक्टर उमंग कुमार के निर्देशन में बनी फिल्म ‘भूमि’ 22 सितम्बर को रिलीज हो गई. इस फिल्म के जरिए संजय दत्त ने कमबैक किया है. बॉलीवुड में इस तरह की कहानी वाली फिल्में पहले भी कई बार बनाई जा चुकी हैं और इस बार भी उसी तरह की कहानी कहीं न कहीं कमजोर पड़ती दिखी.

डायरेक्टर- ओमंग कुमार
स्टार कास्ट- संजय दत्त, अदिति राव हैदरी, सिद्धांत गुप्ता, शरद केलकर, शेखर सुमन
जॉनर- एक्शन थ्रिलर
रेटिंग- 5/2 

कहानी- फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के आगरा की है. जहां अरुण सचदेव (संजय दत्त) की एक छोटी सी जूते-चप्पल की दुकान है और वह अपनी बेटी भूमि (अदिती राव हैदरी) के साथ रहता है. भूमि की मां नहीं है उसे मां और बाप दोनों का प्यार, अरुण देता है. भूमि, नीरज (सिद्धांत गुप्ता) से प्यार करती है और जल्द ही दोनों की शादी होने वाली होती है, लेकिन बगल का रहने वाला एक लड़का विशाल, भूमि से एकतरफा प्यार करता है. जो उसे हर हाल में पाना चाहता है. भूमि के न कहने बाद वह अपने दबंग चचेरे भाई धौली (शरद केलकर) के साथ मिलकर भूमि को शादी से ठीक एक रात पहले अगवा करके उसके साथ रेप करता है और उसकी हत्या करने की कोशिश करता है. अपनी बेटी भूमि को न्याय दिलाने के लिए अरुण कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाता है लेकिन क्या एक बाप को अपनी बेटी के लिए इंसाफ मिल पाएगा और क्या नीरज यह सब कुछ जानने के बाद भी भूमि को अपनाएगा? यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

डायरेक्शन- फिल्म में उमंग कुमार का डायरेक्शन काफी अच्छा है. खासकर कैमरा वर्क लेकिन अगर फिल्म की बात करें तो कहानी घिसीपिटी हुई है. बॉलीवुड में पिछले कुछ महीनों में इस तरह की ढ़ेरों फ़िल्में आ चुकी हैं. जिससे कहानी को आसानी से  बताया जा सकता है. फिल्म में कहीं सरप्राइज एलिमेंट नहीं है जो इसे बोरिंग बनाता है.

एक्टिंग- फिल्म में संजय दत्त एक पिता की भूमिका में बिल्कुल फिट दिखे. एक्टिंग भी काफी उम्दा रही. फिल्म के कुछ-कुछ डायलॉग्स से आपकी आंखें नम हो सकती हैं, लेकिन फिल्म की कहानी घिसीपिटी होने के कारण वो भी फिल्म को ढोते हुए नजर आए. वहीं अदिती को अपनी एक्टिंग और इम्प्रूव करने की जरूरत है. वहीं, शरद केलकर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वह किसी से कम नहीं. शुरू से अंत तक एक दबंग की भूमिका में वह पूरी तरह फिल्म में छाए रहे.

म्यूजिक- फिल्म का कोई भी गाना खास नहीं, जो फिल्म खत्म होने के बाद भी आपकी जुबां पर चढ़ा रहे.

देखें या नहीं– अगर आप संजय दत्त के जबरा फैन हैं तो आप एक बार इस फिल्म को जरुर देख सकते हैं.

(विवेक कुमार)

बॉलीवुड की और खबरें पढ़ें