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भूमि पेडनेकर का बड़ा बयान, बोलीं- ''कमियां बताने वाली सोसायटी में खुद से प्रेम सिखाती है 'बाला''

अब मोस्ट अवेटेड फिल्म 'बाला (Bala)' की रिलीज में कुछ ही घंटे बाकी हैं. रिलीज के पहले एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) ने अपने किरदार के बारे में खुलकर बात की है...

भूमि पेडनेकर का बड़ा बयान, बोलीं- ''कमियां बताने वाली सोसायटी में खुद से प्रेम सिखाती है 'बाला''

नई दिल्ली: अब मोस्ट अवेटेड फिल्म 'बाला (Bala)' की रिलीज में कुछ ही घंटे बाकी हैं. फिल्म 'बाला (Bala)' में एक तरफ जहां आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) समय से पहले गंजेपन की मुश्किल से जूझते हैं, वहीं भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) एक बड़ी सामाजिक रूढ़िवादिता से रोज मुखातिब होती हैं, क्योंकि वह अपनी अगली रिलीज होने वाली फिल्म बाला में गहरे (सांवले) रंग की नजर आने वाली हैं. जी न्यूज के लिए दिए खास बयान में भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) ने खुलासा किया कि, हर चीज में कोई न कोई नुक्श निकालने वाली इस जजमेंटल सोसायटी में, आत्मसम्मान और खुद से प्रेम कितना महत्वपूर्ण है, इसके बारे में ही यह फिल्म जोर-शोर से एक सोशल मैसेज देने की कोशिश कर रही है. 

भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) ने कहा, अपनी पहली फिल्म से ही मुझे एहसास हुआ कि, वास्तव में मैं जिस तरह की सिनेमा का हिस्सा बनना पसंद करती हूं, वह मनोरंजक होना चाहिए. यह मजेदार, कुछ अलग होने के साथ ही वास्तव में कुछ ऐसा होना चाहिए, जो मेरे दर्शकों को पूरी तरह एक भावनात्मक सफर पर ले जाए साथ ही साथ उन्हें इस विषय पर सोचने को मजबूर कर दे. 'बाला (Bala)' के चयन का महत्वपूर्ण कारण भी यही है. 

भूमि कहतीं हैं, ''मेरा किरदार हमारे देश में रंग को लेकर व्याप्त भेदभाव से संबंधित है. भूमि ने अपने किरदार के बारे में बताया कि वह एक सांवली (गहरी चमड़ी वाली) लेकिन बेहद खूबसूरत लड़की है. वह काफी कॉन्फिडेंट, परफेक्ट और खुद में ही सब कुछ है. लेकिन, हमारे देश में जागरुकता की कमी है, इस कारण आस-पास के लोग उसे ऐसा महसूस कराते हैं कि वह पूर्ण नहीं है. वे कहती हैं, आज केवल गोरी चमड़ी वाले लोगों के प्रति ही जुनून देखने को मिल रहा है. अगर आप अपने चारों तरफ देखें तो यही पता चलता है. आपको रंग साफ करने वाली क्रीम के विज्ञापन देखने को मिलेंगे और यदि आप कोई वैवाहिक विज्ञापन देखते हैं तो वहां हमेशा से ही गोरी लड़की की ही जरूरत रहती है और उन्हें एक पतली, लंबी और स्वाभाविक रूप से गोरी लड़की की जरूरत होती है.'' 

भूमि सांवले या गहरे रंग के प्रति समाज में व्याप्त इस ओछी मानसिकता से लड़ना चाहती हैं. वे कहती हैं, 'सुंदरता की सही परिभाषा बताने के लिए सामाजिक तौर पर हमने कुछ गलत मानक निर्धारित किए हैं और सुंदरता की इस परिभाषा को तोड़ने के लिए मैंने व्यक्तिगत रूप से इसे खुद पर लिया है, क्योंकि सुंदरता काफी व्यक्तिपरक होती है. प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह काफी अनूठा है. भगवान ने हम में से प्रत्येक को अलग तरह से बनाया है और हमें खुद को स्वीकार करने की जरूरत है. बाला में इसी के बारे में बताया गया है.'' 

ऐसी है 'बाला' की 'लतिका'
भूमि ने कहा कि फिल्म आत्म-सम्मान और स्व-प्रेम के बारे में है और जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ा तो उसमें कुछ ऐसा था जो सहज रूप से मेरे साथ जुड़ा था. भूमि आगे कहती हैं, मेरा किरदार 'लतिका', एक अनाथ है जो अपनी चाची के साथ रहती है. उसकी चाची काफी खुले विचारों वाली महिला है, लेकिन मुझे लगता है कि लतिका सिर्फ आत्मविश्वास से भरी एक लड़की है, जो हमेशा अपने बचाव की मुद्रा में ही रहती है. भूमि बताती है कि 'लतिका' एक वकील है. उसके ऐसा होने के कारणों के बारे में वे कहती हैं, कि बचपन से ही उसके रंग को लेकर लोग उसे चिढ़ाते थे और उसे एक नाम दे दिया साथ ही अपमानजनक बातें कहकर उसे नीचा दिखाया. मुझे लगता है कि इसीलिए ही वह इस फिल्म में खुद को सीधे तौर पर इस त्रुटिपूर्ण समाज में स्थापित चीजों की तरह ले गई है. भूमि कहती हैं, सांवले या गहरे रंग के साथ जुड़े बदसूरत विचारों को यह फिल्म ध्वस्त करने की कोशिश करेगी.

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